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अधिक मास

 

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, अधिक मास वर्ष में पड़ने वाला एक अतिरिक्त माह होता है जिसे मल मास, पुरुषोत्तम मास, मलिम्माचा और लोंद मास भी कहा जाता है। अधिक मास इंग्लिश कैलेंडर के लीप इयर की तरह होता है। हिन्दू कैलेंडर के हिसाब से अधिक मास हर तीन वर्ष में एक बार आता है।

हिंदी महीनों की स्थिर प्रक्रिया में अधिक मास के आने का पता लगा पाना संभव नहीं। और यह कभी भी निश्चित समय काल में नहीं आता। साल में किन्ही भी दो महीनों के बीच अधिक मास आ जाता है। हिन्दू कैलेंडर के मुताबिक, प्रत्येक लूनर महीने में एक संक्रांति आती है। (संक्रांति वह समय होता है जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है) लेकिन जिन महीनों में संक्रांति नहीं आती उन्हें अधिक मास कहा जाता है।

अधिक मास को हर तरह के शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है। इस समय गृह प्रवेश, शादी विवाह, नए समानों की खरीदारी आदि जैसे कार्यो को नहीं करना चाहिए।