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साल 2020 की अंतिम पूर्णिमा कब है? और बतीसी पूर्णिमा का क्या है महत्त्व?

2020 माह की अंतिम पूर्णिमा जिसे बतीसी पूर्णिमा भी कहा जाता है। भगवान् श्री विष्णु को समर्पित होती है। हिन्दू धर्म के अनुसार हर माह की हर पूर्णिमा का अपना ही महत्त्व, समय और फल होता है।  जो भी पूर्णिमा का व्रत करता है उसे सभी पाप कर्मो से मुक्ति मिल जाती है। कहा जाता है की प्रभु की भक्ति करके और सच्चे मन से व्रत और पूजा करके मोक्ष की प्राप्त की जा सकती है।

पौराणिक धर्म ग्रंथों के अनुसार आज ही के दिन सतयुग काल की शुरुवात हुई थी। मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन सूर्य और चन्द्रमा दोनों ठीक एक दूसरे के आमने सामने होते है। इस दिन चन्द्रमा का प्रभाव मनुष्य पर सबसे ज्यादा होता है।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन गीता पाठ करवाने का भी महत्त्व है। मानयता है की इस दिन गीता पाठ करवाने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। और उनकी आत्मा को तृप्ति मिलती है।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा को बतीसी पूर्णिमा क्यों कहते हैं?

मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर तुलसी की जड़ की मिट्टी से पवित्र सरोवर में स्नान करने से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है। स्नान करते समय ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना चाहिए। इस दिन आप जो भी दान करते हैं उसका फल अन्य पूर्णिमा की अपेक्षा 32 गुना अधिक प्राप्त होता है। इसलिए इसे बत्तीसी पूर्णिमा कहा जाता है।

आइए अब जानते हैं कब है मार्गशीर्ष पूर्णिमा का दिन और शुभ समय समय?

मार्गशीर्ष पूर्णिमा का दिन – मंगलवार -29दिसम्बर 2020 सुबह 7:54 से शुरू हो कर बुधवार – 30 दिसम्बर 2020 समय – 8:57 तक

मार्गशीर्ष पूर्णिमा को श्री दत्तात्रेय जयंती मनाई जाती है।