कुंडली में बृहस्पति (गुरु) कमजोर है तो ये उपाय करें!

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ज्योतिष के अनुसार, मनुष्य के जीवन में घटने वाली प्रत्येक घटना ग्रहों की चाल पर निर्भर करती है। मनुष्य की कुंडली में मौजूद ग्रहों की स्थिति ही जीवन में आने वाले सुख और दुःख का कारण बनती है। कुंडली में ग्रहों की स्थिति सही नहीं होने पर व्यक्ति को कई परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। इसके विपरीत सभी ग्रह शुभ स्थिति में हों तो सब कुछ अच्छा होता है, हर कार्य में सफलता मिलती है।

बृहस्पति क्या है?

गुरु (बृहस्पति) भी उन्ही नवग्रहों में से एक है, जो सबसे बड़ा ग्रह है। बृहस्पति को नवग्रहों का स्वामी भी कहा जाता है। बृहस्पति (गुरु) धनु और मीन राशि के स्वामी हैं। कर्क राशि में बृहस्पति ग्रह उच्च भाव में रहता है और मकर राशि में नीच बनता है। सूर्य, चन्द्रमा और मंगल ग्रह बृहस्पति (गुरु) के मित्र ग्रह है। बुध बृहस्पति के शत्रु हैं और शनि तटस्थ हैं। बृहस्पति के तीन नक्षत्र पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वाभाद्रपद हैं।

कुंडली में बृहस्पति (गुरु) का स्थान

जातक के कुंडली में बृहस्पति को बहुत खास स्थान प्राप्त है। ये ग्रह व्यक्ति के गुण, विकास और जीवन के स्तर को निर्धारित करता है। गुरु पिछले जन्मों के कर्म, धर्म, दर्शन, ज्ञान, विवाह और संतान संबंधी विषयों के संतुलन का प्रतिनिधित्व करता है। जिनकी कुंडली में बृहस्पति उच्च का होता है उनको जीवन में सफलता मिलती है और जीवन सुखपूर्ण बीतता है। इसीलिए कुंडली में गुरु के स्थान का बहुत महत्व होता है।

बृहस्पति नीच का होने के कारण

कुंडली में गुरु अगर 4, 6, 8, 12 वें भाव में बैठा हो तो अशुभ प्रभाव करता है। इसके अलावा बृहस्पति शत्रु राशि, अस्तगत होकर इन्ही स्थानों में पड़ा हो तो अशुभ फल देता है। बृहस्पति की ये स्थिति कई तरह की परेशानियों का कारण बनती है। घर का ईशान कोण दूषित है तो गुरु से संबंधी समस्याएं आ सकती हैं। माला पहनने और दाढ़ी बढ़ाने से भी गुरु खराब हो जाता है। अकारण झूठ बोलने पर भी गुरु नीच हो जाता है। गलत संगत और बुरी आदतों में फंसे व्यक्ति का भी गुरु अशुभ प्रभाव देने लगता है।

बृहस्पति नीच का होने पर क्या दिक्क्त होती है?

किसी जातक की कुंडली में यदि बृहस्पति नीच का हो तो व्यक्ति को कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। कुंडली में बृहस्पति नीच का होने पर निम्नलिखित समस्याएं आती हैं –

  • विवाह संबंधी कार्यों अनावश्यक देरी होना।
  • संतान से समस्याएं।
  • उन्नति में बाधाएं।
  • नौकरी में दिक्क्तें आना।
  • स्वस्थ सही नहीं रहना।
  • दम्पति में झगड़ा रहना।
  • आर्थिक समस्याएं।
  • विवाह तय हो जाने के बाद भी टूट जाना।
  • मेहनत करने के बाद भी परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो पाना।

बृहस्पति (गुरु) को बलवान बनाने के उपाय

  • कुंडली में बृहस्पति कमजोर होने पर गुरुवार का व्रत रखना शुभ होता है। इसके साथ-साथ गुरुवार को वस्त्र पहनें। व्रत में बिना नमल का पूजन करें। शाम के समय पीले रंग की मीठी वस्तुएं जैसे बेसन के लड्डू, आम आदि का सेवन करें।
  • गुरु कमजोर होने पर गुरु से जुडी चीजों का दान करें। इस दिन पीली वस्तुएं दान करना शुभ होता है। आप सोना, हल्दी, चने की दाल, आम, बेसन के लड्डू का दान कर सकते हैं।
  • बृहस्पति को बलवान बनाने के लिए गुरुवार के दिन केले के पेड़ को पानी दे। दीपक जलाएं और प्रत्येक गुरुवार पूजा करें। ऐसा करने से गुरु ग्रह मजबूत होगा।
  • गुरु मजबूत करने के लिए प्रत्येक गुरुवार को रात में भिगोई हुई चने की दाल को पीसकर आटा, शक्कर के साथ चपातियां बनाकर गौओं को लगातार 21 गुरुवार खिलाएं। अगर कोई गाय ना मिले तो 21 गुरुवार तक ब्राह्मण दम्पत्ति को खीर सहित भोजन करवाना चाहिए।
  • बृहस्पति कमजोर होने के कारण यदि परिवार में बाधाएं आ रही हैं तो श्री सत्यनारायण भगवान का पूजन करना चाहिए और 21 गुरुवार व्रत रखकर मंदिर में आटा, गुड़, चने की दाल, पीला रुमाल, केला, लड्डू आदि चढ़ाने के बाद केले के वृक्ष की पूजा करें और मौली लपेटते हुए 7 परिक्रमा करें।

इन उपायों को करके कुंडली में बृहस्पति बलवान होगा। बृहस्पति को मजबूत करने के लिए उपायों के साथ-साथ दिनचर्या में भी परिवर्तन लाना होगा। शराब या किसी भी तरह के नशे का सेवन नहीं करें, महिलाओं की इज्जत करें, बड़ों का सम्मान करें और अच्छी संगत में रहें।