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नवरात्रि कलश स्थापना मुहूर्त समय 2019

नवरात्रि कलश स्थापना मुहूर्त समय 2019

नवरात्रि नौ दिन तक मनाया जाने वाला एक पर्व है जिसमे नौ दिन दुर्गा माता के अलग अलग रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है और इसी दिन कलश स्थापना की जाती है। उसके बाद ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायिनी, कालरात्रि, महागौरी, सिध्दिदात्री की पूजा होती है। महाष्टमी और नवमी के दिन लोग अपने घर में कन्यापूजन करते हैं। शरदीय नवरात्रि सितम्बर या अक्टूबर में आते हैं, और बहुत से लोग नवरात्रि के पूरे नौ दिन तक उपवास भी रखते हैं। साल 2019 में शरदीय नवरात्रि 29 सितम्बर दिन रविवार से शुरू हो रही है। और 6 अक्टूबर को महाष्टमी और 7 नवंबर को नवमी की पूजा की जाएगी। माता के नवरात्रि का पहले दिन सबसे अहम होता है क्योंकि इस दिन घट स्थापना की जाती है और घट स्थापना के लिए सबसे जरुरी होता है की घट स्थापना शुभ मुहूर्त में की जाए।

कलश स्थापना

कलश स्थापना को ही घट स्थापना कहा जाता है, घट स्थापना करने के लिए सुबह नहा धोकर साफ़ वस्त्र धारण करके मंदिर की साफ़ सफाई करें, और गंगाजल का छिड़काव करें। उसके बाद माता की मूरत को स्थापित करें। कलश स्थापना के लिए सभी जरूरी सामान को अपने पास रखे और कलश स्थापना की तैयारी शुरू करें। मां दुर्गा को लाल रंग बहुत पसंद है इसीलिए माँ की मूरत की स्थापना के लिए लाल रंग का आसन ही खरीदें। इसके अलावा कलश स्‍थापना के लिए मिट्टी का पात्र, जौ, मिट्टी, मौली, इलायची, लौंग, कपूर, रोली, साबुत सुपारी, चावल, सिक्‍के, अशोक या आम के पांच पत्ते, जल से भरा हुआ कलश, नारियल, चुनरी, सिंदूर, फल, फूल व् फूलों की माला, माता का श्रृंगार आदि चाहिए होता है। उसके बाद विधि अनुसार शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करें।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

कलश स्‍थापना की तिथि:- 29 सितंबर 2019 दिन रविवार

कलश स्‍थापना के लिए सबसे शुभ मुहूर्त:- 29 सितंबर 2019 को सुबह 6 बजकर 16 मिनट से लेकर 7 बजकर 40 मिनट तक का मुहूर्त सबसे शुभ है

कुल अवधि:- 1 घंटा 24 मिनट का कुल समय है

कलश स्थापना करने की विधि

  • नवरात्रि के पहले दिन सुबह समय उठकर नहा धोकर साफ़ वस्त्र धारण करें।
  • उसके बाद मंदिर की साफ सफाई करें और गंगाजल छिड़के और फिर सबसे पहले गणेश जी का नाम लें और फिर मां दुर्गा के नाम की ज्योत जलाएं।
  • कलश स्‍थापना के लिए मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ के बीज बोएं, और जल दें।
  • फिर एक तांबे के लोटे पर रोली से स्‍वास्तिक बनाएं और लोटे के ऊपर के हिस्‍से में मौली माता रानी का नाम लेते हुए मौली बांधे।
  • अब इस लोटे में साफ़ पानी भरें और इसमें कुछ बूंदें गंगाजल की मिलाएं।
  • इसके बाद कलश में आम या अशोक के पांच पत्ते लगाएं।
  • ऐसा करने के बाद एक नारियल को लाल कपड़े या माता की लाल चुन्नी से लपेटकर उसे मौली से बांध दें, और फिर उस नारियल को कलश के ऊपर रख दें।
  • अब इस कलश को मिट्टी के उस पात्र के ठीक बीच में रख दें जिसमें आपने जौ बोएं हैं, ध्यान से रखें।
  • कलश स्‍थापना के साथ ही नवरात्रि के नौ व्रतों को रखने का संकल्‍प लिया जाता है। जिस भी इच्छा के लिए आप माँ के उपवास कर रही है उस इच्छा को सम्पूर्ण करने के लिए भी आप माँ से प्रार्थना कर सकती है।
  • यदि आप माँ के नाम की अखंड ज्‍योति भी जलाना चाहती है तो कलश स्थापना के साथ उसे भी जला सकती है।

तो यह है साल 2019 के कलश स्थापना का मुहूर्त और कलश स्थापना कैसे करें इससे जुड़े कुछ टिप्स, तो अब आप भी यदि नवरात्रि में कलश स्थापना करने जा रही है तो शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखें।