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पुखराज (Yellow Sapphire) धारण करने का मंत्र, विधि और उसके फायदे

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पुखराज क्या है?उसके फायदे

पुखराज बृहस्पति ग्रह का रत्न है। जो सामान्यतः हल्दी या सोने के रंग के समान होता है। जातक की कुंडली में यदि बृहस्पति ग्रह का प्रभाव हो तो इस रत्न को धारण करने की सलाह दी जाती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार पुखराज, बृहस्पति ग्रह का रत्न होता है। पीले रंग का यह रत्न बहुत मूल्यवान होता है इसलिए इस रत्न की कार्य क्षमता भी बहुत बेहतर होती है।पुखराज धारण करने के लाभ

इस रत्न को धारण करने से जातक को ईश्वरीय कृपा प्राप्त होती है। और साथ ही व्यक्ति के साथ चल रही आर्थिक परेशानियां भी दूर हो जाती है। पुखराज को धारण करने से व्यक्ति को आर्थिक लाभ मिलने लगता है और वह अपने जीवन में तरक्की पाने लगता है। इसलिए यदि किसी व्यक्ति को लगातार जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, तो आप अपनी कुंडली का निरिक्षण करवाकर पुखराज धारण कर सकते है। इस रत्न को धारण करने से स्वास्थ्य अच्छा होता है, व्यक्ति को आर्थिक लाभ मिलने लगता है, उम्र लम्बी होती है और साथ ही मान-प्रतिष्ठा भी मिलती है।

इसके अतिरिक्त जिन कन्यायों के विवाह में बार-बार विघ्न आते रहते है और शादी तय होते-होते रह जाती है उन्हें पुखराज अवश्य धारण करना चाहिए। जिन दम्पतियों को पुत्र प्राप्ति की इच्छा होती है उन्हें पुखराज पहनना चाहिए। परन्तु किसी भी रत्न को धारण करने से पूर्व ज्योतिषी सलाह लेना बहुत जरुरी होता है। क्योंकि हो सकता है आपकी कुंडली में बृहस्पति ग्रह का प्रभाव उतना न हो जितना आप सोच रहे हो ऐसे में रत्न धारण करने से कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए सही और अनुभवी ज्योतिष से सलाह के बाद ही कोई भी रत्न धारण करें।

पुखराज असली है या नकली?

किसी भी रत्न को धारण करने से पूर्व यह जान लेना चाहिए की वह रत्न असली है या नकली। क्योंकि जहाँ एक तरफ असली रत्न पहनने से लाभ मिलता है वहीं दूसरी तरफ नकली या गलत रत्न पहनने से जीवन में परेशानियाँ आने लगती है। पुखराज असली है या नकली यह जानने के लिए पुखराज को 5 दिनों के लिए दूध में डाल दें।

5 दिन बाद यदि पुखराज का रंग वैसा का वैसा है तो समझ लें रत्न सही है। जबकि नकली रत्न बदरंग हो जाएगा। इसके अतिरिक्त दुरंगा, खड्डेदार, श्वेतबिंदु, काला धब्बायुक्त, खुरदुरा और लाल रंग का पुखराज कभी धारण नहीं करना चाहिए।

पुखराज धारण करने की विधि

यदि आपकी कुंडली में बृहस्पति गृह का प्रभाव ठीक है और आपको किसी ज्ञानी ज्योतिषी ने पुखराज धारण करने की सलाह दी है तो आप पुखराज धारण कर सकते है।

इसके लिए आपको 5 से 7 कैरेट के पुखराज को सोने की अंगूठी में बनवाकर पहनना होगा। अंगूठी पहनने के लिए किसी भी शुक्ल पक्ष के बृहस्पतिवार को, पुष्य नक्षत्र में, सूर्य उदय होने के पश्चात् अंगूठी की प्राण प्रतिष्ठा कर लें। जिसके लिए सबसे पहले अंगूठी को दूध, फिर गंगा जल, फिर शहद और फिर शक्कर के घोल में डाल दें। उसके पश्चात् बृहस्पति देव के नाम की पांच अगरबत्तियां जलाएं।पुखराज धारण कैसे करें

अब बृहस्पति देव से प्रार्थना करें की हे! बृहस्पति देव, मैं आपका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यह रत्न धारण कर रहा हूँ कृपा मुझे अपना आशीर्वाद प्रदान करें। अब अंगूठी को घोल से निकालकर 108 बार अगरबत्ती के ऊपर से घुमाते हुए ॐ ब्रह्म ब्र्हस्पतिये नमः का जाप करें। उसके बाद अंगूठी को भगवान विष्णु के चरणों में स्पर्श कराकर तर्जनी में धारण करें। ध्यान रहे, पुखराज में कोई दोष नहीं होना चाहिए अन्यथा उसके प्रभावों में कमी आ सकती है। ब्रहस्पति ग्रह के अच्छे प्रभाव प्राप्त करने के लिए उच्च कोटि और सिलोनी पुखराज ही धारण करना चाहिए।

अंगूठी कारण करने का मंत्र

“ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु। यद्दीदयच्छवस ऋतुप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्।।”

पुखराज धारण करने का कारण

पुखराज धारण करने से ज्ञान, शक्ति, सुख, धन, आदि में वृद्धि होती है। गुरु जनित कष्टों का अंत होता है। जिन जातकों के विवाह में दिक्कत हों, वे पुखराज धारण कर सकते है परन्तु केवल ज्योतिषी सलाह के अनुसार। इसके विपरीत यदि पुखराज जातक के लिए खराब या अशुभ रत्न हो तो जातक के घुटने में दर्द, पेट की बीमारी, भी हो जाती है।