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मूंगा (Coral) धारण करने का मंत्र, मूंगा धारण करने के फायदे और विधि

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मूंगा क्या है?

मूंगा मंगल ग्रह का रत्न है। यह लाल रंग, गरुआ रंग एवं सिंदूरी रंग का होता है। कुंडली में मंगल ग्रह का प्रभाव हो तो इस रत्न को धारण करना अत्यंत लाभकारी होता है। वैदिक ज्योतिष के मुताबिक मूंगा रत्न मंगल ग्रह का रत्न होता है। मुख्य रूप से जापान और इटली के समुद्र में पाया जाने वाला मूंगा बहुत बेहतर होता है।

यदि व्यक्ति की जन्म कुंडली में मंगल अच्छे प्रभाव दे रहा है तो मूंगा अवश्य पहनना चाहिए। इसके अलावा कुंडली में मंगल के कमज़ोर होने की स्थिति में मूंगा धारण करना चाहिए ऐसा करने से उसे बल दिया जा सकता है। इस रत्न को धारण करने से आलस्य में कमी आती है और व्यक्ति के पराक्रम में वृद्धि होती है। मूंगा कुंडली में मौजूद मांगलिक योग के दुष्प्रभाव को भी कम करता है। इसके अलावा स्त्रियों में रक्त की कमी और मासिक धर्म, व् रक्तचाप से होने वाली परेशानियों को नियंत्रित करने के लिए भी मूंगा धारण किया जा सकता है।

अगर किसी व्यक्ति में साहस की कमी हो और वह शत्रुओं से सामना नहीं कर सकता तो ऐसे व्यक्तियों को मूंगा धारण करना चाहिए। इसे पहनने से बल आता है और निडरता आती है। आत्मविश्वास की कमी होने पर भी मूंगा धारण करना लाभकारी माना जाता है। रेस्तरां और आभूषण के व्यवसाय से जुड़े व्यक्तियों को मूंगा धारण करना चाहिए यह उनके व्यवसायों में सफलता प्रदान करता है। परन्तु इसे धारण करने के लिए ज्योतिषी सलाह लेना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि यदि कुंडली में मंगल का उचित प्रभाव न हुआ तो यह फायदेमंद रत्न आपको नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए अगर आपको भी किसी ने मूंगा धारण करने के लिए कहा है तो निम्नलिखित बातों का जरुर ध्यान रखें।

मूंगा असली है या नकली?

किसी भी रत्न को धारण करने से पूर्व यह जान लेना आवश्यक होता है की वह रत्न असली यही या नकली। मूंगा असली है या नकली यह जानने के लिए दूध में मूंगा डालकर देखें अगर दूध में लाल रंग की छाई दिखती है तो समझ लें की मूंगा असली है। इसके अलावा टूटा-फूटा, पतला, सफ़ेद दाग और किसी भी प्रकार का विकृत मूंगा धारण करना हानिकारक माना जाता है। यह जीवन में परेशानियों का कारण बन सकता है।

मूंगा धारण करने की विधि :-मूंगा धारण करने की विधि

यदि आपकी कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति अधिक खराब और बहुत अच्छी है और आपको किसी विद्वान में मूंगा धारण करने की सलाह दी है तो आप मूंगा धारण कर सकते है।

इसके लिए आपको 6 से 8 कैरेट के मुंगे को सोने अथवा चांदी से बनी अंगूठी में जड्वाकर पहनना होगा। अंगूठी पहनने के लिए किसी भी शुक्ल पक्ष के किसी भी मंगलवार को सूर्य उदय होने के पश्चात् अंगूठी की प्राण प्रतिष्ठा कर लें। इसके लिए सर्वप्रथम अंगूठी को दूध, फिर गंगा जल, फिर शहद और गुल शक्कर के घोल में डाल दें। उसके पश्चात् मंगलदेव के नाम की पांच अगरबत्तियां जलाएं। और प्रार्थना करें की हे! मंगल देव, मई आपका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यह रत्न धारण कर रहा हूँ कृपा मुझे अपना आशीर्वाद प्रदान करें।

अब अंगूठी को मिश्रण से निकालकर 108 बार अगरबत्ती के ऊपर से घुमाते हुए ॐ अं अंगारकाय नमः।। का 11 बार जप करें। उसके बाद अंगूठी को हनुमान जी के चरणों से स्पर्श कराकर अनामिका में धारण करें। ध्यान रहे, रत्न में किसी भी प्रकार का दोष नहीं होना चाहिए अन्यथा शुभ प्रभावों में कमी आ सकती है।

अंगूठी धारण करने का मंत्र :-

“ॐ अग्निमूर्धा दिव: ककुत्पति: पृथिव्या अयम्। अपां रेतां सि जिन्वति।। “