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यश, विद्या और बुद्धि चाहिए तो ऐसे करें सरस्वती की पूजा

सरस्वती पूजा 2019 पूजा मुहूर्त

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माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी मनाई जाती है। हिन्दू धर्म में, बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा भी की जाती है। माना जाता है बसंत पंचमी के दिन ही माँ सरस्वती भगवान कृष्ण के कंठ से उत्पन्न हुई थी। इसलिए देवी सरस्वती को वाणी की देवी भी कहा जाता है। मान्यता है, बसंत पंचमी के दिन पुरे विधि-विधान से माँ सरस्वती का पूजन करने से यश, विद्या और बुद्धि का वरदान मिलता है।

सरस्वती पूजा

बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा की जाती है, विद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में इस दिन माँ सरस्वती की पूजा की जाती है। सरस्वती पूजा के दिन सभी विद्यार्थी अपनी किताबें देवी के चरणों में रखते हैं ताकि उन्हें बुद्धि व् ज्ञान का आशीर्वाद मिल सके  शिक्षा में सफलता मिल सके।

सरस्वती पूजा की विधि

बसंत पंचमी के दिन घर पर सरस्वती पूजा कैसे करें उसकी विधि हम आपको बता रहे हैं। ध्यान रहे, सरस्वती पूजा के सभी कार्य विद्यार्थी द्वारा ही किये जाने चाहिए।

सरस्वती पूजा के लिए आवश्यक सामग्री

  • देवी सरस्वती की प्रतिमा या फोटो
  • एक सफ़ेद कपडा
  • फूल – कमल, लिली और जैस्मीन
  • आम के पत्ते और बेल पत्र
  • हल्दी
  • कुमकुम
  • चावल
  • 5 प्रकार के फल जिनमे नारियल और केले होना आवश्यक है।
  • एक कलश
  • सुपारी, पान के पत्ते और दूर्वा
  • दीया और अगरबत्ती
  • गुलाल
  • दूध
  • विद्यार्थी की सभी किताबें व् कलम

सरस्वती पूजा कैसे करें?

  • बसंत पंचमी के दिन प्रातःकाल जल्दी जागकर स्नान कर लें। स्नान से मन और शरीर दोनों शुद्ध हो जाएंगे। नहाने के बाद पीले वस्त्र पहनें।
  • पूजन की तैयारी करें। जिस जगह पर मूर्ति या फोटो लगानी है उसे अच्छी तरह साफ कर लें।
  • चौकी या किसी टेबल पर सफ़ेद कपडा बिछा लें और मूर्ति या फोटो उस कपडे पर रख दें।
  • अब हल्दी, कुमकुम, चावल, माला और फूलों से माँ सरस्वती की प्रतिमा को सजाएं।
  • विद्यार्थी अपनी किताबें और कलम को माँ की मूर्ति के पास रख दें।
  • कलश में पानी भरें और इसमें आम की पांच पत्तियां लगा दे और ऊपर एक पान का पत्ता रखें।
  • इस पान के पत्ते पर सुपारी, दूर्वा और फूल रखें। कलश के साथ में भगवान गणेश की प्रतिमा भी रख लें।
  • अब हाथ में बेलपत्र और फूल माला लेकर भगवान गणेश का ध्यान करें। इन फूल और बेलपत्र को गणेश जी के चरणों में चढ़ा दें। ऐसा ही देवी सरस्वती के लिए भी करें।
  • इसके बाद मंत्र का उच्चारण करें – “या कुन्देंदु तुषारहारधवला, या शुभ्र वस्त्रावृता, या वीणा वरदंड मंडितकरा या श्वेत पद्मासना, या ब्रह्माच्युत शंकरा प्रभ्रुतिभी देवी सदा वंदिता, सा मां पातु सरस्वती भगवती निशेष जाड्यापहा। ॐ सरस्वत्ये नम:, ध्यानान्तरम पुष्पं समर्पयामि”
  • मंत्र उच्चारण के बाद देवी का ध्यान करें और अगरबत्ती और दीया जलाएं।
  • दीया प्रज्वलित करने के बाद देवी को मिठाइयां, फल व् भोग लगाएं।
  • आरती करें और सरस्वती स्तुति गाएं। सरस्वती पूजा के दिन केवल शाकाहारी भोजन खाएं।
  • बसंत पंचमी के अगले दिन देवी की मूर्ति का विसर्जन करने से पूर्व लकड़ी की कलम बनाकर बेल के पत्तों पर दूध से “ॐ सरस्वत्ये नमः” लिखें। इन बेल पत्रों को पुनः देवी को अर्पित करें और प्रार्थना करें। बाद में प्रतिमा को जल में विसर्जित कर दें।
  • लीजिये सरस्वती पूजा संपन्न हुई।

2019 सरस्वती पूजा

सरस्वती पूजा हमेशा बसंत पंचमी के दिन की जाती है। लेकिन इस साल बसंत पंचमी की तिथि को लेकर लोग उलझन में हैं। दरअसल, माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 2 दिन लग रही है। देश के कुछ हिस्सों में चतुर्थी तिथि 9 तारीख को दोपहर से पहले ही समाप्त हो रही है और पंचमी तिथि शुरू हो रही है। जो 10 तारीख को 2 बजकर 9 मिनट तक है। ऐसे में सरस्वती पूजन किस दिन करना शुभ होगा इसे लेकर लोग असंजस में है।

किस दिन कहां होगी सरस्वती पूजा?

पंजाब, जम्मू, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में सरस्वती पूजा 9 फरवरी को मनाई जाएगी। क्यूंकि इन क्षेत्रों में पंचमी तिथि दोपहर से पूर्व ही लग जाएगी। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में यह पर्व 10 फरवरी को मनाया जाएगा। क्यूंकि इन क्षेत्रों में पंचमी तिथि 9 तारीख को दोपहर के बाद लगेगी। इसलिए 10 तारीख को सरस्वती पूजन करना शुभ होगा।