नाग पंचमी 2019

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Naag Panchami

नाग पंचमी 2019 : सावन माह जो शिव जी की पूजा के लिए बहुत खास माना जाता है। इस पुरे महीने भगवान शंकर की भक्ति की अलग ही रौनक देखने को मिलती है। बोल बम के स्वर के साथ कांवड़ियों की भीड़ हर किसी को ॐ नमः शिवाय बोलने पर विवश कर देती है। लेकिन ये माह सिर्फ शिव जी के लिए ही नहीं बल्कि उनके कंठ में निवास करने वाले नाग देवता का भी पूजन करने का विधान है। जिसे नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है।

नाग पंचमी कब मनाई जाती है?

सावन में मनाई जाने वाली नाग पंचमी सावन के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन नागों की पूजा की जाती है। कहते हैं पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है।

नाग पंचमी 2019 का महत्व

2019 में नाग पंचमी 5 अगस्त, सोमवार को मनाई जा रही है। इस बार नाग पंचमी पर विशेष संजीवनी संयोग बन रहा है। सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी और सोमवार का संयोग भी रहेगा। नागदेव भगवान शिव के आभूषण हैं, वे सदैव भगवान शिव के गले में विराजते हैं। और सोमवार शिव जी का प्रिय दिन है। इसके बाद लगभग 4 वर्ष बाद ऐसा संयोग बनेगा। 2019 में संजीवनी संयोग 20 साल बाद बना है। इसलिए इस बार की नाग पंचमी को खास बताया जा रहा है।

नाग पंचमी 2019 पूजा शुभ मुहूर्त

ऐसे तो पंचमी तिथि 4 अगस्त, रविवार को शाम 06:48 मिनट से ही लग जाएगी। और 5 अगस्त 2019, सोमवार को दोपहर 02:52 मिनट पर समाप्त होगी। इसलिए नाग पंचमी 5 अगस्त को मनाई जाएगी।

नाग पंचमी मुहूर्त = 5 अगस्त 2019, सोमवार प्रातः 06:00 बजे से 07:37 मिनट तक रहेगा।
दूसरा मुहूर्त = 09:15 मिनट से 10:53 मिनट तक रहेगा। भक्तगण इन मुहूर्त के मध्य नाग देव का पूजन कर सकते हैं।

इस दिन अरिष्ट योग की शान्ति के लिए भी विशेष संयोग बन रहा है। इस बार नाग पंचमी में शिव का रुद्राभिषेक पूजन और कालसर्प दोष पूजन का भी शुभ योग है।

नाग देवता की पूजा

इस दिन महिलाएं नाग देव की पूजा करती हैं और अपने भाइयों व् परिवारजनों की रक्षा के लिए प्रार्थना करती हैं। पूजन के लिए नाग देवता के मंदिर में जाकर प्रतिमा पर दूध व् जल से अभिषेक करके, धुप-दीप जलाएं और नाग देवता से प्रार्थना करें। कहा जाता है जो लोग नाग देवता की पूजा करते हैं उनके परिवार को सर्प से खतरा नहीं रहता। नाग देवता की पूजा के दिन विशेष मंत्रो का उच्चारण करना अनिवार्य होता है। वे मंत्र है –

सर्वे नागाः प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथिवीतले। ये च हेलिमरीचिस्था येऽन्तरे दिवि संस्थिताः।
ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिनः। ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु वै नमः।।