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दशा और अंतर्दशा क्या होता है?

दशा विचार क्या है?

अष्टोत्तरी, विंशोत्तरी, योगिनी, आदि कई प्रकर की दशाएं होती है। फल अवगत करने के लिए मुख्य रूप से विंशोत्तरी दशा का ही प्रयोग किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, ग्रहों के शुभ अशुभ परिणामों को जानने के लिए विंशोत्तरी दशा सबसे उपयुक्त है। मारकेश ग्रह का निर्णय भी विंशोत्तरी दशा से ही किया जाता है। आज हम आपको दशा के बारे में सम्पूर्ण जानकारी दे रहे हैं।

विंशोत्तरी दशा और उसकी विधि

विंशोत्तरी दशा में सभी ग्रहों का एक समय निर्धारित किया जाता है। नवग्रहों की महादशा का एक चक्र 120 वर्ष में पूरा होता। विंशोत्तरी दशा के अनुसार 120 वर्ष की आयु मानकर ग्रहों का विभाजन किया जाता है। सूर्य की दशा = 6 वर्ष, चंद्रमा की दशा = 10 वर्ष, मंगल की दशा = 7 वर्ष, राहु की दशा = 18 वर्ष, बृहस्पति की दशा = 16 वर्ष, शनि की दशा = 19 वर्ष, बुध की दशा = 17 वर्ष, केतु की दशा = 7 वर्ष, शुक्र की दशा = 20 वर्ष बताई गयी है।

ग्रहों की ये दशा जन्म नक्षत्र के अनुसार होती है। अर्थात जो जातक जिस नक्षत्र में जन्म लेता है उसपर वो दशा प्रारंभ हो जाती है। ये दशाएं इस प्रकर हैं –

  • कृत्तिका, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ = सूर्य दशा
  • रोहिणी, हस्त, श्रवण = चंद्रमा दशा
  • मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा = मंगल दशा
  • आर्द्रा, स्वाति, शतभिषा = राहु दशा
  • पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वाभाद्रपद = बृहस्पति दशा
  • पुष्य, अनुराधा, उत्तराभाद्रपद = शनि दशा
  • अश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती = बुध दशा
  • मघा, मूल, अश्विनी = केतु दशा
  • भरणी, पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ = शुक्र दशा

इस तरह विभिन्न नक्षत्रों में जन्मे जातक पर उसी हिसाब से दशा चलती है।

दशा जानने की विधि

कृतिका नक्षत्र से जन्म नक्षत्र तक गिनकर 9 का भाग देने से एक आदि शेष रहने पर कर्म से सूर्य, चंद्रमा, मंगल, राहु, बृहस्पति, शनि, बुध, केतु, शुक्र की दशा होती है। जैसे – किसी जातक का जन्मनक्षत्र मघा है। अब कृतिका से मघा तक गणना करें तो 8 संख्या हुई। इसमें 9 का भाग दिया तो लब्ध कुछ नहीं मिला, शेष 8 ही रहा। सू., चं., मं., आदि इस कर्म में आठ तक गिना तो आठवीं संख्या केतु की हुई। अतः जनमदशा केतु की होगी।

अंतर्दशा क्या है?

प्राचीन समय में व्यक्ति की एवरेज आयु 120 वर्ष मानी गयी थी। उसकी के हिसाब से ग्रहों की दशा बांटी गयी थी। लेकिन समय बदलने के साथ-साथ औसत आयु भी बदल रही हैं। अब लोगों की एवरेज ऐज 70 – 80 वर्ष हो गयी है। जिसके कारण सभी ग्रहों की महादशा एक व्यक्ति के जीवन में नहीं आ पाती हैं।

आमतौर पर 4 से 5 ग्रहों की दशा में ही जीवन समाप्त हो जाता है। इसलिए सभी ग्रहों का फल ज्ञात करने के लिए महादशा के अंतर्गत अंतर्दशा का प्रावधान किया गया है। महादशा के दौरान बारी-बारी से निश्चित समय पर सभी ग्रहों की अंतर्दशा आती है इसके अनुसार फल का विश्लेषण किया जाता है।

महादशा में अंतर्दशा कैसे निकाली जाती है?

हरेक ग्रह की महादशा में 9 ग्रहों की अंतर्दशा होती है। जैसे सूर्य की महादशा में पहली अंतर्दशा सूर्य की, दूसरी चंद्रमा की, तीसरी मंगल की, चौथी राहु की, पांचवीं बृहस्पति की, छठी शनि की, सातवीं बुध की, आठवीं केतु की और नौवीं शुक्र की होती है। इसी प्रकार अन्य दशाओं में भी ग्रहों की अंतर्दशा होती है।

अंतर्दशा निकालने की विधि

अंतर्दशा निकालने का सबसे सरल तरीका है की दशा-दशा का परस्पर गुणा कर 10 से भाग देने से लब्ध मास और शेष को तीन से गुणा करने से दिन होंगे।

ग्रहों की अंतर्दशा निकालने के लिए एक अन्य नियम यह भी है की दशा-दशा का परस्पर गुणा करने से जो गुणनफल आए उसमे इकाई के अंक को छोड़ शेष अंक मास और इकाई के अंक को तीन से गुणा करने से दिन आएंगे।

उदाहरण के लिए – सूर्य की महादशा में अंतर्दशा निकालनी है तो सूर्य की दशा वर्ष 6 का सूर्य के ही दशा वर्षों से गुना किया किया तो :

6 x 6 => 36 ÷ 10 = 3 माह, शेष 6
6 x 3 = 18 दिन अर्थात – सूर्य की दशा 3 महीने 18 दिन की होगी।

  • सूर्य की महादशा में चंद्रमा की अंतर्दशा = 6 x 10 => 60 ÷ 10 = 3 महीने।
  • मंगल की अंतर्दशा = 6 x 7 => 42 ÷ 10 = 4 माह, शेष 2 x 3 = 6 दिन => 4 महीने 6 दिन।
  • राहु की अंतर्दशा = 6 x 18 => 108 ÷ 10 = 10 माह, शेष 8 x 3 = 24 दिन => 10 महीने 24 दिन।
  • गुरु की अंतर्दशा = 6 x 16 => 96 ÷ 10 = 9 माह, शेष 6 x 3 = 18 दिन => 9 महीने 18 दिन।
  • शनि की अंतर्दशा = 6 x 19 => 114 ÷ 10 = 11 माह, शेष 4 x 3 = 12 दिन => 11 महीने 12 दिन।
  • बुध की अंतर्दशा = 6 x 17 => 102 ÷ 10 = 10 माह, शेष 2 x 3 = 6 दिन => 10 महीने 6 दिन।
  • केतु की अंतर्दशा = 6 x 7 => 42 ÷ 10 = 4 माह, शेष 2 x 3 = 6 दिन => 4 महीने 6 दिन।
  • शुक्र की अंतर्दशा = 6 x 20 => 120 ÷ 10 = 12 माह => 1 वर्ष