Chhath 2018 : छठ 2018 डेट, 2018 में छठ कब मनाई जाएगी और छठ का क्या महत्व है?

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2018 में छठ कब मनाई जाएगी?

Chhath 2018 Date : छठ पूजा 2018 के बारे में इस आर्टिकल्स के माध्यम से बताने जा रहे हैं। छठ पूजा खासकर बिहार में बड़े धूम धाम से मनाई जाती है। पर आजकल देश के विभिन्न हिस्सों में जहां पर पूर्वोत्तर के लोग आकर बस गए हैं, वहां पर भी छठ पूजा होने लगी है। आजकल दिल्ली और मुंबई में भी लोग छठ पूजा करने लगे हैं और इस दौरान घाटों पर भारी भीड़ देखने को मिलती है। तो आप सोच रहे होंगे की इस साल छठ पर्व कब से शुरू होगा? कितनी तारीख को छठ पूजा होने वाली है? खरना, नहाय खाय, पहला अर्घ्य कब है? नीचे हम इन सभी की विस्तृत जानकारी दे रहे हैं।

छठ पूजा इस साल की तिथि इस प्रकार है :

छठ पूजा 2018 कैलेंडर

कार्तिक छठ पूजा 2018 – Kartik Chhath 2018 November 2018

तारीखदिनपर्वतिथि
11 नवंबर 2018रविवारनहाय-खायचतुर्थी
12 नवंबर 2018सोमवारलोहंडा और खरनापंचमी
13 नवंबर 2018मंगलवारसंध्या अर्ध्यषष्ठी
14 नवंबर 2018बुधवारउषा अर्घ्य, पारण का दिनसप्तमी

नहाय-खाय

2018 छठ पर्व का नहाय खाय की तारीख 11 नवंबर है, उस दिन रविवार है और चतुर्थी तिथि है। छठ व्रत रखने वाले इस दिन पुरे नियम धर्म से छठ पूजा की शुरुवात करेंगे। यह छठ पूजा कैलेंडर का पहला दिन है जिस दिन नहाय खाय किया जाता है।

लोहंडा और खरना

लोहंडा / खरना 2018 दिनांक 12 नवंबर, सोमवार के दिन मनाया जाएगा। इस दिन पंचमी तिथि है। छठ व्रत रखने वाले इस दिन पूजा पाठ करके चावल को गन्ने के रस में बनाकर या चावल को दूध में बनाकर और चावल का पिठ्ठा और चुपड़ी रोटी प्रसाद के रूप में खाएंगे। यह छठ पूजा कैलेंडर का दुसरा दिन है जिस दिन लोहंडा खरना किया जाता है।

संध्या अर्ध्य या पहला अर्ध्य

पहला अर्ध्य 13 नवंबर, मंगलवार के दिन शाम के समय दिया जाएगा इस दिन षष्ठी तिथि है। इस दिन को सूर्य षष्ठी भी कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने वाले पूरा दिन कुछ नहीं खाते और शाम के समय डलिया और सूप में नानाप्रकार के फल, ठेकुआ, लडुआ (चावल का लड्डू), चीनी का सांचा इत्यादि लेकर बहते हुए पानी (तालाब, नहर, नदी, इत्यादि) पर जाकर पानी में खड़े होकर डूबते हुए सूरज को अर्ध्य देते है। यह छठ पर्व का तीसरा दिन होता है।

उषा अर्घ्य, पारण का दिन

2018 में छठ पर्व का उषा अर्ध्य 14 नवंबर को बुधवार की सुबह दिया जाएगा। इस दिन सप्तमी है। यह व्रत का अंतिम दिन होता है जब व्रती प्रातःकाल से ही नदी या तालाब के ठंडे पानी में खड़े होकर उगते हुए सूरज को अर्ध्य देते हैं। पहले अर्घ्य के दिन से लेकर उषा अर्घ्य तक व्रती भूखे ही रहते हैं।

छठ व्रती चार दिनों का कठिन व्रत करके चौथे दिन पारण करते है। और एक दुसरे के घर में प्रसाद का आदान प्रदान करके व्रत सम्पन्न करते हैं। यह व्रत 36 घंटे से भी अधिक समय के बाद समाप्त होता है।