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अक्टूबर 2021 में पूर्णिमा कब है? तिथि और मुहूर्त

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अक्टूबर माह में आने वाली पूर्णिमा को आश्विन पूर्णिमा कहा जाता है क्योंकि इस दौरान आश्विन माह चल रहा होता है। आश्विन पूर्णिमा फसल के त्यौहार के रूप में भी मनाया जाता है। इसके अलावा आश्विन पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा, कुन्नर पूर्णिमा भी कहा जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन देवी लक्ष्मी की पूजा का बहुत अधिक महत्व होता है और ऐसा करने से आप पर देवी लक्ष्मी की कृपा सदा बरसती रहती है।

आश्विन यानी शरद पूर्णिमा का महत्व क्या होता है?

शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब आता है और साथ ही इस दिन चाँद की सबसे ज्यादा और अनोखी चमक होती है और जब आप चाँद को देखते हैं तो चाँद की रोशनी आपके लिए बहुत ही सुखदायक बन जाती है जिसे देखकर आप उसमे खो जाते हैं। आश्विन पूर्णिमा के दिन आसमान में धूल और कालापन बिल्कुल भी नहीं होता है आसमान बिल्कुल साफ़ होता है और मौसम काफी अच्छा रहता है इसीलिए आपको चाँद की बिल्कुल साफ़ झलक नज़र आती है।

शरद पूर्णिमा का पौराणिक महत्व

इसके अलावा पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा कहा जाता है की शरद पूर्णिमा के दिन ही भगवान कृष्ण इस दिन अपने व्यक्तित्व की सोलह कलाओं के साथ पैदा हुए थे। इसीलिए ब्रज में शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा के रूप में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन भगवान कृष्ण अपनी गोपियों और राधा रानी के साथ रास लीला करते हैं। साथ ही शरद पूर्णिमा का महत्व इसीलिए भी बहुत ज्यादा होता है क्योंकि हिंदू शास्त्रों के अनुसार माता लक्ष्मी जिन्हे धन और समृद्धि की देवी माना जाता है उनका जन्म भी शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था।

इसीलिए ऐसा माना जाता है की शरद पूर्णिमा के दिन देवी लक्ष्मी रात के समय पृथ्वी का चक्कर लगाती हैं और सभी मनुष्यों के कार्यों को देखती हैं। साथ ही ऐसा माना जाता है कि आश्विन पूर्णिमा यानी की शरद पूर्णिमा, पूर्णिमा का केवल एक ऐसा दिन होता है जिस दिन चंद्रमा अपने सोलह काल या गुणों से परिपूर्ण होता है। और चाँद की रौशनी ऐसी होती है जो किसी के शरीर और आत्मा को पोषण दे सकती हैं। शरद पूर्णिमा के दिन लोग तांबे के बर्तन में पानी रखते हैं या चावल और खीर बनाकर पूरी रात चंद्रमा की रोशनी में रखते हैं।

ऐसा करने के कारण यह होता है की उस खीर को भगवान् आकर खाते हैं जिससे वह प्रसाद का रूप ले लेती है और उसके बाद अगली सुबह वो लोग इसे खाते हैं साथ ही इसे अपने परिवार और रिश्तेदारों के बीच बांटते भी हैं ऐसा करना बहुत ही शुभ माना ता है। इसके अलावा शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा के रूप में भी जाना जाता है और कोजागरी का अर्थ है पूरी रात जागना। ऐसा में कहा जाता है कि जो लोग आश्विन पूर्णिमा की पूरी रात जागते रहते हैं और पूरे तन मन श्रद्धा भक्ति भाव से देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं उन पर माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है साथ ही उनकी धन प्राप्ति की इच्छा पूरी होने में मदद मिलती है, फिर चाहे उनकी जन्म कुंडली में कोई धन योग न हो।

आश्विन पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा के दिन क्या करना चाहिए?

  • शरद पूर्णिमा बहुत ही खास होती है ऐसे में इस दिन आपको किसी नदी, तालाब आदि में जाकर जरूर नहाना चाहिए लेकिन यदि आप वहां नहीं जा सकते हैं तो अपने घर में ही सुबह समय से उठकर स्नान करें।
  • शरद पूर्णिमा के दिन देवी लक्ष्मी और भगवान कृष्ण की पूजा का सबसे अधिक महत्व होता है।
  • अपने घर में मंदिर में आपको इस दिन देवी लक्ष्मी और भगवान कृष्ण का पूरा श्रृंगार कर उन्हें नए कपडे व् गहने पहनाने चाहिए और पूरे भक्ति भाव से उनकी पूजा व् आराधना करनी चाहिए या आप लक्ष्मी मंदिर में जाकर माँ लक्ष्मी को पूरा श्रंगार अर्पित करें और उन्हें नई पोषक पहनाएं।
  • भगवान शिव, देवी पार्वती और भगवान कार्तिकेय की पूजा करना भी शरद पूर्णिमा के दिन बहुत शुभ माना जाता है।
  • शरद पूर्णिमा के दिन गाय के दूध से खीर बनाना बहुत अच्छा माना जाता है और रात के समय इस खीर को भगवान को अर्पित करना चाहिए। और इसके लिए आप इस खीर को पूरी रात के लिए चंद्रमा की रोशनी में रखें फिर अगले दिन इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करें और सभी में बाँटें ऐसा करना बहुत ही शुभ माना जाता है।
  • शरद पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा की पूजा करना और व्रत रखना बहुत शुभ माना जाता है।

आश्विन पूर्णिमा 2021 तिथि व् मुहूर्त

शरद पूर्णिमा आरम्भ: अक्टूबर 19, 2021 दिन मंगलवार को 19:05:43 से पूर्णिमा तिथि आरम्भ होगी।

आश्विन पूर्णिमा तिथि समाप्त: अक्टूबर 20, 2021 दिन बुधवार को 20:28:57 पर पूर्णिमा तिथि समाप्त होगी।

आश्विन पूर्णिमा या आप कह सकते हैं की शरद पूर्णिमा के दिन आप भी चाँद की अनोखी चमक को देखने के लिए चाँद के दर्शन जरूर करें। इसके अलावा आश्विन पूर्णिमा से जुडी सम्पूर्ण जानकारी आपको ऊपर बताई गई है।

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