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करवा चौथ व्रत पूजा विधि, कैसे करें करवाचौथ का व्रत?

करवा चौथ 2018 चाँद निकलने का समय

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करवा चौथ व्रत कैसे करें?

हर साल कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाने वाला करवा चौथ हिन्दुओं के महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। इस दिन सुहागिन स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती है। माना जाता है इस व्रत के प्रभाव से पति की आयु लंबी होती है और परिवार में खुशियां बनी रहती हैं।

यूँ तो सभी महिलाएं अपने घर-परिवार की रीति-रिवाजों के अनुसार व्रत रखती हैं लेकिन बहुत सी नवविवाहिता को करवा चौथ व्रत पूजा व्रत विधि के बारे में ठीक से पता नहीं होता। सुहागिनों के लिए इस व्रत का बहुत महत्व होता है ऐसे में पूजन में गलती होना ठीक नहीं। आपको बता दें, करवा चौथ का व्रत केवल शादीशुदा महिलाएं रखती हैं। इसलिए हम आपको करवा चौथ पूजा व्रत विधि के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। अगर आप करवा चौथ व्रत की पूजन और व्रत विधि ठीक प्रकार से नहीं जानती तो इस विधि से व्रत को सम्पूर्ण कर सकती हैं।

करवा चौथ व्रत 

ऐसे तो पुरे भारत में करवा चौथ का व्रत मनाया जाता है लेकिन उत्तर-पूर्वी भारत में इस व्रत को बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। निर्जला एकादशी की तरह यह व्रत भी निर्जला ही रखा जाता है। जिसे रात्रि में चाँद को अर्घ्य देने के बाद खोला जाता है। बहुत से स्थानों पर करवा वहुत को करक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है।

करवा चौथ व्रत पूजा विधि

करवा चौथ का व्रत रात्रि 12 बजे के बाद से ही शुरू हो जाता है लेकिन बहुत से स्थानों पर प्रातःकाल 4 बजे सरगी खाने का रिवाज है। जो सास द्वारा बहू को भेजी जाती है। सरगी में मिठाई, फल, सेवई, पूड़ी और साज-श्रृंगार का सामान दिया जाता है। लेकिन ध्यान रहे सरगी ने प्याज और लहसुन से बने भोजन का सेवन नहीं करें। सरगी करने के बाद सूर्योदय के साथ ही निर्जला व्रत शुरू हो जाता है।

करवा चौथ पूजन सामग्री 

करवा चौथ व्रत पूजन के लिए करवा माता का कैलेंडर, करवा (छेद वाला मिट्टी का पात्र) और उसका ढक्कन, मीठे करवे, कुमकुम, शहद, अगरबत्ती, पुष्प, कच्चा दूध, शक्कर, शुद्ध घी, दही, मेंहदी, मिठाई, गंगाजल, चंदन, चावल, सिन्दूर, दीपक, रुई, कपूर, गेहूँ, शक्कर का बूरा, हल्दी, पानी का लोटा, छलनी, आठ पूरियों की अठावरी, हलुआ, दक्षिणा के लिए पैसे।

करवा चौथ व्रत पूजा विधि 

करवा चौथ व्रत में माँ पार्वती, भगवान शिव और गणेश जी का पूजन किया जाता है। पूजन करने के लिए सभी सामग्री को एक जगह रखें। सबसे पहले माँ करवा का कैलेंडर दीवार पर लगाएं। अब पूजा के लौटे और करवे की गर्दन पर मौली बांध दें। इसके बाद करवे में जल भरकर उसके छेद में रुई लगा दें। और उसे ढक दें, ढक्क्न पर गेहूं या चावल जरुर रखें। अब करवा माँ को सिंदूर, हल्दी का तिलक करके प्रणाम करें और फिर बाकी भगवानों को भी तिलक लगाएं।

करवा चौथ कैलेंडर

उसके बाद दीपक और अगरबत्ती जलाकर करवा चौथ व्रत की कथा पढ़े या सुनें। कथा सुनने के बाद गणेश जी और बाकी भगवानों की आरती करें। आरती के पश्चात् भगवान को भोग लगाएं। भोग लगाने के बाद आँख बंद करके माँ से अपने पति की लंबी आयु की प्रार्थना करें। उसके बाद पुरे दिन सभी सोलह श्रृंगारो से सजी रहें और निर्जला उपवास रखें। बहुत से स्थानों पर सामूहिक थाली फेरने का भी रिवाज होता है जिसमे सभी महिलाएं एक जगह इकट्ठी होकर कथा सुनती हैं और उसके बाद थाली फेरी जाती है।

शाम होने के बाद चाँद निकलने से पहले पूजा की थाल और अपनी सास के बायने की थाली तैयार कर लें। उसमे सुहाग का सामान और साड़ी जरूर रखें। साथ ही चीनी के करवे भी दें। पूजन के लिए खाने में बनी सभी चीजों को एक प्लेट में रखकर पूजा स्थल पर लाएं। अब दीपक जलाएं और पुनः गणेश जी और बाकी भगवानों की आरती करें। आरती के बाद चाँद निकलने के इन्तजार करें।

चाँद निकलने के बाद मिट्टी के करवे के जल से चाँद को अर्घ्य दें। अर्घ्य देने के बाद चाँद को छलनी से देखें और फिर अपनी पति का मुख देखें। अब चाँद की आरती करें और चाँद को भी मीठे का भोग लगाएं। उसके बाद पति के पैर छुएं और उनके हाथों से जल पीकर अपना उपवास खोलें। जल पीने के बाद भोग का प्रसाद (मीठा) लें। और फिर भोजन करें।

तो ये थी करवा चौथ व्रत की सरल और आसान विधि। सामान्यतौर पर सभी महिलाएं इसी तरह करवा चौथ का व्रत रखती हैं। अगर आप यहाँ इससे अलग कोई रीती-रिवाज किये जाते हैं तो आप उसी के अनुसार करवा चौथ का व्रत करें।