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हनुमान जयंती 2020 कब है?

Hanuman Jayanti 2020 – हिन्दू धर्म में हर भगवान् , हर देवी-देवता , पेड़, वृक्ष, सूर्य चाँद सबकी बहुत ही मान्यता और महत्त्व होता है। यह तक की हिन्दू धर्म में नक्षत्र , ग्रह , समय,  मुहूर्त सभी का बहुत महत्त्व माना गया है। आज हम बात कर रहे है  हनुमान जयंती की। 

“हनुमान जी के जन्म दिन को ही हनुमान जयंती के नाम से जाना जाता है।”

हनुमदुपासना -कल्पद्रुम नमक ग्रन्थ में श्रीहनुमान का जन्म चैत्र शुक्ल पूर्णिमा, मंगलवार के दिन मुंज की मेखला से युक्त, कोपीन से संयुक्त और यागोपावनीत से भूषित होना लिखा है। 

भगवान् शिव में हनुमान जी  के ११वा रूप में अवतार लिया था। हनुमान जयंती का विशेष महत्त्व है।   भगवान् शिव ने हनुमान भक्त बन कर श्री राम का साथ दिया और सदैव उनके साथ रहे। कहा जाता है की केवल हनुमान नाम लेने से ही कष्ट मिट जाते है। जो भी पूरे भक्क्ति भाव से बजरंबली को प्रसन करता है उनके कष्ट केवल राम नाम के साथ हनुमान जी का धयान करने मात्र से ही मिट जाते है।

“संकट तें हनुमान छुडावे मन करम  वचन जब ध्यान लगावें। “

चैत्र पूर्णिमा को श्रीहनुमान जी के जन्म वाले मत को दक्षिणी भारत में अधिक मानयता प्राप्त है, जबकि उत्तर भारत में श्री हनुमान जी का जन्मोत्सव या विजयभिनन्दन कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को मानते है। दोनों मतानुसार श्रीहनुमानजी जन्म महा निशा (अर्धरात्रि )के समय हुआ था।

हनुमान जी का जन्म – केसरी नंदन और माता अंजनी के पुत्र के रूप में भगवान् शिव ने  हनुमान के रूप में जन्म लिया। जिस दिन  जन्म हुआ वह चैत्र माह की  पूर्णिमा का दिन था। और मंगलवार का दिन था। जब भगवान् श्री विष्णु नै राम जी के रूप में जन्म लिया तब शिव जी नै उनका सेवक बन कर हनुमान जी का रूप लिया। हनुमानजी बाल ब्रहमचारी थे इसलिए इन्हे जनेऊ अर्पित किया जाता है।  

“हाथ वज्र और ध्वजा विराजै कांधे मुंज जनेऊ साजै “

“राम-दूत अतुलित धामा अंजनी पुत्र पवन-सुत  नामा “

हनुमान जी का नामकरण – हनुमान जी नै एक बार सूर्य देव को मीठा  फल समझ कर अपने मुँह में रखने लगे थे पर इससे पहले ही इंद्र देव के व्रज  की मार से इनकी ठुड्डी (हनु) टूट गई थी इसके के चलते इनका नाम हनुमान पड़ गया।  हनुमान जी के और भी बहुत से नाम है।  जैसे -केसरीनन्द , अंजनी पुत्र, पवनपुत्र, बजरंगबली, संकटमोचन, कपीश , शंकर सुवन ,मारुतिनंदन आदि।  

सिंदूर की परम्परा – एक बार माता सीता जब रामजी के नाम का सिंदूर लगा रही थीं तब हनुमानजी नै पूछा आप ऐसा क्योँ कर रही है तब माता नै कहा की ऐसा करने  से भगवान् श्री राम की उम्र बढ़ती है और वह खुश भी होते है।  बस इसके बाद खुद अपने सारे शरीर पर सिंदूर लगा कर हनुमान जी भरे दरबार आकर खड़े हो गए और श्री राम जी से कहा की प्रभु अब आप मुझसे भी खुश हो गए है। तभी से हनुमान जी के भोलेपन को मान देते हुए उन पर सिंदूर चढ़ाया जाता है।   

 “अष्ट सिद्धि  नौ निधि के दाता  अस बर दिन जानकी माता”

हनुमान  जी को 8 सिद्धि और 9 निधि के ज्ञानी थे।  हनुमानजी को 8 सिद्धि और ९ निधि का ज्ञान मिला था। वह जब चाहे सूक्ष्म रूप रख  सकते थे और जब चाहे विशाल रूप बना सकते थे।  ये उनकी सिद्धि  में से ही एक गुण था उनका। 

हनुमान जयंती के दिन क्या करें – दक्षिण मुख होकर हनुमान जी की पूजा करना अतयंत फलदाई होता है।  इस दिन सुन्दर कांड का पाठ करवाना चाहिए और रामचरित्र मानस का भी पाठ अवश्य करना चाहिए।  इससे बजरंगबली की कृपा सदैव बनी रहती है।  

आज के दिन उनके भक्त व्रत करते है। ब्रह्मचर्य का पालन करते है। इस दिन मंदिरों में भजन कीर्तन होता है। माना जाता है की यदि आज के दिन ५ या ११ बार हनुमान चालीसा का पाठ किया जाये तो हनुमान जी कृपा अवश्य ही होती है।   

हनुमान जयंती कब है?

नुमान जयंती का समय – 7 अप्रैल 2020 मंगलवार से

अलगे दिन 8 अप्रैल 2020 को 8 बजे तक