नवांश चक्र क्या होता है?

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नवांश चक्र

हिन्दू ज्योतिष पद्धति के अनुसार, ग्रहों का बलाबल और शुभता या अशुभता जानने के लिए सप्तवर्ग, दशवर्ग, आदि बनाए जाते हैं। लेकिन अधिकतर षड्वर्ग या सप्तवर्ग बनाने का विधान है। षड्वर्ग हैं – राशि (जन्म कुंडली), होरा, द्रेष्काण, नवांश, द्वादशांश और त्रिशांश। इसमें सप्तांश और जोड़ दिया जाए तो सप्त वर्ग हो जाता है।

आज हम आपको राशि चक्र (भाव चक्र सहित) और नवांश चक्र के बारे में बता रहे हैं। कुंडली के विषय में जानने के लिए नवांश चक्र बहुत महत्वपूर्ण होता है। नवांश चक्र के बारे में जानकर कुंडली विचार आसानी से किया जा सकता है।

नवांश चक्र क्या होता है?

नवांश का अर्थ होता है एक राशि का नौवां भाग। अतः प्रत्येक नवांश 3° 20′ का होता है। नीचे एक टेबल दिया गया है जिसकी मदद से नवांश चक्र बना सकते हैं।

नवांश कुंडली कैसे बनाएं?

लग्न 10. 24° 27′ है। नवांश तालिका के आधार पर जानना है की लग्न में वृष राशि का नवांश पड़ता है। अतः वृष राशि को लग्न मानकर कुंडली बना लें और सब ग्रहों को उनके रेखांशों के आधार पर नवांश तालिका से ज्ञात राशि में रखें। इस तरह नवांश कुंडली तैयार हो जाएगी।

नवांश तालिका

अंशमेषवृषभमिथुनकर्कसिंहकन्यातुलावृश्चिकधनुमकरकुंभमीन
0-3°-20′110741107411074
6°-40′211852118521185
10°-00′312963129631296
13°-20′411074110741107
6°-40′521185211852118
20°-00′631296312963129
23°-20′741107411074110
26°-40′852118521185211
30°-00′963129631296312

संख्या 1, 2, 3 आदि राशियां हैं। जैसे 1 – मेष, 2 – वृषभ, 3 – मिथुन, 4 – कर्क, 5 – सिंह, 6 – कन्या, 7 – तुला, 8 – वृश्चिक, 9 – धनु, 10 – मकर, 11 – कुंभ, 12 – मीन।

नवांश कुंडली

सूर्य का रेखांश 5, 12°.48′ है। अब नवांश तालिका में कन्या राशि के नीचे व् 13°.20′ अंश के सामने मेष राशि लिखी है। सूर्य का रेखांश 10 अंश से अधिक व् 13° से कम है। अतः इसी नवांश राशि में सूर्य स्थित है। कहा जाएगा की नवांश कुंडली में सूर्य उच्च राशि में है या जन्म के समय सूर्य अपने उच्च नवांश में है। क्यूंकि सूर्य की उच्च राशि मेष है। इसी तरह सब ग्रहों को रखा जाता है। इस कुंडली में चंद्रमा भी उच्च नवांश में है। नवांश वर्णन का अन्य तरीका भी है।

यहाँ नवांश वर्णन का अन्य तरीका भी है। यहाँ नवांश में वृष राशि है, जिसका स्वामी शुक्र है। अतः कहा जाएगा की लग्न शुक्र के नवांश में है। शुक्र भी शनि के नवांश में है। जैसे मंगल का नवांश शनि व् बुध का नवांश सूर्य है। इसी तरह सब ग्रहों का नवांश निकालना चाहिए।