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व्रत की महत्वपूर्ण जानकारियाँ, कब कैसे और कब नहीं करने चाहिए व्रत

व्रत यानी उपवास का बहुत महत्त्व है।  उपवास का अर्थ है की पूरे दिन व रात में अन्न का सेवन नहीं करना।  जब हम ईश्वर का ध्यान करते हैं और उनकी कृपा चाहते हैं तो उपवास करके उनकी कृपा दिष्टि अपने ऊपर चाहते हैं।  ऐसे में व्रत,  और विधिवत पूजा करने से ही ईश्वर प्रसन हो जाते हैं।

व्रत दो प्रकार के होते हैं।

1 एकभुक्त व्रत – इस व्रत को करने के लिए सुबह नहाधोकर ईश्वर का ध्यान करें। विधिवत पूजा करें। उसके बाद दोपहर के बाद केवल एक बार भोजन करना चाहिए भोजन में फलाहार लें और वह भी  आपके पूरे दिन के भोजन का एक तिहाई हिस्से में होना चाहिए।  बाकी बीच में  कुछ नहीं खाना चाहिए, पर जल पी सकते हैं।  जल में भी आप मीठा जल ही ले सकते हैं, या केवल सदा पानी पी सकते हैं।

2 नक्त व्रत – नक्त व्रत में आप सुबह नहा धोकर ईश्वर का पूजन करें।  सारे दिन आप भगवान् का नाम लें।  इस व्रत में आप जल तो ग्रहण केर सकती है पर भोजन केवल सूर्यास्त  के सवा घंटे बाद ही करें।  इस व्रत में भी आप अपनी दिनचर्या का एक तिहाई भोजन ही खा सकती हैं।

व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं खाएं

व्रत  में आलू, दूध, दही, पनीर, लौकी, तोरी, पालक, चौलाई, कुट्टू, श्यामक चावल, सेंधा नमक, तिल, और काली मिर्च का सेवन किया जा सकता है।  व्रत में फल खा सकते है, किन्तु खट्टे फल खाने की मनाही होती है।

व्रत में दालें, बैंगन, गाजर, मटर, गोभी, पेठा, ये सब नहीं खाया जाता। लहसुन व प्याज व्रत में  नहीं खाना चाहिए। व्रत में वायुकारक और तामसिक भोजन की सख्त मनाही है।

व्रत के दिन श्राद्ध या ग्रहण 

व्रत का नियम चल रहा हो और ठीक व्रत के दिन घर में श्राद्ध हो तो या ग्रहण हो तो क्या करें। शास्त्र की आज्ञा की विधि तर्पण आदि करके श्राद्ध पुरुष ब्राह्मण को भोजन कराने के बाद स्वयं श्राद्ध के पकवान की थाली को केवल हाथ में लेकर मुँह तक थाली ले जाकर गाय को खिला दें।  वास्तव में अपना निश्चित फलाहार नियमानुसार ही करें।

ग्रहण में ग्रहण समाप्त होने पर स्नान करके भोजन करें।  चंद्रग्रहण आधी रात से पहले समाप्त हो तो तभी भोजन करें।  यदि चंद्रग्रहण आधी रात के बाद समाप्त हो तो अगले दिन ही फलाहार करें।

सूतक या रजस्वला होने पर 

यदि पहले से ही के दिनों का नवरात्र आदि का व्रत चल रहा हो और बीच में सूतक, मृत्यु का अशौच या रजोदर्शन आ पड़े तो व्रत का तयाग न करें।  यदि सूतक के दौरान एक दिन का व्रत आये तो फलाहार आदि नियमानुसार करें और देवमूर्ति की पूजा आदि मूर्तिस्पर्श के बिना मानसिक रूप से ही देवस्थान से दूर रहकर करें।

व्रत में आपसी सहमति 

पति पत्नी कोई भी व्रत करें, उसमे दोनों की सहमति होना आवश्यक है।  एक दूसरे को जानकारी के बिना व्रत निषेध है।  अविवाहित लोग परिवार जनों या माता पिता की सहमति लें।  सहमति के बिना किया गया व्रत निष्फल है।

व्रत कब आरम्भ करें 

अधिक मास,क्षय मास, गुरु शुक्र के अस्त में, व्यतिपात, वैधृति, भद्रा में पहली बार व्रत का नियम शुरू न करें।