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अगस्त 2020 सगाई रोका मुहूर्त

August 2020 Engagement Muhurat

August Engagement Muhurat 2020

सगाई, विवाह से पूर्व की जाने वाली महत्वपूर्ण रस्मों में से एक है। जिसे वाग्दान भी कहा जाता है। शादी से कुछ दिन या कुछ महीने पहले ये रस्म की जाती है। जिसमे वर और कन्या एक दूसरे को अंगूठी पहनाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, विवाह और उससे जुडी प्रत्येक रस्म शुभ मुहूर्त में की जाती है। इसीलिए सगाई के लिए भी शुभ मुहूर्त की आवश्यकता होती है। यहाँ हम अगस्त 2020 सगाई शुभ मुहूर्त दे रहे हैं। आप इनमे से मुहूर्त चुनकर सगाई की रस्म पूर्ण कर सकते हैं।

सगाई करने के लिए शुभ नक्षत्र

शास्त्रों के अनुसार, उत्तराषाढ़, स्वाति, श्रवण, पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वाभाद्रपद, पूर्वाषाढ़, अनुराधा, धनिष्ठा, कृतिका, रोहिणी, रेवती, मूल, मृगशिरा, मघा, हस्त, उत्तराफाल्गुनी और उत्तराभाद्रपद नक्षत्रों में वाग्दान करना शुभ होता है।

अगस्त 2020 सगाई मुहूर्त

सगाई तारीख

सगाई दिन

सगाई मुहूर्त

सगाई नक्षत्र

सगाई तिथि

1 अगस्त 2020 शनिवार 07:26-09:43 मूल त्रयोदशी
11:59-18:42
3 अगस्त 2020 सोमवार 14:11-18:34 उत्तराषाढ़ पूर्णिमा
8 अगस्त 2020 शनिवार 09:16-16:10 उत्तराभाद्रपद पंचमी
9 अगस्त 2020 रविवार 09:12-16:06 रेवती षष्ठी
12 अगस्त 2020 बुधवार 06:43-11:16 कृतिका अष्टमी
13 अगस्त 2020 गुरुवार 13:32-19:37 रोहिणी नवमी
14 अगस्त 2020 शुक्रवार 15:46-18:34 मृगशिरा दशमी
19 अगस्त 2020 बुधवार 10:49-17:31 मघा प्रतिपदा
20 अगस्त 2020 गुरुवार 06:24-08:29 पूर्वाफाल्गुनी द्वितीया
10:45-17:27
21 अगस्त 2020 शुक्रवार 06:25-10:41 उत्तराफाल्गुनी तृतीया
13:00-19:05
24 अगस्त 2020 सोमवार 06:26-12:49 स्वाति षष्ठी
15:07-18:53
26 अगस्त 2020 बुधवार 08:05-12:41 अनुराधा अष्टमी
28 अगस्त 2020 शुक्रवार 06:28-07:57 मूल दशमी
10:13-16:55
29 अगस्त 2020 शनिवार 10:09-16:51 पूर्वाषाढ़ एकादशी
30 अगस्त 2020 रविवार 06:29-10:05 उत्तराषाढ़ द्वादशी
12:25-18:30
31 अगस्त 2020 सोमवार 06:30-10:02 श्रवण त्रयोदशी

Note : कई क्षेत्रों में खरमास, श्राद्ध, शुक्र-गुरु अस्त, पंचक, चातुर्मास में मुहूर्त नहीं करते। इसलिए मुहूर्त देखने के पहले और करने के पहले इन बातों को ध्यान में रखें। अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग मान्यता के अनुसार शुभ कार्य किये जाते हैं। आप अपने क्षेत्र के अनुसार ही मुहूर्त करें। यहाँ मुहूर्त देखने और शुभ कार्य करने के पहले अपने क्षेत्र के पंचांग को देख लें और उसके बाद ही मुहूर्त चुनें। बाद में हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।