मोती धारण करने का मंत्र, मोती धारण करने के फायदे और विधि

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मोती क्या है?

मोती चंद्रमा का रत्न है। यह चिकना, चमकदार और दुधिया रंग का होता है। इस रत्न को धारण करना बहुत ही फलदायी होता है। कुंडली में यदि चंद्र का शुभ प्रभाव हो तो जातक को मोती अवश्य धारण करना चाहिए। क्योंकि चंद्र मनुष्य के मन को दर्शाता है और चंद्र का प्रभाव पूरी तरह से मनुष्य की सोच पर पड़ता है। मन की स्थिरता को बनाए रखने के लिए मोती धारण करना अत्यंत लाभकारी होता है।

इस रत्न को धारण करने से माँ के परिवार से अच्छे संबंध रहते है और लाभ भी मिलता है। साथ ही व्यक्ति के आत्मविश्वास में भी बढोत्तरी होती है। मोती को धारण करने से शरीर में द्रव्य से जुड़े रोगों को भी नियंत्रित किया जा सकता है जैसे ब्लड प्रेशर, शुगर, मूत्राशय के रोग आदि।

परन्तु इसे धारण करने के लिए ज्योतिषी सलाह लेना बहुत जरुरी होता है क्योंकि यदि कुंडली में चंद्र का अशुभ प्रभाव हुआ तो यह फायदेमंद मोती आपको परेशानी में भी डाल सकता है। इसलिए अगर आपको भी किसी ने मोती धारण करने के लिए कहा है तो निम्नलिखित बातों का जरुर ध्यान रखें।

मोती असली है या नकली?

किसी भी रत्न को धारण करने से पूर्व यह जान लेना आवश्यकत होता है की वह रत्न असली है या नकली। मोती असली है या नकली यह जानने के लिए मोती को गौमूत्र में 24 घंटे तक डुबो कर रखें। अगर मोती का रंग बदल जाए या उसकी चमक फीकी पड जाए तो समझ लें की मोती नकली है जबकि असली मोती का रंग एक समान ही रहता है। इसके अलावा टूटा-फूटा, चटका, दागदार, धब्बेदार, रक्त या ताम्रवर्णी मोती धारण करना हानिकारक माना जाता है। यह जीवन में परेशानियों का कारण बन सकता है।

मोती धारण करने की विधि :-मोती धारण

यदि आपकी कुंडली में चंद्र की स्थिति सही है और आपको किसी विद्वान ने मोती धारण करने की सलाह दी है। तो आप मोती धारण कर सकते है।

इसके लिए आपको 4 से 6 रत्ती के मोती को चांदी की अंगूठी में जड्वाकर पहनना होगा। पहनने के लिए किसी भी शुक्लपक्ष के पहले सोमवार को सूर्य उदय के बाद अंगूठी को दूध, गंगा जल, शक्कर और शहद के घोल में डाल दें। उसके बाद चंद्रदेव के नाम की पांच अगरबत्तियां जलाएं।

और प्रार्थना करें की हे! चंद्रदेव, मैं आपका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मोती रत्न धारण कर रहा हूँ। कृपा आप मुझे आपना आशीर्वाद प्रदान करें।

उसके पश्चात् अंगूठी निकालकर ॐ सों सोमाय नम: का 108 बारी जप करते हुए अंगूठी को अगरबत्ती के ऊपर से घुमाए फिर मंत्र के पश्चात् अंगूठी को शिवजी के चरणों से लगाकर कनिष्टिका ऊँगली में धारण करे!

अंगूठी धारण करने का मन्त्र :-

” ॐ इमं देवा असपत्नं सुवध्यं महते क्षत्राय महते ज्यैष्ठ्याय महते जानराज्यायेन्द्रस्येन्द्रियाय। इमममुष्य पुत्रममुष्ये पुत्रमस्यै विश एष वोऽमी राजा सोमोऽस्माकं ब्राह्मणानां राजा।।”