गृह प्रवेश पूजा क्यों की जाती है? क्या है गृह प्रवेश करने का तरीका?

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हिन्दू धर्म के अनुसार, किसी भी नए कार्य की शुरुवात से पूर्व पूजा करना आवश्यक होता है। माना जाता है, नए काम की शुरुवात में अगर पूजा करा ली जाए तो उस कार्य में कोई रुकावट नहीं आती और उस कार्य से कभी हानि नहीं पहुंचती। गृह प्रवेश के लिए भी यही नियम माना जाता है।

शास्त्रों के अनुसार, नए घर में जाने से पूर्व गृह प्रवेश पूजा करना अनिवार्य होता है। नए घर में किसी तरह की दिक्कतों का सामना ना करना पड़े इसके लिए गृह प्रवेश पूजा को जरुरी बताया गया है।

गृह प्रवेश पूजा

शास्त्रों में गृह प्रवेश तीन प्रकार के बताए गए हैं –

अपूर्व गृह प्रवेश पूजा

जब पहली बार नया घर बनवाकर उसमे गृह प्रवेश किया जाता है तो उसे अपूर्व गृह प्रवेश पूजा कहा जाता है।

सपूर्व गृह प्रवेश पूजा

जब परिवार को कुछ समय के लिए दूसरे शहर में रहने जाने की वजह से घर को कुछ समय के लिए खाली छोड़ दिया जाता है तो उसमे दोबारा रहने से पूर्व पूजा की जाती है उसे सपूर्व गृह प्रवेश पूजा कहते हैं।

द्वान्धव गृह प्रवेश पूजा

जब किसी परेशानी या आपदा के कारण घर छोड़ना पड़े और उसमे दोबारा रहने के लिए जाएं तो वहां प्रवेश करने से पूर्व जो पूजा कराई जाती है उसे द्वान्धव गृह प्रवेश पूजा कहते है।

गृह प्रवेश पूजा क्यों की जाती है?

किसी भी नए घर में रहने जाने से पूर्व गृह प्रवेश पूजा का विधान है। शास्त्रों के अनुसार, गृह प्रवेश पूजा सदैव शुभ मुहूर्त में की जानी चाहिए। अनुचित या गलत मुहूर्त में किया गया गृह प्रवेश परिवार के लिए परेशानियों का कारण बन सकता है।

नए घर में गृह प्रवेश से पूर्व गृह प्रवेश पूजा कराने का मुख्य कारण नकारात्मकता को दूर करना होता है। क्यूंकि जब मकान बनाया जाता है तो हमें पता नहीं होता की वो जगह कैसी थी? वहां क्या था? कहीं उस स्थान पर नकारात्मक ऊर्जा बहुत ज्यादा तो नहीं?

ऐसी समस्यायों से बचने के लिए गृह प्रवेश पूजा कराई जाती है। गृह प्रवेश पूजा में वास्तु पूजा, सत्यनारायण कथा, भगवान लक्ष्मी-गणेश की पूजा, गृह शांति पूजा, वास्तु शांति पूजा आदि की जाती है। ताकि सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिल सके और अगर उस स्थान पर किसी तरह की नकारात्मक ऊर्जा हो तो वो खत्म हो जाए। माना जाता है हवन कराने से हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है। घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और परिवार में शांति रहती है। अब जानते हैं गृह प्रवेश करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

गृह प्रवेश करते समय इन बातों का ध्यान रखें

नए घर में प्रवेश करते समय दिन, तिथि, वार, नक्षत्र और गृह प्रवेश करने का मुहूर्त सोच-विचार कर निश्चित करें। गृह प्रवेश की तिथि और मुहूर्त दोनों जातक की कुंडली के अनुसार शुभ होने चाहिए।

कौन से माह में गृह प्रवेश करें?

गृह प्रवेश करने के लिए माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ माह सबसे शुभ बताए जाते हैं। जबकि आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और पौष माह में गृह प्रवेश नहीं करना चाहिए।

किस वार को गृह प्रवेश करें?

मंगलवार, रविवार और कुछ स्थितियों में शनिवार के दिन भी गृह प्रवेश नहीं करना चाहिए। सप्ताह के बाकी दिन जैसे सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को गृह प्रवेश किया जा सकता है।

किस तिथि को गृह प्रवेश करें?

गृह प्रवेश करने के लिए तिथि का भी खास ध्यान रखना चाहिए। गृह प्रवेश करने के लिए अमावस्या और पूर्णिमा को छोड़कर शुक्लपक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, एकादशी, द्वादशी और त्रयोदशी तिथि गृह प्रवेश के लिए शुभ मानी जाती है।

गृह प्रवेश करने का तरीका

नए घर में गृह प्रवेश करने के लिए निश्चित विधि अपनाई जाती है। यहाँ हम उसी के बारे में बता रहे हैं।

आवश्यक सामग्री

  • कलश
  • नारियल
  • शुद्ध जल / गंगा जल
  • कुमकुम
  • चावल
  • अबीर
  • गुलाल
  • धूपबत्ती
  • पांच शुभ मांगलिक वस्तुएं – नारियल, पीली हल्दी, गुड़, चावल, दूध
  • आम या अशोक के पत्ते

गृह प्रवेश की विधि

  • मंगल कलश हाथ में लेकर नए घर में प्रवेश करें।
  • घर को बंदनवार, रंगोली और फूलों से सजाएं।
  • मंगल कलश में शुद्ध जल भरकर उसमे आम या अशोक के आठ पत्तों के बीच में एक नारियल रखें।
  • कलश व् नारियल पर स्वस्तिक का चिन्ह बनाएं।
  • नए घर में प्रवेश के समय घर के स्वामी और स्वामिनी पांच शुभ मांगलिक वस्तुएं – नारियल, पीली हल्दी, गुड़, चावल, दूध अपने साथ लेकर घर में प्रवेश करें।
  • भगवान गणेश की मूर्ति, दक्षिणावर्ती शंख, श्री यंत्र गृह वाले दिन नए घर में ले जाएं।
  • पुरुष पहले अपना दाहिना पैर और स्त्री अपना बायां पैर आगे बढ़ा कर नए घर में प्रवेश करें।
  • इसके बाद भगवान गणेश का ध्यान करते हुए गणेश जी के मंत्रों के साथ घर के ईशान कोण में या पूजा घर में कलश की स्थापना करें।
  • रसोईघर में भी पूजा करें। चूल्हे, पानी के स्थान और स्टोर में धूप, दीपक, हल्दी कुमकुम, चावल से पूजा करके स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं।
  • रसोई में पहले दिन गुड़ और हरी सब्जियां रखना शुभ होता है।
  • चूल्हे को जलाकर उसमे सबसे पहले दूध उफानना चाहिए।
  • मिठाई बनाकर उसका भोग लगाएं।
  • घर पर बने भोजन से सबसे पहले भगवान को भोग लगाएं।
  • उसके बाद गौ माता, कौआ, कुत्ता, चींटी को भोजन निकाल कर रख दें।
  • अंत में ब्राह्मण को भोजन कराएं और दान करें। ऐसा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहेगी।

ये गृह प्रवेश करने की सामान्य विधि है आप अपने क्षेत्र की परंपरा के अनुसार ही गृह प्रवेश करें।