सही समय पर किया गया गृह प्रवेश क्यों माना जाता है जीवन की शुभ शुरुआत, इसलिए अतिशुभ मुहूर्त में गृह प्रवेश करना चाहिए ताकि नए घर में सुख समृद्धि और बकरत हो . परिवार के लोग खुशहाल रहे।
Contents
- 1 गृह प्रवेश का शास्त्रीय महत्व
- 2 जल्दबाज़ी में गृह प्रवेश क्यों नहीं करना चाहिए?
- 3 गृह प्रवेश का मुहूर्त कैसे निर्धारित किया जाता है?
- 4 चंद्रबल और ताराबल का महत्व
- 5 किन परिस्थितियों में गृह प्रवेश टाल देना चाहिए?
- 6 शुभ मुहूर्त में गृह प्रवेश के लाभ
- 7 आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ता है प्रभाव
- 8 वास्तु पूजा और लग्न का संबंध
- 9 फरवरी 2026 में गृह प्रवेश के शुभ मुहूर्त
- 10 व्यक्तिगत मुहूर्त क्यों आवश्यक है?
नया घर जीवन के सबसे महत्वपूर्ण पड़ावों में से एक होता है। वर्षों की मेहनत, सपनों और योजनाओं के बाद जब अपना घर बनकर तैयार होता है, तब उसमें पहला कदम रखना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक पवित्र संस्कार माना जाता है। इसी पवित्र संस्कार को गृह प्रवेश कहा जाता है।
भारतीय परंपरा में माना गया है कि घर चाहे किसी भी स्थान पर हो — भारत में या विदेश में, गाँव में या शहर में — उसमें प्रवेश का समय सही होना अत्यंत आवश्यक है। सही मुहूर्त में किया गया गृह प्रवेश घर को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है और जीवन को संतुलित दिशा प्रदान करता है।
गृह प्रवेश का शास्त्रीय महत्व
वेदों, पुराणों और धर्मशास्त्रों में गृह प्रवेश के लिए शुभ मुहूर्त का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था पर आधारित नहीं है, बल्कि प्रकृति, ग्रहों की स्थिति और मानव जीवन के अनुभवों को समझकर बनाई गई है।
शास्त्रों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति नए घर में शुभ समय पर प्रवेश करता है, तो वह घर केवल निवास स्थान नहीं रहता, बल्कि सुख-शांति और समृद्धि का केंद्र बन जाता है।
जल्दबाज़ी में गृह प्रवेश क्यों नहीं करना चाहिए?
अक्सर देखा जाता है कि घर बनते ही लोग तुरंत उसमें शिफ्ट हो जाते हैं —
“आज छुट्टी है, आज ही सामान रख देते हैं”
या
“अब और इंतज़ार क्यों करें?”
लेकिन बिना शुभ मुहूर्त के किया गया गृह प्रवेश कई बार अनावश्यक मानसिक तनाव, पारिवारिक अशांति या रुकावटों का कारण बन सकता है।
इसलिए गृह प्रवेश में न तो जल्दबाज़ी करनी चाहिए और न ही किसी भी तारीख को यूँ ही चुन लेना चाहिए।
गृह प्रवेश का मुहूर्त कैसे निर्धारित किया जाता है?
गृह प्रवेश का शुभ समय केवल कैलेंडर देखकर तय नहीं किया जाता। इसके लिए कई ज्योतिषीय तत्वों का विचार आवश्यक होता है, जैसे:
- पंचांग
- तिथि
- वार
- नक्षत्र
- लग्न शुद्धि
- गृह स्वामी की जन्म कुंडली
- चंद्रबल और ताराबल
- ग्रहों का वर्तमान गोचर
जब ये सभी तत्व अनुकूल होते हैं, तभी वास्तव में शुभ गृह प्रवेश मुहूर्त बनता है।
चंद्रबल और ताराबल का महत्व
ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है।
यदि गोचर में चंद्रमा पीड़ित हो या पाप ग्रहों से प्रभावित हो, तो उस समय गृह प्रवेश से बचना चाहिए।
इसी प्रकार, गृह स्वामी के लिए चंद्रबल और ताराबल का मजबूत होना अत्यंत आवश्यक होता है।
यही कारण है कि एक ही तिथि किसी व्यक्ति के लिए शुभ होती है और किसी अन्य के लिए नहीं।
किन परिस्थितियों में गृह प्रवेश टाल देना चाहिए?
यदि जन्म कुंडली में:
- लग्नेश कमजोर हो
- दशा या अंतरदशा अनुकूल न हो
- चंद्रमा निर्बल स्थिति में हो
- या ग्रहों का गोचर प्रतिकूल चल रहा हो
तो उस समय गृह प्रवेश को कुछ समय के लिए टाल देना ही समझदारी मानी जाती है।
थोड़ा इंतज़ार भविष्य की बड़ी परेशानियों से बचा सकता है।
शुभ मुहूर्त में गृह प्रवेश के लाभ
सही मुहूर्त में किया गया गृह प्रवेश कई सकारात्मक परिणाम देता है:
- घर में सुख-शांति बनी रहती है
- परिवार का स्वास्थ्य अच्छा रहता है
- आपसी मतभेद कम होते हैं
- व्यापार और आय में वृद्धि होती है
- नौकरी में उन्नति के अवसर मिलते हैं
- बच्चों की पढ़ाई और भविष्य बेहतर होता है
- समाज में मान-सम्मान बढ़ता है
इसीलिए कहा गया है —
दिन दूनी, रात चौगुनी उन्नति।
आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ता है प्रभाव
गृह प्रवेश का प्रभाव केवल वर्तमान तक सीमित नहीं रहता।
यह बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के जीवन पर भी असर डालता है।
इसी कारण शास्त्रों में गृह प्रवेश को एक पीढ़ीगत संस्कार माना गया है।
वास्तु पूजा और लग्न का संबंध
यदि गृह प्रवेश अपने लग्न और राशि के अनुसार वास्तु पूजा के साथ किया जाए, तो ग्रह, नक्षत्र और देव शक्तियाँ स्वतः अनुकूल हो जाती हैं।
इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और जीवन सहज रूप से आगे बढ़ता है।
फरवरी 2026 में गृह प्रवेश के शुभ मुहूर्त
फरवरी 2026 में गृह प्रवेश के लिए निम्न तिथियाँ शुभ मानी गई हैं:
- 6 फरवरी 2026, शुक्रवार
कृष्ण पक्ष, पंचमी, फाल्गुन मास, हस्त नक्षत्र - 7 फरवरी 2026, शनिवार
कृष्ण पक्ष, षष्ठी, फाल्गुन मास, चित्रा नक्षत्र - 13 फरवरी 2026, शुक्रवार
कृष्ण पक्ष, एकादशी, फाल्गुन मास, मूल नक्षत्र - 20 फरवरी 2026, शुक्रवार
शुक्ल पक्ष, तृतीया, फाल्गुन मास, उत्तर भाद्रपद नक्षत्र
ध्यान दें: ये सामान्य तिथियाँ हैं। व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार इनकी शुभता अलग-अलग हो सकती है।
व्यक्तिगत मुहूर्त क्यों आवश्यक है?
केवल पंचांग देखकर गृह प्रवेश करना अधूरा माना जाता है।
जब गृह स्वामी की नाम, राशि और जन्म कुंडली के अनुसार मुहूर्त तय किया जाता है, तभी वह पूर्ण रूप से फलदायी होता है।
क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति की ग्रह स्थिति अलग होती है,
इसलिए व्यक्तिगत मुहूर्त हमेशा अधिक शुभ और सुरक्षित माना जाता है।
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