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कुंडली में कालसर्प दोष होने से क्या दिक्क्तें होती हैं?

कुंडली में कालसर्प दोष

कालसर्प दोष और उसकी परेशानियां

भारतीय ज्योतिष के अनुसार, मनुष्य के जीवन में घटित होने वाली प्रत्येक घटना चाहे वो अच्छी हो या बुरी, सुखद हो या दुखदायक ग्रहों की चाल के अनुसार आती है। व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की दशा ही तय करती है की निकट भविष्य में उसे लाभ होगा या हानि। कालसर्प योग भी ऐसी ही स्थिति है। ये योग कुंडली के जिस भाग में होता है उस हिस्से के ग्रह को कार्य करने से बाधित करता है और मनुष्य के जीवन में परेशानियां आने लगती है।

ज्योतिष गणना के अनुसार, जब कुंडली के सभी ग्रह राहु और केतु के मध्य आ जाते है तो कालसर्प योग कहा जाता है। इस योग के होने पर जातक को व्यवसाय, धन, परिवार, सम्पत्ति, संतान आदि के कारण भी कई परेशानियां झेलनी पड़ती है। आज हम आपको उन्ही सब परेशानियों के बारे में बता रहे हैं जो कुंडली में कालसर्प योग होने पर आती हैं।

कालसर्प दोष होने पर क्या-क्या परेशानियां आती हैं?

किसी व्यक्ति की कुंडली में अगर कालसर्प दोष हो तो उन्हें निम्नलिखित परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

  • कुंडली में कालसर्प योग होने पर नौकरी में दिक्कतें आने लगती हैं। काम ने मन नहीं लगता, गलतियां होती रहती हैं, दिमाग स्थिर नहीं रहता। जिसके चलते कई बार जॉब छूटने तक की भी नौबत आ जाती है।
  • इस योग के कारण व्यवसाय में भी बहुत लॉस होने लगता है। माल नहीं बिकता, मशीनों में दिक्क्त हो जाती है, नए आर्डर नहीं मिलते, एकाउंट्स में गड़बड़ी होने लगती है। इन सब दिक्कतों के कारण व्यवसाय बंद करने तक की भी स्थिति आ जाती है।
  • कालसर्प दोष होने पर धन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। धन हानि, कर्जा, दिया हुआ पैसा वापस नहीं मिलना, पैसा चोरी हो जाना जैसी दिक्क्तें आती है।
  • कुंडली में कालसर्प योग होने पर परिवार कोई कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गृह क्लेश, आपसी मनमुटाव, झगड़े, पारिवारिक सुख में कमी, दाम्पत्य जीवन भी अच्छा नहीं रहता।
  • इस दोष के होने पर व्यक्ति को रोग बहुत जल्दी घेर लेता है। जातक को गंभीर बिमारियों का सामना करना पड़ता है। जिसके चलते उसकी शारीरिक स्थिति बहुत दुर्बल हो जाती है।
  • कालसर्प दोष के कारण विवाह में भी देरी होती है, रिश्ता पक्का होने के बाद भी टूट जाता है और रिश्ता मिल भी गया जोड़े का मेल नहीं बैठता जिसके चलते उम्र बढ़ती रहती है।
  • कुंडली में ये योग होने पर जातक अपनी संतान से भी दुख झेलता है। संतान की पढ़ाई, उसकी उन्नति में बाधाएं आने लगती हैं। संतान गलत मार्ग चुन लेती हैं, माता-पिता से अभद्र व्यवहार करती है।
  • कुंडली में कालसर्प दोष होने पर व्यक्ति अपनी योग्यताओं और शक्तियों का पूर्ण प्रयोग नहीं कर पाता। धन होते हुए भी उसका प्रयोग नहीं कर पाता। सुखी सम्पन्न होने के बावजूद भी मानसिक तनाव और असंतोष बना रहता है। उसे हमेशा किसी न किसी चीज का डर बना रहता है। ऐसे व्यक्ति बहुत भयभीत रहते हैं। लोगों से ज्यादा मिलते जुलते नहीं हैं, सिर्फ खुद में रहना पसंद करते हैं। चिड़चिड़े हो जाते हैं। बात-बात पर गुस्सा करने लगते हैं। जिसका मुख्य कारण मानसिक असंतुलन होता है जो राहु केतु के कारण होता है।

यही सब दिक्क्तें कुंडली में कालसर्प दोष होने के कारण जातक को झेलनी पड़ती हैं। ऐसा जरूरी नहीं है सभी के साथ सारी परेशानियां हो। किसी को कोई तो किसी को कोई समस्या परेशान करती है।