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जन्माष्टमी 2019, श्री कृष्ण जन्माष्टमी कब है? कृष्ण जन्म की कथा

कृष्ण जन्माष्टमी 2019

Krishna Janmashtami 2019

जन्माष्टमी हिन्दू धर्म में मनाए जाने वाले महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है। जिसे बाल गोपाल श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस पर्व को केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी पूरी श्रद्धा और उल्लास से मनाया जाता है।

कृष्ण जन्म कब हुआ था?

भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के मध्यरात्रि के रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। कृष्ण जी का जन्म कंस के कारागार में बंद वासुदेव-देवकी की आठवीं संतान के रूप में हुआ था।

जन्माष्टमी का महत्व

स्मार्त और वैष्णव दोनों ही समुदायों के लिए इस पर्व का बहुत खास महत्व माना जाता है। इस दिन सभी भक्तगण भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरुप का श्रृंगार करते हैं, उन्हें सजाते हैं, नए वस्त्र पहनाते हैं। कृष्ण मंदिरों में इस दिन अलग ही रौनक देखने को मिलती है। वृंदावन के श्री बांके बिहारी मंदिर में हजारों श्रद्धालु इस दिन श्री कृष्ण के दर्शन करने यहाँ आते हैं। इस दिन श्री कृष्ण को झूला झूलने का भी बहुत खास महत्व होता है।

कृष्ण जन्माष्टमी व्रत

कृष्ण जन्माष्टमी के दिन पूजन के साथ-साथ व्रत रखना भी बहुत फलदायी माना जाता है। कहा जाता है, कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रखने से बहुत लाभ मिलता है। कृष्ण जन्माष्टमी के व्रत को व्रतराज भी कहा जाता है। इस व्रत का विधि-विधान से पालन करने से कई गुना पुण्य की प्राप्ति होती है।

जन्माष्टमी का व्रत रात बारह बजे तक किया जाता है। इस व्रत को करने वाले रात बारह बजे तक कृष्ण जन्म का इन्तजार करते हैं। उसके पश्चात् पूजा आरती होती है और फिर प्रसाद मिलता है। प्रसाद के रूप में धनिया और माखन मिश्री दिया जाता है। क्यूंकि ये दोनों ही वस्तुएं श्री कृष्ण को अत्यंत प्रिय हैं। उसके पश्चात् प्रसाद ग्रहण करके व्रत पारण किया जा सकता है। हालाँकि सभी के यहाँ परम्पराएं अलग-अलग होती है। कोई प्रातःकाल सूर्योदय के बाद व्रत पारण करते हैं तो कोई रात में प्रसाद खाकर व्रत खोल लेते हैं। आप अपने परिवार की परम्परा के अनुसार ही व्रत पारण करें।

कृष्ण जन्माष्टमी कब मनाते हैं?

  • ऐसे तो श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था। लेकिन इस तिथि के अलावा भी बहुत सी गणनाएं और नियम हैं जिनके अनुसार ही कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत मुहूर्त निकाला जाता है।
  • शास्त्रों के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी यदि पहले ही दिन आधी रात को विद्यमान हो तो जन्माष्टमी का व्रत पहले दिन किया जाएगा।
  • अष्टमी केवल दूसरे ही दिन आधी रात को व्याप्त हो तो जन्माष्टमी व्रत दूसरे दिन किया जाएगा।
  • कृष्ण पक्ष की अष्टमी दोनों दिन आधी रात को व्याप्त हो और आधी रात में रोहिणी नक्षत्र का योग एक ही दिन हो तो जन्माष्टमी का व्रत रोहिणी नक्षत्र वाले दिन किया जाएगा।
  • अष्टमी तिथि दोनों दिन आधी रात को विद्यमान हो और दोनों ही दिन आधी रात में रोहिणी नक्षत्र व्याप्त रहे तो जन्माष्टमी का व्रत दूसरे दिन किया जाएगा।
  • भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी दोनों दिन आधी रात को व्याप्त हो और अर्धरात्रि में दोनों दिन रोहिणी नक्षत्र का योग न हो तो जन्माष्टमी का व्रत दूसरे दिन किया जाएगा।

*आपको बता दें ये सभी नियम स्मार्त मत के अनुसार दिए गए हैं। वैष्णव मत के अनुसार, श्री कृष्ण जन्माष्टमी अगले दिन मनाई जाएगी। क्यूंकि स्मार्त और वैष्णव सम्प्रदाय को मानने वाले लोग इस पर्व को अलग-अलग नियमों से मनाते हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी 2019 : Janmashtami 2019 Date

2019 में कृष्ण जन्माष्टमी 24 अगस्त 2019, शनिवार को है।

कृष्ण जन्माष्टमी पूजा मुहूर्त

निशीथ पूजा का मुहूर्त = 25 अगस्त 2019, रविवार को अर्धरात्रि 12:01 बजे से 12:46 बजे तक।


धर्म शास्त्र के अनुसार जन्माष्टमी व्रत पारण का समय

व्रत पारण समय = 25 अगस्त 2019, रविवार प्रातः 05:59 बजे।

(पारण के दिन अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त होंगे।)

आधुनिक परंपरा के अनुसार जन्माष्टमी व्रत पारण का समय

व्रत पारण समय = 25 अगस्त 2019, रविवार अर्धरात्रि 12:46 बजे, कृष्ण पूजन के बाद।


मध्यरात्रि का क्षण = 25 अगस्त को अर्धरात्रि 12:24 बजे।
चंद्रोदय समय = 25 अगस्त को अर्धरात्रि 12:22 बजे।

अष्टमी तिथि का आरंभ = 23 अगस्त 2019, को सुबह 08:09 बजे।
अष्टमी तिथि समाप्त = 24 अगस्त 2019, को सुबह 08:32 बजे।

रोहिणी नक्षत्र आरंभ = 24 अगस्त 2019, को प्रातः 03:48 बजे।
रोहिणी नक्षत्र समाप्त = 25 अगस्त 2019, को प्रातः 04:17 बजे।

दही हांड़ी का पर्व 25 अगस्त 2019, रविवार को किया जाएगा।