Chhath Puja Kartik 2018, छठ पूजा 2018 कब है?

कार्तिक माह छठ पूजा तिथि : छठी पर्व, छठ पूजा 2018 की तारीख की पूरी जानकारी जैसे नहाय-खाय कब है, खरना (लोहंडा) कब है, पहला अर्ध्य और दूसरा अर्ध्य की तिथि कब है

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छठ महोत्सव 2018, Chhath Festival 2018

Chhath Puja Date Kartik 2018 : (कार्तिक माह छठ पूजा तिथि ) छठ हिन्दुओं के प्रमुख पर्वों में से एक है। जिसे देश के विभिन्न भागों में बड़ी श्रद्धा-भाव के साथ इस महापर्व छठ पूजा को मनाया जाता है। मुख्य रूप से यह पर्व सूर्य देव की उपासना के लिए मनाया जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, छठी मैया सूर्य देव की बहन है। कहा जाता है छठ पर्व में सूर्य देव की उपासना करने से छठी मैया प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

कब मनाया जाता है छठ पर्व?

सूर्य देव की बहन छठी मैया के पूजन का यह पर्व साल में दो बार मनाया जाता है। जिसमे से एक चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को और दूसरा कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को। हालाँकि कार्तिक माह की छठ चैत्र की छठ से कई बड़े पैमाने पर मनाई जाती है। चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व को छठ पूजा, छठी माई पूजा, डाला छठ, सूर्य षष्ठी पूजा और छठ पर्व के नामों से भी जाना जाता है। – Chath Puja 2018 November Date

छठ पूजा का पर्व क्यों मनाया जाता है?

मुख्य रूप से यह पर्व सूर्य देव की उपासना के लिए मनाया जाता है। ताकि परिवारजनों को उनका आशीर्वाद प्राप्त हो सके। इसके अलावा संतान के सुखद भविष्य के लिए भी इस व्रत को रखा जाता है। कहते है छठ पर्व का व्रत रखने से निसंतानों को संतान भी प्राप्त हो जाती है। इसके अतिरिक्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भी छठ माई का व्रत रखा जाता है।

छठ पूजा 2018 : कार्तिक छठ 2018 11 नवंबर से 14 नवंबर तक मनाई जाएगी जिसका पूर्ण विवरण नीचे दिया गया है। 

13 नवंबर 2018, मंगलवार के दिन षष्ठी तिथि का आरंभ 01:50 मिनट पर होगा। जिसका समापन 14 नवंबर 2018, बुधवार के दिन 04:22 मिनट पर होगा। 

कार्तिक छठ पूजा 2018 – Kartik Chhath 2018 November 2018

तारीखदिनपर्वतिथि
11 नवंबर 2018रविवारनहाय-खायचतुर्थी
12 नवंबर 2018सोमवारलोहंडा और खरनापंचमी
13 नवंबर 2018मंगलवारसंध्या अर्ध्यषष्ठी
14 नवंबर 2018बुधवारउषा अर्घ्य, पारण का दिनसप्तमी

 

छठ पर्व 2018 महत्वपूर्ण तारीख :

छठ पर्व के दौरान शादीशुदा सुहागिन स्त्रियां अपने पुत्र और परिवारजनों की खुशहाली के लिए उपवास रखती हैं। इस पर्व को मुख्य रूप से पुरे बिहार और नेपाल के कुछ क्षेत्रों में बड़े हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है।

यह महापर्व चार दिनों का होता है। जिसेनहाय खाय, लोहंडा या खरना, संध्या अर्ध्य और उषा अर्ध्य के रूप में मनाया जाता है। यहां हम आपको उन चारों दिनों की विस्तृत जानकारी दे रहे हैं –

पहला दिन नहाय-खाय – 11 नवंबर 2018

छठ पर्व के पहले दिन को नहाय खाय कहा जाता है। इस दिन घर की साफ़ सफाई करके छठ व्रती स्नान कर पवित्र तरीके से शाकाहारी भोजन ग्रहण कर छठ व्रत की शुरुवात करते है। इस दिन को कद्दू-भात भी कहा जाता है। इस दिन व्रत के दौरान चावल, चने की दाल और कद्दू (घिया, लौकी) की सब्जी को बड़े नियम-धर्म से बनाकर प्रसाद रूप में खाया जाता है।

लोहंडा या खरना – 12 नवंबर 2018

छठ पूजा के दूसरे दिन को खरना या लोहंडा के नाम से जाना जाता है। छठ व्रती दिन भर उपवास करने के बाद शाम को भोजन करते है। जिसे खरना कहते है। खरना का प्रसाद चावल को गन्ने के रस में बनाकर या चावल को दूध में बनाकर और चावल का पिठ्ठा और चुपड़ी रोटी बनाई जाती है। शाम के समय पूजा पाठ करने के बाद पहले छठ व्रती यह प्रसाद खाते है उसके बाद घर के अन्य सदस्यों को प्रसाद के रूप में वही भोजन मिलता है।

पहला अर्घ्य – 13 नवंबर 2018

तीसरे दिन दिनभर घर में चहल पहल का माहौल रहता है। व्रत रखने वाले दिन भर डलिया और सूप में नानाप्रकार के फल, ठेकुआ, लडुआ (चावल का लड्डू), चीनी का सांचा इत्यादि को लेकर शाम को बहते हुए पानी (तालाब, नहर, नदी, इत्यादि) पर जाकर पानी में खड़े होकर सूर्य की पूजा करते हुए परिवार के सभी सदस्य अर्घ्य देते है। और फिर शाम को वापस घर आते है। रात में छठ माता के गीत आदि गाएं जाते है।

सुबह का अर्घ्य – 14 नवंबर 2018

चौथे और अंतिम दिन छठ व्रती को सूर्य उगने के पहले ही फिर से उसी तालाब, नहर, नदी पर जाना होता है जहां वे तीसरे दिन गए थे। इस दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए भगवान् सूर्य से प्रार्थना की जाती है। परिवार के अन्य सदस्य भी व्रती के साथ सूर्यदेव को अर्घ्य देते है और फिर वापस अपने घर को आते है।

छठ व्रती चार दिनों का कठिन व्रत करके चौथे दिन पारण करते है। और एक दुसरे के घर में प्रसाद का आदान प्रदान करके व्रत सम्पन्न करते हैं। यह व्रत 36 घंटे से भी अधिक समय के बाद समाप्त होता है।