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कांवड़ यात्रा हरिद्वार 2019 कब से कब तक है? और प्रशासन की तैयारियां

Kanvad Yatra 2019 Haridwar

हिन्दू धर्म में कांवड़ यात्रा को बहुत खास माना जाता है। शिवभक्त पुरे साल कांवड़ यात्रा का बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस यात्रा को जल यात्रा भी कहते हैं और जो भक्त इस यात्रा को करते हैं उन्हें कांवड़ियाँ कहा जाता है। सावन के महीने में की जाने वाली कांवड़ यात्रा शिवभक्तों के लिए बहुत खास होती है।

इस यात्रा के दौरान, कांवड़िये बिहार के सुल्तानगंज, उत्तराखंड के गंगोत्री, गौमुख और हरिद्वार जैसे पवित्र स्थानों पर जाकर गंगाजल लाते हैं और शिवरात्रि के दिन मन्नत रखे हुए स्थान पर शिव मंदिरों पर चढ़ाते हैं। कांवड़ यात्रा के बाद इस जलाभिषेक का बहुत खास महत्व होता है। ये जलाभिषेक केवल कांवड़ में लाए गए गंगाजल से ही किया जाता है।  

कांवड़ यात्रा कब होती है?

कांवड़ यात्रा हिन्दू कैलेंडर के सावन (श्रावण) माह में की जाती है जो अक्सर जुलाई या अगस्त के महीने में पड़ता है। कांवड़ यात्रा सावन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होती है और सावन पूर्णिमा के दिन समाप्त होती है। 

भारत में कांवड़ यात्रा

सावन के महीने की कांवड़ यात्रा पुरे भारत देश में लोकप्रिय है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, मध्यप्रदेश, बिहार में इस पर्व को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। पूरी यात्रा के दौरान भक्त “बोल बम” “हर हर महादेव” के नारे लगाते हैं। चारो ओर फैली हरियाली और सावन की फुहारे माहौल को और भी खुशनुमा बना देती हैं।

कांवड़ यात्रा का महत्व

हिन्दू धर्म में कांवड़ यात्रा को बहुत खास माना जाता है। कांवड़ यात्रा में शिवलिंग का अभिषेक करने का खास महत्व होता है। ऐसा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान हजारों शिवभक्त केसरिया वस्त्र पहनकर कंधो पर कांवड़ लेकर ऋषिकेश, हरिद्वार, गोमुख और सुल्तानगंज जगहों से गंगाजल लाकर शिव जी का अभिषेक करते हैं।

कांवड़ यात्रा के नियम

शिवभक्तों के लिए कांवड़ यात्रा के कुछ खास नियम बनाए गए हैं। भक्तों को इन नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्त नंगे पैर कांवड़ कंधे पर रखकर सैकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हैं। इस यात्रा में उनके पैर घायल भी हो जाते हैं। इसलिए इस यात्रा को कठिन कहा जाता है।

  • घर से लेकर गंगा तक और गंगा से लेकर शिव मंदिर तक कांवड़ को जमीन पर नहीं रख सकते। 
  • इस यात्रा में किसी भी प्रकार का नशा करने की मनाही होती है। शराब नहीं पी सकते।
  • इस दौरान मांस मछली का सेवन निषेध है।
  • यात्रा के दौरान चमड़े से बने सामान, वस्त्रों को छूना और पहनना मना है।
  • यात्रा में बोल बम के नारे लगाए जाए हैं।
  • कांवड़ यात्रा को अपने सामर्थ्य अनुसार, वाहन या पैदल किया जा सकता है। बस ध्यान रहे पूरी यात्रा एक ही तरीके से सम्पूर्ण हो। बीच-बीच में बदलें नहीं।

2019 कांवड़ यात्रा हरिद्वार 

कांवड़ यात्रा कब से कब तक है?

2019 में कांवड़ यात्रा 17 जुलाई 2019, बुधवार से आरंभ होगी।

जल अभिषेक का मुहूर्त

कांवड़ यात्रा में सावन शिवरात्रि के दिन जल अभिषेक 30 जुलाई 2019, मंगलवार को किया जाएगा।

कांवड़ यात्रा के लिए हरिद्वार प्रशासन की तैयारियां

हरिद्वार कांवड़ यात्रा के दौरान हजारों कांवड़ियें गंगा जल भरने हरिद्वार आते हैं और शिवमंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहता है। इन सबको देखते हुए प्रशासन में कांवड़ियों के लिए पुख्ता इंतजाम किये हैं। अनुमान लगाया जा रहा है की इस बार कांवड़ यात्रा के दौरान 3 करोड़ से ज्यादा कांवड़िये उत्तराखंड में आ सकते हैं। जिसे देखते हुए प्रशासन में चार धाम यात्रा मार्ग में परिवर्तन होगा।

कांवड़ यात्रा के दौरान होने वाले हुड़दंग को लेकर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कई एलान किये हैं। उन्होंने अपने अधिकारीयों को यात्रा की पर्याप्त सुरक्षा और व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

डीजे को लेकर भी योगी जी ने निर्देश दिए हैं। की कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे और माइक का इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन डीजे पर केवल भजन बजाने की ही अनुमति है। उसमे आप फ़िल्मी गाने नहीं बजा सकते। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारियों से कहा है कि यह भी सुनिश्चित करा लें की शिवालयों के पास मांस-मदिरा की दुकानें संचालित न हों। आदित्यनाथ ने कहा कि संवेदनशील स्थानों पर सी.सी.टी.वी. कैमरे लगवाएं, जर्जर तार और पोलों को ठीक करा लिया जाए। यात्रा के दौरान थर्माकोल और प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल प्रतिबंधित रहेगा।