नवरात्रि कलश स्थापना विधि

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आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से लेकर नवमी तक नवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाता है जिसे दुर्गा पूजा भी कहते हैं। दुर्गा पूजा के इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों का पूजन किया जाता है। हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, जब राक्षसों का अत्याचार देवताओं और मनुष्य जाति पर बढ़ने लगा तो माँ दुर्गा ने नौ अलग-अलग रूप लेकर सभी दैत्यों का संघार किया।

नवरात्रि (दुर्गा पूजा)

नवरात्रि के पावन पर्व को पुरे भारत में बड़ी श्रद्धा और विश्वास से मनाया जाता है। आश्विन के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से लेकर नवमी तिथि तक दुर्गा पूजा मनाई जाती है, जिसके दसवें दिन यानी दशमी को दशहरा मनाया जाता है। नवरात्रि (दुर्गा पूजा) हिन्दुओं के महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है जिसे सभी बड़ी श्रद्धा से मनाते है।

कैसे मनाते हैं नवरात्रि (दुर्गा पूजा)?

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों का पूजन किया जाता है जिसके पहले दिन यानी प्रतिपदा को पुरे विधि-विधान के साथ कलश स्थापना की जाती है और जौ बोएं जाते हैं। नवरात्रि पूजन में कलश को भगवान गणेश का रूप माना जाता है और इसकी स्थापना नवरात्रि पूजन से पहले की जाती है।

नवरात्रि कलश स्थापना विधि

नवरात्रि कलश स्थापना के लिए सबसे पहले आपको कुछ महत्वपूर्ण सामग्री की आवश्यकता होगी जिसका प्रयोग कलश स्थापना में किया जाएगा। वे महत्वपूर्ण वस्तुएं हैं –

  • मिट्टी का पात्र (जौ बोने के लिए)
  • मिट्टी का कलश
  • कलश को ढकने के लिए मिट्टी का ढक्कन
  • शुद्ध साफ की हुई मिट्टी
  • जौ
  • शुद्ध जल / गंगा जल
  • मोली (लाल सूत्र)
  • साबुत सुपारी
  • कलश में रखने के लिए सिक्के
  • आम के 5 पत्ते
  • कच्चे चावल
  • एक पानी वाला नारियल
  • लाल कपड़ा / लाल चुनरी
  • फूलों की माला

नवरात्र कलश स्थापना की सही विधि

नवरात्रि कलश स्थापना के नियमानुसार, कलश स्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करनी चाहिए और साथ ही पूजा स्थल पूरी तरह शुद्ध होना चाहिए। माना जाता है ऐसा करने से भगवान पूजा स्वीकार करते हैं। कलश स्थापना करने के लिए सबसे पहले पूजा स्थल और पूजा घर को अच्छे से साफ़ करके गंगा जल छिड़क कर शुद्ध कर लें। उसके बाद एक लड़की की चौकी लें और उस पर लाल कपड़ा बिछा लें।

अब इस कपडे पर थोड़े कच्चे चावल रखें और साथ-साथ गणेश जी का ध्यान करें और उनका आवाहन करें। उसके बाद साफ़ मिट्टी को मिट्टी के पात्र में डालें और उसमे जौ बो दें। जौ बोने के बाद उसमे साफ़ पानी और गंगाजल डालें और उसे चौकी पर रख दें। मिट्टी के पात्र के मुख पर रक्षा सूत्र अवश्य बांधें।

अब मिट्टी का कलश लें और उसके मुख पर मौली बाँध दें। उसमे शुद्ध पानी और थोड़ा सा गंगाजल डालें। कलश में सुपारी और एक सिक्का भी डालें। अब आम के पांच पत्ते लगाकर उस कलश को ढक दें। अब नारियल लें और उसमे कुछ पैसे रखकर उसपर लाल चुनरी या कपड़ा लपेट कर रक्षा सूत्र से बाँध दें। इस नारियल को कलश पर रखते हुए सभी देवी-देवताओं का ध्यान करें और उनका आवाहन करें। लीजिये कलश स्थापना संपूर्ण हुई। इसके बाद बाकी की पूजा अपने विधि-विधान से अनुसार करें।

नोट : आप अपनी सामर्थ्य अनुसार सोना, चांदी, मिट्टी या पीतल का कलश स्थापित कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे कलश लोहे या स्टील का नहीं होना चाहिए।