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मरघट वाले बाबा का मंदिर यमुना बाजार दिल्ली

दिल्ली में मंदिरों की कमी नहीं हैं। यहां हर गली मोहल्लों में आपको मंदिर मिल जाएंगे। पर कुछ मंदिर ऐसे हैं जो अभी के नहीं कई हजार साल पुराने माने जाते हैं। जिनका संबंध पौराणिक काल से माना जाता है। ऐसे ही पुराने मंदिरों की श्रृंखला में एक है मरघट वाले हनुमान मंदिर इनकी प्रसिद्धी देश ही नहीं विदेश में भी फैली हुई है।

Marghat Wale Hanuman Mandir Address: कश्मीरी गेट से कुछ ही दूरी पर रिंग रोड के पास, निगम बोध घाट के पास यमुना बाजार में मरघट वाले हनुमान जी का मंदिर है, जो आस्था का प्रतीक है। यहां वैसे तो रोजाना ही भक्त जनों की भीड़ रहती है पर मंगलवार और शनिवार को तड़के से ही लंबी लाइनें लग जाती है। कई बार तो इसकी वजह से टैफिक को भी रोकना पड़ता है। हनुमान मंदिर में लोग दर्शन करने दूर दूर से आते हैं। यहां छोटे-बड़े सभी तरह के लोग लाइन में खडे़ होकर दर्शन करते हैं।

History of Marghat Wale Hanuman Mandir Temple : मंदिर से जुड़ी कहानीः कहते हैं हनुमान जी संजीवनी लेने जा रहे थे तो विश्राम के लिए यहां रुके थे। उस वक्त यहां शमशान घाट हुआ करता था। यमुना नदी भी इस घाट के किनारे से गुजरती थी। हनुमान जी ने कुछ पल सांस लेने के बाद एक बार फिर उड़ान भरी थी। समय के साथ यमुना नदी मंदिर से दूर होती चली गई। 

मंदिर का इतिहास इतना ही पुराना है जितना रामराज जो यहां से आगे बढ़ता हुआ महाभारत काल से होता हुआ आज भी जिंदा हैं। कहते है यह मंदिर पांडवों के बनवाए उन पांच मंदिरों में से एक है जो उन्होंने इंन्द्रप्रस्थ नगर में बनवाए थे।

हनुमान जयंती पर होता है खासः हनुमान जयंती पर हनुमान जी का चोला बदला जाता है और उनका श्रृंगार किया जाता है। इस दिन शोभा यात्रा भी निकाली जाती है। मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति के अलावा माता रानी की भी मूर्ति है।

सुरक्षा के प्रबंधः यहां की भीड़ को देखते हुए अब सुरक्षा के भी इंतजाम किए गए हैं। सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। मंदिर में उमड़ती भीड़ को ध्यान में रखते हुए यहां पार्किंग की भी व्यवस्था की गई है।

कचोरी नहीं खाई तो क्या खायाः मंदिर में दर्शन करने आए हैं तो खाली पेट तो होंगे ही, तो यहां पर आकर आपको खाने-पीने का भी पूरा इंतजाम है। यहां की विशेष कचोरी का स्वाद भी लुभाए बगैर नहीं रहेगा।

सफाई का विशेष इंतजामः यहां पूजा में चढ़ने वाले फूल मालाओं को रीसाइकिल करके उनकी खाद बनाई जाती है। मंदिर में समय के साथ बाहरी परिवर्तन तो किए गए हैं पर मूल रूप अभी भी ज्यों का त्यों हैं।

दिलीप का कहना है हर मंगलवार को सुबह सुबह आ जाता हूं। सालों से आ रहा हूं और मुझे लगता है मैं जो सोचता हूं वो बाबा पूरा कर देते है।

जयपुर से आई साक्षी का कहना था पहली बार आई हूं। इस मंदिर के बारे में काफी सुना था इसलिए दर्शन करने आ गई।