वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में रसोई किस दिशा में होनी चाहिए?

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वर्तमान में लोग वास्तुशास्त्र का बहुत इस्तेमाल करने लगे हैं। गृह निर्माण करवाना हो या पुराने घर की मरम्मत सभी वास्तु के सिद्धांत के अनुसार करते हैं। यूँ तो वास्तु शास्त्र भारत की प्राचीन विद्याओं में से एक है लेकिन आजकल इसे एक ट्रेंड के रूप में अपना लिया है। वास्तुशास्त्र का उद्देश्य मानव जीवन की पारिवारिक और अन्य सभी परेशानियों को दूर करना है। जो लोग इन्हे मानते हैं वे अपनी समस्यायों का हल वास्तु में ढूंढ लेते हैं।

किचन के लिए वास्तु टिप्स

आज हम वास्तु शास्त्र से जुडी कुछ टिप्स बता रहे हैं। घर का सबसे महत्वपूर्ण भाग, रसोईघर किस हिस्से में होना चाहिए उससे संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे हैं। वास्तु के अनुसार घर में रसोई की सही दिशा परिवार के लिए समृद्धि का स्तोत्र बनती है।

वास्तु के अनुसार रसोई किस दिशा में होनी चाहिए?

घर में रसोई का निर्माण हमेशा आग्नेय कोण में किया जाना चाहिए। क्यूंकि किचन का संबंध अग्नि देवता से होता है और अग्नि देवता का संबंध आग्नेय कोण, दक्षिण-पूर्व में होता है। इसलिए रसोई इसी दिशा में बनवानी चाहिए। अगर आग्नेय कोण में रसोई बनाना संभव ना हो तो पश्चिम दिशा में भी किचन बनाई जा सकती है। किचन की लम्बाई और चौड़ाई इस प्रकार होनी चाहिए की लम्बाई एवं चौड़ाई के गुणनफल में नौ से गुणा करके आठ से भाग देने पर शेषफल दो बचे।

किचन के वास्तु नियम

रसोईघर की दिशा के साथ-साथ वहां रखे जाने वाले सामान और चीजों के लिए भी वास्तु नियम बनाए गए हैं। नीचे उन्ही के बारे में विस्तार से बताया गया है –

  • ईशान कोण में चूल्हा रखना वर्जित है ऐसा करने से आर्थिक हानि होती है और वंश-वृद्धि में रुकावट आती है।
  • अगर चूल्हा ईशान कोण में रखा है तो उसे बदल कर आग्नेय कोण में रख दें। अगर चूल्हा-स्लैब में फिक्स हैं और आप उसे नहीं हटा सकते तो इसके लिए स्लैब के नीचे तांबे का बड़ा पात्र हमेशा जल से भरा रखें और प्रतिदिन सुबह-शाम उसका पानी बदलते रहें। भोजन बनाने के तुरंत बाद इस स्थान को साफ़ कर दें। आग्नेय कोण में एक बल्ब जलाकर रखें जो लाल रंग का हो। अगर चूल्हा फर्श पर रखा है तो जलपात्र चूल्हे के निकट रखना चाहिए।
  • रसोईघर को आठ सिधाओं एवं विदिशाओं में विभाजित करके ऐसी व्यवस्था अवश्य करनी चाहिए की चूल्हा रसोईघर के आग्नेय कोण में रहे।
  • किसी और कोण में चूल्हा रखने से हानि नहीं होती लेकिन आग्नेय कोण में पानी से संबंधित कार्य करने से हानि होती है। अर्थात आग्नेय कोण में अग्नि संबंधी कार्य ना होने से अग्निभय सम्भव है। इसलिए आग्नेय कोण में अग्नि संबंधी कार्य होना जरुरी है। अगर ऐसा संभव ना तो आग्नेय कोण में कोई बिजली का काम करना चाहिए।
  • उत्तर दिशा में चूल्हा रखना वर्जित है। ऐसा करने से आर्थिक हानि हो सकती है।
  • रसोईघर में भारी सामान बर्तन आदि दक्षिणी दीवार की ओर रखें।
  • घर के मुख्यद्वार से रसोईघर का चूल्हा नहीं दिखना चाहिए इससे परिवार के संकटग्रस्त होने की संभावनाएं बनी रहती हैं। इसलिए किचन की खिड़की या दरवाजा मुख्य द्वार से दूर बनवाएं।
  • किचन में फ्रिज रखना है तो आग्नेय, दक्षिण, पश्चिम और उत्तर दिशा में रखना छाइये। नैऋत्य कोण में फ्रिज ना रखें इसे वो ज्यादा समय खराब ही रहेगा।
  • अगर डाइनिंग हिस्सा किचन में है तो वो किचन के पश्चिम में होना चाहिए।
  • किचन में चूल्हा हमेशा दिवार से तीन इंच हटकर रखा होना चाहिए।
  • खाना बनाते समय खाना बनाने वाले का मुख पर्व दिशा की ओर होना चाहिए। यह घर में रहने वालों के लिए स्वास्थ्य वर्धक होता है।
  • रसोई में खाली या एक्स्ट्रा गैस सिलिंडर को नैऋत्य कोण में रखना चाहिए।
  • किचन में अन्न आदि के डिब्बे उत्तर-पश्चिम यानि वायव्य कोण में रखने चाहिए। वायव्य कोण में अन्नादि रखने से घर में इनका अभाव नहीं होता। एक बात का ध्यान रखें, अगर कभी डिब्बे खाली हो जाएं तो डिब्बों में कुछ-न-कुछ हमेशा डालकर रखें चाहे वो चार दाने ही हो जरूर रखें। वास्तु शास्त्र में लिखा है की अन्न के डिब्बे कभी खाली नहीं होने चाहिए।
  • रसोईघर में माइक्रो ओवन, मिक्सर ग्राइंडर आदि दक्षिण दीवार के पास रखना चाहिए।
  • रसोई में पीने का पानी ईशान कोण में या उत्तर दिशा में रखना चाहिए।

ये कुछ वास्तु टिप्स हैं जिन्हे किचन बनाते समय ध्यान रखना चाहिए। किचन में सब कुछ वास्तु नियम के अनुसार करना चाहिए, ऐसा करने से परिवार में खुशियां आती हैं और समृद्धि बनी रहती है।