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गोमेद (Hessonite) धारण करने का मंत्र, फायदे और विधि

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गोमेद रत्न क्या है?

गोमेद राहु का रत्न है। जातक की कुंडली में यदि राहु ग्रह का प्रभाव हो तो इस रत्न हो धारण करने की सलाह दी जाती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार गोमेद,  है।गोमेद रत्न धारण करने के फायदे

राहु के प्रकोप से बचाने के लिए गोमेद रत्न धारण किया जाता है। कुंडली में राहु से संबंधित विशेष योग बनने पर ही गोमेद रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु नीच राशि में हो तो उसे गोमेद अवश्य धारण पहनना चाहिए।

राहु मकर राशि का स्वामी है इसलिए मकर राशि वाले जातक भी गोमेद धारण कर उसका शुभ फल प्राप्त कर सकते है। राहु को राजनीति का मारकेश कहा जाता है। इसलिए जो व्यक्ति राजनीति में सक्रिय होना चाहते है उन्हें गोमेद अवश्य धारण करना चाहिए। इसके अलावा स्मगलिंग, चोरी आदि कार्यों में लगे लोगों को भी गोमेद पहनना चाहिए। वकालत, न्याय और राजकाज से जुड़े लोग इस रत्न को धारण कर सकते है।

लेकिन ध्यान रहे, किसी भी रत्न को धारण करने से पूर्व ज्योतिष सलाह लेना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि यदि कुंडली में राहु की स्थिति अनुकूल नहीं हुई तो उसकी अशुभता का प्रभाव भी जातक के जीवन पर ही पड़ता है। इसलिए पहले कुंडली की जाँच करवाएं और फिर ही गोमेद धारण करें।

गोमेद की पहचान कैसे करें?

किसी भी रत्न को धारण करने से पूर्व यह जान लेना चाहिए की वह रत्न असली है या नकली। क्योंकि जहाँ एक तरफ असली रत्न पहनने से लाभ मिलता है वहीं दूसरी तरफ नकली या गलत रत्न पहनने से जीवन में परेशानियाँ आने लगती है। गोमेद असली है या नकली यह जानने के लिए गोमेद को 24 घंटों के लिए गौमूत्र में डाल दें।

असली रत्न के होने पर गौमूत्र का रंग बदल जाता है जबकि नकली रत्न होने पर रंग नहीं बदलेगा। इसके अलावा गोमेद धारण करने से पहले देख लें की वह सही स्थिति में हो दुरंगा, धब्बा, छींटदार एवं लाल मुखवाला गोमेद धारण करना नुकसानदेह बताया गया है।

गोमेद रत्न धारण करने की विधि

यदि आपकी कुंडली में राहु का प्रभाव अनुकूल है और आपको किसी ज्ञानी ज्योतिषी में गोमेद धारण करने की सलाह दी है तो आप गोमेद धारण कर सकते है।

इसके लिए आपको कम से कम 8 रत्ती का गोमेद चांदी की अंगूठी में जड्वाकर पहनना होगा। अंगूठी पहनने के लिए शनिवार या बुधवार के दिन शाम के समय अंगूठी की प्राण प्रतिष्ठा कर लें। जिसके लिए सबसे पहले अंगूठी को दूध, फिर गंगा जल, फिर शहद और फिर शक्कर के घोल में डाल दें। उसके पश्चात् राहु के नाम की पांच अगरबत्तियां जलाएं।

अब राहु से प्रार्थना करें की हे! राहु, मैं आपका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यह रत्न धारण कर रहा हूँ कृपा मुझे अपना आशीर्वाद प्रदान करें। अब अंगूठी को घोल से निकालकर 108 बार अगरबत्ती के ऊपर से घुमाते हुए ‘ऊं रां राहवे नम’ का जाप करें। उसके बाद अंगूठी को मध्यमा ऊँगली में धारण करें। ध्यान रहे, गोमेद में कोई दोष नहीं होना चाहिए अन्यथा उसके प्रभावों में कमी आ सकती है।

अंगूठी कारण करने का मंत्र

“ॐ कया नश्चित्र आ भुवदूती सदावृध: सखा। कया शचिष्ठया वृता।।”