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जानकारियां

हवन करने का तरीका, हवन कैसे किया जाता है?

Hawan Kaise Kare, Hawan Puja, Hawan Vidhi, Hawan Mantra, Havan Ka Tarika, हवन करने का महत्व, Hawan ki Sahi Vidhi, Hawan ke Fayde, Hawan Kaise Kare? हवन का महत्व हिन्दू परंपराओं के अनुसार, किसी भी पूजा पाठ, धार्मिक अनुष्ठान और शुभ कार्य सम्पन्न होने के पश्चात् हवन करना अनिवार्य होता है। माना जाता है बिना हवन उस कार्य का पूर्ण फल नहीं मिलता। इसलिए सभी शुभ काम सम्पन्न होने के बाद हवन कराया जाता है। हवन कराने से सकारात्मकता का संचार होता है, वातावरण शुद्ध हो जाता है। हवन से निकलने वाले धुंए से नकारात्मकता समाप्त हो जाती

नवांश चक्र क्या होता है?

नवांश चक्र हिन्दू ज्योतिष पद्धति के अनुसार, ग्रहों का बलाबल और शुभता या अशुभता जानने के लिए सप्तवर्ग, दशवर्ग, आदि बनाए जाते हैं। लेकिन अधिकतर षड्वर्ग या सप्तवर्ग बनाने का विधान है। षड्वर्ग हैं - राशि (जन्म कुंडली), होरा, द्रेष्काण, नवांश, द्वादशांश और त्रिशांश। इसमें सप्तांश और जोड़ दिया जाए तो सप्त वर्ग हो जाता है। आज हम आपको राशि चक्र (भाव चक्र सहित) और नवांश चक्र के बारे में बता रहे हैं। कुंडली के विषय में जानने के लिए नवांश चक्र बहुत महत्वपूर्ण होता है। नवांश चक्र के बारे में जानकर कुंडली विचार आसानी से किया जा

विभिन्न नक्षत्रों में जन्म होने के क्या-क्या फल होते हैं?

जन्म नक्षत्र के अनुसार जानें अपना स्वाभाव और फल भारतीय ज्योतिष के अनुसार, व्यक्ति के जीवन की कठिनाइयां और शुभ परिणाम पहले से ही निहित होते हैं। कहा जाता है जन्म के पश्चात् व्यक्ति का भाग्य लिखा जाता है और उसी के अनुसार फल मिलते हैं। हालाँकि समय के साथ फल का परिणाम बदल सकता है, लेकिन कभी खत्म नहीं होता और यह मनुष्य के कर्म निर्धारित करते हैं। यहाँ हम ऐसे ही विषय पर बात कर रहे हैं। शास्त्रों के अनुसार, जिस घड़ी मनुष्य जन्म लेता है उसका भाग्य उस समय ग्रहों और तारों के स्थिति के अनुसार तय किया जाता है। ग्रहों के साथ-साथ

कुंडली में कालसर्प दोष होने से क्या दिक्क्तें होती हैं?

कालसर्प दोष और उसकी परेशानियां भारतीय ज्योतिष के अनुसार, मनुष्य के जीवन में घटित होने वाली प्रत्येक घटना चाहे वो अच्छी हो या बुरी, सुखद हो या दुखदायक ग्रहों की चाल के अनुसार आती है। व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की दशा ही तय करती है की निकट भविष्य में उसे लाभ होगा या हानि। कालसर्प योग भी ऐसी ही स्थिति है। ये योग कुंडली के जिस भाग में होता है उस हिस्से के ग्रह को कार्य करने से बाधित करता है और मनुष्य के जीवन में परेशानियां आने लगती है। ज्योतिष गणना के अनुसार, जब कुंडली के सभी ग्रह राहु और केतु के मध्य आ जाते है तो

16 जुलाई 2019 चंद्र ग्रहण का समय

चंद्र ग्रहण 2019 Chandra Grahan 16 July 2019 : पूर्णिमा की रात को चंद्रमा पुर्णतः गोलाकार का दिखाई देता है, लेकिन कभी-कभी चंद्रमा के पूर्ण हिस्से पर धनुष या हंसिया के आकार की काली परछाई दिखने लगती है। जो कभी-कभी चाँद को पूरी तरह से ढक लेती है। पहली स्थिति को चन्द्र अंश ग्रहण या खंड-ग्रहण कहते है जबकि दूसरी स्थिति को पूर्ण चन्द्र ग्रहण या खग्रास चंद्रग्रहण कहते है। चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा तिथि को ही लगता है। 2019 का चंद्र ग्रहण भी पूर्णिमा के दिन ही लगेगा। चंद्र ग्रहण 2019 16 जुलाई 2019 यानी आषाढ़ शुक्ल पक्ष की

नींव खुदाई की दिशा

Neev pujan, Neev Khudai Disha, Neev Khodna, Neev Khudai Kab Kare, Griha Nirman Puja, Neev puja vidhi, Griha Nirman Puja Vidhi, Bhumi Pujan, Neev Khudai Ke Niyam किसी भी नए मकान को बनाने से पहले उसकी नींव रखना जरूरी होता है। क्यूंकि उस नींव पर ही पुरे मकान का भार टिका होता है। नींव ही मकान को मजबूती देती है, जिससे वो लंबे समय तक खड़ा रहे। इसीलिए मकान बनाने से पूर्व नींव पूजन किया जाता है। ताकि भविष्य में किसी तरह की कोई हानि न हो और नया घर परिवार में सुख-समृद्धि लाए। नींव पूजन कराते समय बहुत सी बातों का ध्यान रखा जाता

पूजा-पाठ में नारियल का क्या महत्व होता है?

हिन्दू धर्म के अनुसार, पूजा-पाठ में प्रयोग में प्रयोग होने वाली अधिकतर चीजों का अपना खास महत्व होता है। फिर चाहे वो रोली हो या कलावा। नारियल भी उन्ही चीजों में से एक है जिसे हरेक पूजा-पाठ में प्रयोग किया जाता है। हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं की मूर्ति के सामने या किसी नए कार्य का प्रारंभ करने से पूर्व नारियल फोड़ने का रिवाज है। भारतीय धर्म और संस्कृति में नारियल का बहुत महत्व है। शादी विवाह हो, त्यौहार हो, पूजा हो, कोई नया कार्य आरंभ करना हो, वाहन खरीदा हो इन सभी कार्यों में नारियल बहुत महत्वपूर्ण होता है। हो न हो आप भी