हवन करने का तरीका, हवन कैसे किया जाता है?

Hawan Kaise Kare, Hawan Puja, Hawan Vidhi, Hawan Mantra, Havan Ka Tarika, हवन करने का महत्व, Hawan ki Sahi Vidhi, Hawan ke Fayde, Hawan Kaise Kare?हवन का महत्वहिन्दू परंपराओं के अनुसार, किसी भी पूजा पाठ, धार्मिक अनुष्ठान और शुभ कार्य सम्पन्न होने के पश्चात् हवन करना अनिवार्य होता है। माना जाता है बिना हवन उस कार्य का पूर्ण फल नहीं मिलता। इसलिए सभी शुभ काम सम्पन्न होने के बाद हवन कराया जाता है। हवन कराने से सकारात्मकता का संचार होता है, वातावरण शुद्ध हो जाता है। हवन से निकलने वाले धुंए से नकारात्मकता समाप्त हो जाती

श्राद्ध 2019 कब से शुरू है और कब से कब तक है

श्राद्ध क्या होता हैशिशु के जन्म से लेकर मृत्यु के प्राप्त होने तक बहुत से संस्कार किये जाते हैं। और अंत्येष्टि को अंतिम संस्कार माना जाता है। लेकिन अंत्येष्टि के बाद भी कुछ ऐसे काम होते हैं कर्म होते हैं जो मृतक से सम्बंधित खासकर मृतक की संतान को करना होता है। श्राद्ध कर्म उन्हीं में से एक है जो व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी संतान को करना होता है। वैसे तो हर महीने की अमावस्या के दिन श्राद्ध कर्म किया जा सकता है परन्तु भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक श्राद्ध कर्म करने का विधान है। इसी कारण

नवांश चक्र क्या होता है?

नवांश चक्रहिन्दू ज्योतिष पद्धति के अनुसार, ग्रहों का बलाबल और शुभता या अशुभता जानने के लिए सप्तवर्ग, दशवर्ग, आदि बनाए जाते हैं। लेकिन अधिकतर षड्वर्ग या सप्तवर्ग बनाने का विधान है। षड्वर्ग हैं - राशि (जन्म कुंडली), होरा, द्रेष्काण, नवांश, द्वादशांश और त्रिशांश। इसमें सप्तांश और जोड़ दिया जाए तो सप्त वर्ग हो जाता है।आज हम आपको राशि चक्र (भाव चक्र सहित) और नवांश चक्र के बारे में बता रहे हैं। कुंडली के विषय में जानने के लिए नवांश चक्र बहुत महत्वपूर्ण होता है। नवांश चक्र के बारे में जानकर कुंडली विचार आसानी से किया जा

2019 भाई दूज कब है? शुभ मुहूर्त

साल भर में बहुत से त्यौहार मनाएं जाते है, यह त्यौहार सभी के लिए खुशियों और प्यार से भरपूर होते हैं। साथ ही सालभर में दो त्यौहार ऐसे भी आते हैं जो भाई बहन के प्यार प्रेम को बढ़ाने और उनके रिश्ते की डोर को और भी मजबूत करते हैं, और वो त्यौहार हैं रक्षा बंधन और भाई दूज। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई बहन के प्यार को समर्पित त्यौहार भाई दूज मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई के माथे पर चन्दन और कुमकुम का तिलक भाई की लम्बी उम्र की कामना करते हुए सुख समृद्धि से भरपूर रहने की कामना करती है।उसके बाद भाई भी अपनी

विभिन्न नक्षत्रों में जन्म होने के क्या-क्या फल होते हैं?

जन्म नक्षत्र के अनुसार जानें अपना स्वाभाव और फलभारतीय ज्योतिष के अनुसार, व्यक्ति के जीवन की कठिनाइयां और शुभ परिणाम पहले से ही निहित होते हैं। कहा जाता है जन्म के पश्चात् व्यक्ति का भाग्य लिखा जाता है और उसी के अनुसार फल मिलते हैं। हालाँकि समय के साथ फल का परिणाम बदल सकता है, लेकिन कभी खत्म नहीं होता और यह मनुष्य के कर्म निर्धारित करते हैं। यहाँ हम ऐसे ही विषय पर बात कर रहे हैं।शास्त्रों के अनुसार, जिस घड़ी मनुष्य जन्म लेता है उसका भाग्य उस समय ग्रहों और तारों के स्थिति के अनुसार तय किया जाता है। ग्रहों के साथ-साथ

कुंडली में कालसर्प दोष होने से क्या दिक्क्तें होती हैं?

कालसर्प दोष और उसकी परेशानियांभारतीय ज्योतिष के अनुसार, मनुष्य के जीवन में घटित होने वाली प्रत्येक घटना चाहे वो अच्छी हो या बुरी, सुखद हो या दुखदायक ग्रहों की चाल के अनुसार आती है। व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की दशा ही तय करती है की निकट भविष्य में उसे लाभ होगा या हानि। कालसर्प योग भी ऐसी ही स्थिति है। ये योग कुंडली के जिस भाग में होता है उस हिस्से के ग्रह को कार्य करने से बाधित करता है और मनुष्य के जीवन में परेशानियां आने लगती है।ज्योतिष गणना के अनुसार, जब कुंडली के सभी ग्रह राहु और केतु के मध्य आ जाते है तो

16 जुलाई 2019 चंद्र ग्रहण का समय

चंद्र ग्रहण 2019Chandra Grahan 16 July 2019 : पूर्णिमा की रात को चंद्रमा पुर्णतः गोलाकार का दिखाई देता है, लेकिन कभी-कभी चंद्रमा के पूर्ण हिस्से पर धनुष या हंसिया के आकार की काली परछाई दिखने लगती है। जो कभी-कभी चाँद को पूरी तरह से ढक लेती है। पहली स्थिति को चन्द्र अंश ग्रहण या खंड-ग्रहण कहते है जबकि दूसरी स्थिति को पूर्ण चन्द्र ग्रहण या खग्रास चंद्रग्रहण कहते है। चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा तिथि को ही लगता है।2019 का चंद्र ग्रहण भी पूर्णिमा के दिन ही लगेगा। चंद्र ग्रहण 2019 16 जुलाई 2019 यानी आषाढ़ शुक्ल पक्ष की