2019 भाई दूज कब है? शुभ मुहूर्त

0

साल भर में बहुत से त्यौहार मनाएं जाते है, यह त्यौहार सभी के लिए खुशियों और प्यार से भरपूर होते हैं। साथ ही सालभर में दो त्यौहार ऐसे भी आते हैं जो भाई बहन के प्यार प्रेम को बढ़ाने और उनके रिश्ते की डोर को और भी मजबूत करते हैं, और वो त्यौहार हैं रक्षा बंधन और भाई दूज। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई बहन के प्यार को समर्पित त्यौहार भाई दूज मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई के माथे पर चन्दन और कुमकुम का तिलक भाई की लम्बी उम्र की कामना करते हुए सुख समृद्धि से भरपूर रहने की कामना करती है।

उसके बाद भाई भी अपनी बहन को उपहार या पैसे देता है, और अपनी बहन का साथ हमेशा देने का वाधा करता है। भाई दूज को लेकर बहुत सी पौराणिक कथाएं भी बताई जाती है, जैसे की यमराज और यमुना, की कृष्ण और सुभद्रा की। ऐसे में हर एक कहानी का अपना महत्व है लेकिन आखिर में यह भाई और बहन के अटूट प्रेम को ही बयान करती है। साथ ही यह त्यौहार कई जगह पर अलग अलग नाम से भी मनाया जाता है लेकिन इस त्यौहार को मनाने का भाव एक जैसा ही होता है। तो लीजिये अब भाई दूज से जुडी एक कहानी के बारे में जानते हैं।

भाई दूज की कहानी

मान्यता है की भाई दूज के दिन यमराज का पूजन किया जाता है, क्योंकि भाई दूज के दिन ही यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे, और यमराज के अपनी बहन के घर जाने के बाद से ही भाई दूज या यम द्वितीया की परंपरा की शुरुआत हुई। इसीलिए कई जगह पर भाई दूज को यम द्वितीया के नाम से भी मनाया जाता है, सूर्य पुत्र यम और यमुना भाई बहन थे। यमुना बहुत बार अपने भाई यम को अपने घर बुलाती थी और एक बार यमुना के बुलाने पर यमराज यमुना के घर में पहुंचे। और भाई को अपने घर पर देखकर यमुना ने अपने भाई यमराज को भोजन करवाया और तिलक लगाकर अपने भाई के खुशहाल जीवन की कामना की।

लेकिन इसके बाद जैसे ही यमराज ने बहन यमुना से वरदान मांगने को कहा, तो यमुना ने कहा कि, मुझे कुछ नहीं चाहिए बस आप हर वर्ष इसी दिन में मेरे घर आया करेंगे और इस दिन जो भी बहन अपने भाई का तिलक करेगी तो उसे तुम्हारा भय नहीं होगा। अपनी बहन यमुना की ऐसी बातें सुनकर सुनकर यमराज बहुत अधिक प्रसन्न हुए और उन्हें यह आशीष किया। और उस दिन से ही भाई दूज पर्व की शुरुआत हुई। साथ ही इस दिन यमुना नदी में स्नान का भी बहुत महत्व है क्योंकि कहा जाता है कि भाई दूज के मौके पर जो भाई बहन यमुना नदी में स्नान करते हैं उन्हें पुण्य की प्राप्ति होती है और उनके रिश्ते को खुशियों से भरपूर रहने में मदद मिलती है।

2019 भाई दूज की तिथि व् शुभ मुहूर्त

  • भाई दूज तिथि: 29 अक्टूबर 2019
  • दिन: मंगलवार।
  • 29 अक्टूबर 2019 भाई दूज तिलक मुहूर्त का सबसे शुभ मुहूर्त: 13:11 से 15:25 बजे तक।
  • अवधि: 2 घंटे 13 मिनट
  • द्वितीय तिथि प्रारंभ: 21:07 बजे।
  • द्वितीय तिथि समाप्त: 21:20 बजे तक।

भाई दूज मनाने का तरीका

  • कोई भी त्यौहार पूरे रीति रिवाज़ के साथ मनाया जाये तो उसके मायने और भी बढ़ जाते है, तो लीजिये जानते हैं की भाई दूज मनाने का क्या तरीका है।
  • भाई दूज के दिन पर बहनें बहने अपने भाई के तिलक और आरती के लिए थाल सजाती है।
  • इस थाल में कुमकुम, चंदन, फूल, मिठाई, चावल, फल आदि होने चाहिए।
  • इससे पहले चावल का एक चौक बनाया जाये।
  • चावल के इस चौक पर भाई को बिठाकर शुभ मुहूर्त में बहनें उनका तिलक करें।
  • तिलक करने के बाद भाई की आरती उतारें और उन्हें मिठाई खिलाएं।
  • तिलक और आरती के बाद भाइयों को अपनी बहनो को उपहार देना चाहिए और साथ ही सदैव उनकी रक्षा का वचन देना चाहिए।

तो यह है वर्ष 2019 में भाई दूज का सबसे शुभ मुहूर्त और भाई दूज से जुडी अन्य जानकारी, तो इस वर्ष भी भाई बहन के प्यार से भरे इस त्यौहार को आपको बहुत शुभकामनाएं।