हरियाली तीज 2019

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Hariyali Teej 2019

हरियाली तीज : सावन माह को हिन्दू धर्म में बहुत पवित्र माना जाता है। इस महीने हर कोई शिव भक्ति में लीन रहता है। आसमान से बरसता पानी और गंगा तटों तक जाती कावंड़ियों की भीड़ सावन माह को और भी खास बना देती है। शिव मंदिरों में केवल ॐ नमः शिवाय की गूंज सुनाई पड़ती है। इस महीने शिव जी के साथ-साथ गौरी पूजन के भी कई पर्व मनाए जाते हैं। हरियाली तीज भी उन्ही में से एक है।

हरियाली तीज कब मनाते हैं?

सावन के महीने में आने वाले तीज व्रत को बहुत खास माना जाता है। हरियाली तीज सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है।

हरियाली तीज का महत्व

सुहागिन स्त्रियों के लिए हरियाली तीज व्रत का बहुत खास महत्व होता है। इस दिन महिलाएं सज-धज कर भगवान शंकर और माँ पार्वती का पूजन करती हैं। माना जाता है हरियाली तीज का व्रत करने से पति की आयु लंबी होती है। बहुत से स्थानों पर कुंवारी लड़कियां भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए हरियाली तीज का व्रत रखती हैं। इस व्रत को विशेष तौर पर पति के लिए ही रखा जाता है। इसलिए इसमें सोलह श्रृंगार का खास महत्व होता है।

हरियाली तीज के रीति-रिवाज

इस दिन व्रत रखना बहुत शुभ होता है। महिलाएं पुरे सोलह श्रृंगार करके भगवान शंकर और माँ पार्वती की पूजा आराधना करती हैं। इस दिन हाथों में मेहंदी लगाने का खास महत्व होता है। इसलिए जो भी महिलाएं हरियाली तीज का व्रत रखती हैं वे हाथों में मेहंदी अवश्य लगाती हैं। इस दिन झूला झूलने की भी प्रथा है। कहा जाता है सावन के हरे भरे मौसम में पेड़ की डालियों पर लगे झूले झूलना बहुत शुभ होता है। इस व्रत में हरी चूड़ियां पहनना भी बहुत खास माना जाता है।

बहुत से स्थानों पर हरियाली तीज व्रत में विवाहित महिलायें अपने मायके से आए हुए वस्त्र और श्रृंगार इस्तेमाल करती हैं। जिसे सिंधारा कहते हैं। सिंधारा में मिठाई, घेवर, मेहँदी, चूड़ियां, कपडे, श्रृंगार का सामान दिया जाता है।

हरियाली तीज 2019 शुभ मुहूर्त

2019 में हरियाली तीज 3 अगस्त 2019, शनिवार को है।

तृतीया तिथि का आरंभ = 3 अगस्त 2019, शनिवार प्रातः 01:36 बजे।
तृतीया तिथि का समापन = 3 अगस्त 2019, शनिवार रात 10:06 बजे।

तीज व्रत कहाँ-कहाँ मनाया जाता है?

हरियाली तीज का व्रत मुख्य तौर पर उत्तरी भारत में बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में इस व्रत को बहुत ख़ास माना जाता है।

इस दिन सभी सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और बेहतर स्वास्थ्य के लिए इस व्रत को रखती हैं।