कौन से व्रत कब करने चाहिए? कौन वार में कौन से भगवान का व्रत रखने चाहिए

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किसी भी व्रत को शुरू करने से पहले सही समय और तिथि का ध्यान  रखना होता है। अगर आप व्रत शुरू करना चाहती हैं तो शुक्ल पक्ष के पहले वार से व्रत शुरू करें।  जैसे अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष शुरू होता है,  तो अमावस्या के बाद का पहला सोमवार होगा उस दिन से आप सोमवार का व्रत  शुरू कर  सकते हैं। मलमास, अधिक मास में व्रत शुरू नहीं करने चाहिए। देवशयन के समय भी व्रत आरम्भ नहीं करने चाहिए।

सातों दिनों के व्रत कौन -कौन  से होते हैं, कब शुरू करें और क्या खाना चाहिए जानकारी दें रहे हैं।   

रविवार व्रत अश्विनी मास में शुक्ल पक्ष के पहले या हस्त नक्षत्र व रविवार एक साथ हों तो उस दिन से व्रत शुरू करें।  व्रत  चलाए।  हो सके  के बिना भोजन करें।  कम से कम सात व्रत  करें। सूर्य की उपासना करें। 

सोमवार व्रत  चित्रा नक्षत्र के  सोमवार से योग होने पर शुरु करें।  दिन में शिवपूजन उपासना के बाद दिन ढलें अथवा शिवोपासना के बाद प्रदोष काल में एक बार भोजन करें।  चावल, दही, दूध के प्रदार्थ, खाड़ आदि।   भोजन में शामिल करें।  7, 16 या साल भर के सोमवारों का व्रत करें।

मंगल वार व्रत स्वाति या अश्विनी के साथ मंगलवार हो तो व्रत शुरू करें।  21 मंगलवार या सालभर तक व्रत करें।  पूजाविधि उपाय भाग्योदय में देखें।  मांगले देव की और हनुमान जी की पूजा करें।  पूजा के बाद उपले या कोयले की राख से भूमि पर तीन रेखाएँ खींच कर बाएं पैर से मिटा दें।  लड्डू , बूंदी, चूरमा भोग में दें और स्वयं भी लें तीसरे पहर में एक बहार भोजन करें।

बुधवार व्रत विशाखा नक्षत्र व बुधवार के दिन आरम्भ करें।  सूर्यास्त के बाद्द ही एक बार भोजन करें।  मूंग दाल या उसके बने प्रदार्थ शामिल करें।  साल भर तक व्रत चलाए। बुध देव व विष्णु जी की पूजा करें।

गुरुवार व्रत – अनुराधा व गुरुवार के योग दिन से व्रत करें।  पीले फल, हल्दी, केसर, बेसन के पर्दार्थ भोजन में लें।  वर्ष भर व्रत करें।  बृहस्पति व विष्णु जी की पूजा करें।

शुक्रवार व्रत श्रावण शुक्ल के पहले शुक्रवार से व्रत करें।  मिठाई या हलवे का भोग है।  वर्ष भर व्रत करें।  दिन ढलने पर पूजा करें।

शनिवार व्रत श्रावण शुक्ल के प्रतधाम शनिवार से व्रत करें।  शिव, हनुमान जी और शनिदेव की पूजा करें।  तिल  के पर्दार्थ, काली उड़द, राजमा, भुने तिल व उड़द की खिचड़ी भोग में शामिल करें।  सात व्रत कम से कम करें।

दिन के नाम  भगवान् की पूजा
रविवार  सूर्य की उपासना करें।
सोमवार  शिव जी की पूजा करें।
मंगलवार  हनुमान का पूजन,और मंगल देव की पूजा करें।
बुधवार  बुध देव और विष्णु जी की पूजा करें।
गुरुवार  बृहस्तपति और विष्णु जी की पूजा करें।
शुक्रवार  देवी और शुक्र देव का पूजन करें।
शनिवार  शनि देव, शिव जी और हनुमान जी का पूजन करें।