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जुलाई 2020 सगाई रोका मुहूर्त

July 2020 Engagement Muhurat

July Engagement Muhurat 2020

सगाई, विवाह से पूर्व की जाने वाली महत्वपूर्ण रस्मों में से एक है। जिसे वाग्दान भी कहा जाता है। शादी से कुछ दिन या कुछ महीने पहले ये रस्म की जाती है। जिसमे वर और कन्या एक दूसरे को अंगूठी पहनाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, विवाह और उससे जुडी प्रत्येक रस्म शुभ मुहूर्त में की जाती है। इसीलिए सगाई के लिए भी शुभ मुहूर्त की आवश्यकता होती है। यहाँ हम जुलाई 2020 सगाई शुभ मुहूर्त दे रहे हैं। आप इनमे से मुहूर्त चुनकर सगाई की रस्म पूर्ण कर सकते हैं।

सगाई करने के लिए शुभ नक्षत्र

शास्त्रों के अनुसार, उत्तराषाढ़, स्वाति, श्रवण, पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वाभाद्रपद, पूर्वाषाढ़, अनुराधा, धनिष्ठा, कृतिका, रोहिणी, रेवती, मूल, मृगशिरा, मघा, हस्त, उत्तराफाल्गुनी और उत्तराभाद्रपद नक्षत्रों में वाग्दान करना शुभ होता है।

जुलाई 2020 सगाई मुहूर्त

सगाई तारीख

सगाई दिन

सगाई मुहूर्त

सगाई नक्षत्र

सगाई तिथि

2 जुलाई 2020 गुरुवार 07:04-09:24 अनुराधा द्वादशी
11:41-18:35
5 जुलाई 2020 रविवार 06:52-11:29 पूर्वाषाढ़ पूर्णिमा
13:46-18:24
6 जुलाई 2020 सोमवार 06:48-13:42 उत्तराषाढ़ प्रतिपदा
16:01-18:20
10 जुलाई 2020 शुक्रवार 08:52-15:45 पूर्वाभाद्रपद पंचमी
11 जुलाई 2020 शनिवार 06:28-08:49 उत्तराभाद्रपद षष्ठी
11:06-15:42
12 जुलाई 2020 रविवार 06:24-08:45 उत्तराभाद्रपद सप्तमी
11:02-17:56
13 जुलाई 2020 सोमवार 06:20-08:41 रेवती अष्टमी
10:58-18:39
16 जुलाई 2020 गुरुवार 06:09-13:02 कृतिका एकादशी
15:22-19:22
17 जुलाई 2020 शुक्रवार 06:05-12:58 रोहिणी द्वादशी
15:18-19:41
18 जुलाई 2020 शनिवार 06:06-15:14 मृगशिरा त्रयोदशी
17:33-19:37
23 जुलाई 2020 गुरुवार 06:44-10:19 मघा तृतीया
12:35-18:13
24 जुलाई 2020 शुक्रवार 17:09-19:13 पूर्वाफाल्गुनी चतुर्थी
25 जुलाई 2020 शनिवार 06:20-12:27 उत्तराफाल्गुनी पंचमी
14:46-19:09
26 जुलाई 2020 रविवार 06:10-12:23 हस्त षष्ठी
14:43-19:05

Note : कई क्षेत्रों में खरमास, श्राद्ध, शुक्र-गुरु अस्त, पंचक, चातुर्मास में मुहूर्त नहीं करते। इसलिए मुहूर्त देखने के पहले और करने के पहले इन बातों को ध्यान में रखें। अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग मान्यता के अनुसार शुभ कार्य किये जाते हैं। आप अपने क्षेत्र के अनुसार ही मुहूर्त करें। यहाँ मुहूर्त देखने और शुभ कार्य करने के पहले अपने क्षेत्र के पंचांग को देख लें और उसके बाद ही मुहूर्त चुनें। बाद में हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।