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खरमास का समय 2020

धनु और मीन राशि में जब सूर्य प्रवेश करता है तब खरमास या मलमास लगता है।  खरमास के दिनों में भगवान् विष्णु की आराधना करनी चाहिए। सूर्य देव की भी पूजा की जाती हैं।  ऋषिओं नै इसे खरमास का नाम इसलिए दिया की लोग सांसारिक कार्यों से मुक्त होकर आधयात्मिक कार्यों  में लग जाएँ और ईश्वर की आराधना करनी चाहिए। और अपने चंचल मन पर काबू पा सकें।

इस दिन कल्पवास का भी विधान है कल्पवास का अर्थ है – संगम के तट पर वेदाध्ययन और साधना करना।  यह पौष माह के ११वें दिन से माघ माह के १२वें दिन तक रहता है। कल्पमास को अहिंसा और धैर्य और भक्ति के लिए माना जाता है।  पौष पूर्णिमा को ही देवी शाकुम्बरी का जन्म हुआ था।

खरमास – जब सूर्य देव गुरु की राशि धनु या मीन में विराजमान रहते हैं, उस समय को खरमास कहा जाता है। खरमास के पीछे भी एक पौराणिक कहानी है। खर का अर्थ है गधा।  मर्केण्य के अनुसार जब सूर्य देव अपने  सात घोडों के साथ पृथ्वी की परिकर्मा करने लगे तो उन्हें बिना रुके ही परिकर्मा पूरी करनी थी पर घोडों  के थक जाने के कारण  घोड़े थोड़ी देर के लिए रुक कर तालाब के पास पानी पीने लगे। देव देव को ज्ञात था की उनका दाइत्व क्या है और वह एक  क्षण  के लिए भी रुक नहीं सकते।  इसके लिए उन्होंने वहीं तालाब के पास खड़े २ गधों को रथ में जोता और पृथ्वी की परिक्रमा करने लगे। गधे अपनी मंद गति से पृथ्वी की परिक्रमा पूरी करने में सक्षम हुए।मंद गति से पूरे पौष मास में ब्रह्मांड की यात्रा करते रहे, इस कारण सूर्य का तेज बहुत कमजोर हो धरती पर प्रकट होता है। मकर संक्रांति के दिन पुन: सूर्यदेव अपने घोड़ों को रथ में जोतते हैं, तब उनकी यात्रा पुन: रफ्तार पकड़ लेती है। इसके बाद धरती पर सूर्य का तेजोमय प्रकाश बढ़ने लगता है।

खरमास में क्या क्या वर्जित होता है

खरमास के महीने में कोई भी शुभ कार्यं नहीं किया जाता।  चाहे कोई भी विवाह सम्बंधित हो, या कोई भवन निर्माण। चाहे कोई बालक के मुंडन जैसे कार्यक्रम हो है फिर कोई गृह प्रवेश।

चाहे कोई भी शुभ कार्य हो कोई नै शिक्षा से जुड़ा या फिर किसी दूकान या मकान का निर्माण।   लग्न, रोका, सगाई, शादी सम्बंधित कोई कार्य नहीं किया जाता।  कोई भी मांगलिक कार्य नहीं होता है।

किस भगवान् करें पूजा खरमास में

खरमास के महीने में सूर्य देव और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। सूर्य देव ही धनु और मीन राशि में प्रवेश करते है और बहगवां श्री विष्णु हरी ही जग पालन करता है।  इसलिए इनकी पूजा की जाती है खरमास के महीने में।

खरमास लगने का समय

खरमास लगने का समय है – 14 मार्च 2020, दिन – शनिवार, समय – दोपहर 02 बजकर 23 मिनट

इस समय सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करेंगे।

खरमास समाप्ति का समय – 13 अप्रैल 2020