बसोडा शीतला अष्टमी 2019 कब है पूजा विधि और समय

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March 2019 Sheetala Ashtami, Basoda Sheetala Pooja Vidhi Time Muhurat 2019

2019 Sheetala Ashtami, Basoda Puja Date : हिन्दुओं के प्रमुख पर्व में से शीतला अष्टमी भी एक है, इस दिन शीतला माता की पूजा अर्चना करने के साथ उपवास भी किया जाता है। इसे बसोडा शीतला अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है, इस दिन बासी व् ठन्डे भोजन का शीतला माता की पूजा करने के बाद उन्हें भोग लगाया जाता है, जिसे बसोडा कहा जाता है। और यह पर्व होली के कुछ दिन बाद मनाया जाता है। वैसे यह होली के आठ दिन बाद मनाया जाता है, लेकिन कुछ लोग इसे होली के बाद आने वाले पहले सोमवार या वीरवार को पूज लेते हैं, शीतला माता की पूजा चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि से आरंभ होती है।

इसके आलावा बहुत से धर्म ग्रंथों में शीतला माता की महिमा का गुणगान किया गया है। शीतला माता हाथों में कलश, सूप, झाडू, नीम के पत्ते धारण किए हुए होती हैं साथ ही गर्दभ की सवारी किए यह अभय मुद्रा में विराजमान होती हैं। ऐसा माना जाता है की शीतला माता शीतलता प्रदान करती है, चेचक रोग, खसरा,बड़ी माता, छोटी माता जैसी से बचाती है, और यदि यह समस्या किसी को हो भी जाये तो इससे जल्दी छुटकारा पाने के साथ ठंडक प्रदान करती है जिससे किसी भी तरह की परेशानी नहीं होती है। तो आइये अब जानते है की किस तरह शीतला माता के व्रत पर पूजा कैसे की जाती है, और 2019 में बसोडा शीतला अष्टमी कब है।

बसोडा शीतला अष्टमी पूजा विधि

शीतला अष्टमी के दिन शीतला माता के लिए व्रत किया जाता है, यह होली के बाद आने वाले पहले सोमवार या वीरवार को की जाती है। शीतला माता की पूजा पूरे विधि विधान से की जाती है, और साथ ही इसमें शुद्धता का सबसे ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है। इसके अलावा शीतला माता के भोग के लिए ताजे भोजन का नहीं बल्कि बासी भोजन का इस्तेमाल किया जाता है जो की एक दिन पहले की तैयार कर लिए जाता है। और अगले दिन उसी से पूजा की जाती है, और उसका भोग लगाकर भक्तो में प्रसाद के रूप में बांटने के साथ प्रसाद के रूप में स्वयं भी ग्रहण किया जाता है।

पूजन करने के लिए महिलाएं सुबह उठकर नित्यक्रियाक्रम करने के बाद ठन्डे पानी से नहाती है और उसके बाद शीतला माता के मंदिर या जिस स्थान पर होलिका जलाई गई थी उस जगह पर जाकर पूजा अर्चना करती है। पूजा करने के बाद शीतलाष्टक को पढा जाता है। शीतलाष्टक में शीतला माता की महिमा का गुणगान होता है, और पूजन समाप्त होने पर सभी भक्त शीतला माता से सुख शांति की कामना करता है। और मान्यता के अनुसार इस व्रत को जो कोई भी रखता है यदि उस पर देवी प्रसन्‍न होती हैं तो इससे दाहज्वर, पीतज्वर, चेचक, दुर्गन्धयुक्त फोडे, नेत्र विकार आदि सभी रोग दूर होते हैं।

शीतला व्रत का महत्व

शीतला माता की पूजा स्वच्छता की देवी के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि शीतला माता की पूजा से पर्यावरण को स्वच्छ, सुरक्षित, साफ़ सुथरा रखने की प्रेरणा मिलती है साथ ही मौसम में होने वाले परिवर्तन के कारण बहुत सी बमारियां उत्पन्न होती है। और इन बदलावों से बचने के लिए और बीमारियों से सुरक्षित रहने के लिए साफ सफाई का पूर्ण ध्यान रखना होता है। शीतला माता स्वच्छता की अधिष्ठात्री देवी हैं और इसीलिए शीतला माता की पूजा से हमें स्वच्छता की प्रेरणा मिलती है। चेचक रोग जैसे बहुत से संक्रमण रोगों के होने का यही मुख्य समय होता है इसीलिए शीतला माता की पूजा को विधि पूर्वक करने से इन परेशानियों से बचे रहने में मदद मिलती है। साथ ही शीतला माता के व्रत के दिन घर में चूल्हा तक नहीं जलाया जाता है।

बसोडा शीतला अष्टमी पूजा 2019

2019 में बसोडा 28 मार्च 2019, बृहस्पतिवार के दिन पूजा जाएगा।

शीतला अष्टमी पूजा का समय

शीतला अष्टमी पूजा का मुहूर्त:- 06:20 से 18:32 बजे।

मुहूर्त की अवधि:- 12 घंटे 12 मिनट

तो यह है 2019 में बसोडा शीतला अष्टमी से जुडी कुछ बातें, तो यदि आप भी इस व्रत को करती है तो इसकी पूजा के लिए शुभ समय और पूजा विधि के बारे में ऊपर जानकारी दी गई है।