दिसंबर 2020-पंचांग और कैलेंडर

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दिसंबर 2020-पंचांग और कैलेंडर, पौष संक्रांति फल, एकादशी व्रत, अमावस्या, पूर्णिमा, प्रदोष व्रत, गणेश चतुर्थी,  लोक भविष्य, राशिफल

इस लेख हम दिसंबर माह 2020 के बारे में जानेंगे के कब कब है व्रत व् त्यौहार? दिसंबर 2020 में कब आने वाली है पूर्णिमा और अमावस्या ?

एकादशी व्रत दिसंबर 2020 

  • 11 दिसंबर 2020, शुक्रवार को उत्पन्ना एकादशी व्रत है।
  • 25 दिसंबर 2020, शुक्रवार को मोक्षदा एकादशी व्रत है।

प्रदोष व्रत दिसंबर 2020 

  • 12 दिसंबर 2020, शनिवार
  • 27 दिसंबर 2020, रविवार

पूर्णिमा दिसंबर 2020

  • 30 दिसंबर 2020, बुधवार को मार्गशीर्ष पूर्णिमा है।

श्री गणेश चतुर्थी व्रत दिसंबर 2020

  • 3 दिसंबर 2020, गुरूवार

श्री काल भैरवाष्टमी दिसंबर 2020

  • 7 दिसंबर 2020, सोमवार को श्री काल भैरवाष्टमी है।
  • इस दिन मंदिर जाकर श्री महाकाल भैरव के रूप में भगवन शंकर की पूजा की जाती है।

पौष संक्रांति दिसंबर 2020

  • 15 दिसंबर 2020, मंगलवार, मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष, द्वितीया तिथि, मूल नक्षत्र रात्रि 9:31 पर कर्क लग्न में प्रवेश करेगी।
  • 30 मुहूर्त्ति इस संक्रांति का पुण्यकाल मध्याह्न बाद रहेगा।
  • वारानुसार महोदरी तथा नक्षत्रानुसार राक्षसी नामक यह संक्रांति चोर, बईमान तथा दुष्ट लोगों के लिए लाभप्रद रहेगी।

अमावस्या दिसंबर 2020 

  • 14 दिसंबर 2020, सोमवार को मार्गशीर्ष-सोमवती-अमावस है।

रामविवाहोत्स्व दिसंबर 2020

  • 19 दिसंबर 2020, शनिवार को श्री रामविवाहोत्स्व श्री पंचमी का पर्व विशेष रूप से मनाया जायेगा।
  • इस दिन श्री पंचमी को कमलासन पर विराजित एवं कमलपुष्प लिए श्री लक्ष्मी जी की सुवर्णमयी या चांदी की मूर्ति स्थापित कर विशेष पूजोपरान्त श्री सूक्त, लक्ष्मी-सूक्त का पाठ, ब्राह्मणो को भोजन व दानादि करने से सौभाग्य एवं लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।

लोक भविष्य दिसंबर 2020

  • भौमवती संक्रांति तथा मार्गशीर्ष मास में पौष संक्रांति का प्रवेश होने से राजनैतिक क्षेत्रों में अस्थिरता एवं अशांति होने के संकेत है।
  • कहीं अनाज की कमी के कारण दुर्भिक्ष एवं अराजकता व्याप्त हो।
  • संक्रांति कुंडली में सप्तम भाव में गुरु-शनि के कारण विश्व में भारत की प्रतिष्ठा एवं प्रभुत्व के नये आयाम स्थापित होंगे
  • साथ ही चान्द्र मार्गशीर्ष में पांच मंगलवारों का समावेश होने से राजनेताओं में विग्रह-छत्रभंग तथा महंगाई, उपद्रव व सरकारी कठोर नीतियों से प्रजा में असंतोष पैदा हो।
  • किसी प्रमुख राजनेता की मृत्यु या अपदस्थ होने के योग है।