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गंगा दशहरा जून 2018 इस दिन स्नान कर सकते हैं गंगा के पुण्य घाट पर

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गंगा दशहरा 2018 जून तारीख 

 

“नमामि गंगे ! तव पाद पंकजम सुरा सुरैर्वन्दित दिव्य रूपं ।
भुक्तिम च मुक्तिम च ददासि नित्यं भावनु सारेण सदा नराणाम ॥”

 

अर्थात – हे माता गंगे, देवताओं और राक्षसों से वंदित, आपके चरणों में हमारा नमस्कार स्वीकार हो। आप मनुष्य को नित्य ही उनके भाव के अनुसार भक्ति और मुक्ति प्रदान करती है।

गंगा दशहरा हिन्दू धर्म में मनाए जाने वाले महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है जिसे सभी बड़ी श्रद्धा से मनाते है। यूँ तो सालभर में माँ गंगा को समर्पित कई पर्व मनाए जाते है लेकिन उन सभी में गंगा दशहरा को सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। गंगा दशहरा का पर्व ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है, जो सामान्यतौर पर मई या जून के महीने में आता है। गंगा दशहरा को गंगावतरण भी कहा जाता है जिसका अर्थ है “गंगा का अवतार”।

क्यों होता है गंगा दशहरा, क्यों स्नान जरुरी है गंगा दशहरा के दिन गंगा के घाट पर

माना जाता है गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते है।

Ganga Dussehra 2018 Date : 2018 में गंगा दशहरा 24 मई 2018, वीरवार को मनाया गया।

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 इस साल दो ज्येष्ठ होने की वजह से दो बार गंगा दशहरा का स्नान होगा इसलिए जून 2018 में भी गंगा दशहरा का स्नान होगा 

जून 2018 में गंगा दशहरा 22 तारीख शुक्रवार को मनाया जायेगा, आप जून 22 को गंगा दशहरा का स्नान गंगा  के पुण्य घाट पर कर सकते हैं।

गंगा दशहरा का महत्व : गंगा दशहरा की कथा

हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार, जिस दिन माँ गंगा का धरती पर आगमन हुआ था उसे गंगा दशहरा कहा जाता है। माना जाता है भागीरथ के पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए धरती पर गंगा लाना चाहते थे। क्योंकि एक श्राप के कारण केवल माँ गंगा ही उनका उद्धार पर सकती थी। जिसके लिए उन्होंने माँ गंगा की कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माँ गंगा ने दर्शन दिए और भागीरथ ने उनसे धरती पर आने की प्रार्थना की।

Ganga Dussehra Mahatvगंगा दशहरा पूजन विधि और महत्व

फिर गंगा ने कहा : “मैं धरती पर आने के लिए तैयार हूँ, लेकिन मेरी तेज धारा धरती पर प्रलय ले आएगी। और अगर समय रहते धारा को नियंत्रित नहीं किया गया तो सृष्टि के नष्ट होने की संभावना है।” जिस पर भागीरथ ने उनसे इसका उपाय पूछा और गंगा ने शिव जी को इसका उपाय बताया। माना जाता है माँ गंगा के प्रचंड वेग को नियंत्रित करने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में समा लिया जिससे धरती को प्रलय से बचाया जा सके। और उसके बाद नियंत्रित वेग से गंगा को पृथ्वी पर प्रवाहित करा। जिसके बाद भागीरथ ने अपने पूर्वजों की अस्थियाँ प्रवाहित कर उन्हें मुक्ति दिलाई। तभी से इस दिन को गंगा सप्तमी या माँ गंगा के जन्म दिन के रूप में मनाया जानें लगा।

इस दिन भक्तगण माँ गंगा की पवित्र धारा में स्नान करते है। माना जाता है इस दिन गंगा में स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते है और व्यक्ति निरोग होता है। इस दिन प्रातःकाल सूरज उगने से पूर्व स्नान करने का खास महत्व होता है।

गंगा दशहरा की परंपराए :

गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करना और पूजन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। माना जाता है इस दिन गंगा स्नान करने से 10 प्रकार के पापों का निवारण हो जाता है। इन पापों का नाश करने के लिए सभी वस्तुएं 10 की संख्या में दान करने का विधान है। पूजा में 10 तरह के फूल, 10 दीपक, 10 प्रकार के नेवेद्य, 10 पान और 10 तरह के फल होना अनिवार्य होता है। यदि संभव हो तो ब्राह्मण को 10 ही होने चाहिए। इस दिन दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है।

इस दिन लाखों की तदाद में भक्तगण अलाहबाद/प्रयाग, गढ़मुख्तेश्वर, हरिद्वार, ऋषिकेश और वाराणसी में गंगा स्नान करने आते है। वाराणसी में इस पर्व को धूम अलग ही देखने को मिलती है। गंगा दशहरा के दिन हजारों भक्त दशाश्वमेध घाट की आरती देखने इक्कठे होते है और साथ ही पवित्र गंगा में दुबकी भी लगाते है।