सावन में सोमवार व्रत करने के बारे में सोच रहें है तो ये जरूर पढ़ें!

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Sawan me vrat rakhne aur puja karne ka kya mahatv hai : भगवान शिव का प्रिय और उनके पूजन के लिए जाने जाना वाला सावन का महीना अंग्रेजी कैलेंडर के जुलाई-अगस्त के महीने में आता है। जिसे पुरे देश में बड़ी श्रद्धा और प्रेम के साथ मनाया जाता है। सावन माह को शिव जी का सबसे प्रिय माह कहा जाता है। इसलिए शिवभक्त इस दौरान भोले-शंकर को प्रसन्न करने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ते।

क्या बच्चे, क्या बड़े और क्या बूढ़े? सभी इस महीने में भगवान शिव की आराधना में लीन रहते है और ऊपर से बरसता पानी भी इस माह को और पावन कर देता है। सावन के महीने में जहाँ शादीशुदा महिलाएं और कुंवारी लडकियां शिव जी का व्रत रखती है वहीं लड़के भी कंधे पर कांवड़ उठाये भोले बाबा के द्वार पहुँच जाते है।

इस महीने का धार्मिक महत्व बहुत ज्यादा माना जाता है। क्योंकि इस महीने में भोले शंकर का पूजन किया जाता है। इस माह में भोले बाबा के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। जिनमे से कुछ पर कांवड़ का जल भी चढ़ाया जाता है। सावन में सबसे अधिक महत्व सावन के सोमवार व्रत को दिया जाता है। कहते है इस व्रत को रखने से मनुष्य को जीवन की परेशानियों से मुक्ति मिलती है और वो जो इच्छा रखता है भगवान शंकर उसकी इच्छा पूरी कर देते हैं। यहाँ हम आपको सावन का महत्व और सावन के महीने में क्या-क्या करना चाहिए इस बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

  • सावन में पूरी आस्था के साथ सोमवार का व्रत रखें : Sawan Somwar Vrat

सावन में सोमवार के व्रत का बहुत खास महत्व माना जाता है। इसलिए अधिकतर लोग सावन के प्रत्येक सोमवार का व्रत रखते है। कहते है सावन सोमवार का व्रत रखने से भगवान शंकर की कृपा होती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इतना ही नहीं जो अविवाहित इस व्रत को श्रद्धा के साथ पुरे सावन में रखते है उन्हें मनचाहा जीवनसाथी मिलता है। इसके अलावा जो विवाहित स्त्री इस व्रत को रखती हैं उनका सौभाग्य सदैव बना रहता है और आपसी संबंध अच्छे होते हैं।

यह व्रत कोई भी अपनी श्रद्धानुसार किसी भी प्रकार रख सकता है। फिर चाहे वो स्त्री हो या पुरुष। एक और बात, भगवान शंकर के व्रत के कोई कठिन नियम नहीं होते इसलिए इस व्रत को रखना उतना मुश्किल भी नहीं होता। बहुत से लोग सावन के सोमवार से ही 16 सोमवार का व्रत शुरू करते है जिसके बाद उद्यापन किया जाता है।

  • नियमित रूप से पूजा करने का विधान : Sawan Puja

सावन के महीने में शिव जी की पूजा का खास महत्व माना जाता है। इसलिए शास्त्रों में सावन के महीने के दौरान नियमित रूप से शिव जी की पूजा करने का विधान बनाया गया है। कोई व्यक्ति इसके लिए बाध्य नहीं है लेकिन अपनी इच्छाओं की पूर्ति की चाह रखने वाले और भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने वाली लड़कियां इस नियम का पूरी आस्था से पालन करती हैं। इसमें शिव जी की दैनिक पूजा का नियम है जिसे जलाभिषेक, भोग, दीप, चन्दन और फूलों से किया जाता है। कहते है इस तरह शिव जी का पूजन करने से शिव जी की कृपा सदैव पूजन करने वाले पर बनी रहती है।

  • सावन के पूरे महीने मंदिर में शिव जी की पूजा : Sawan me Jalabhishek

सावन के महीने में सभी शिव जी का जलाभिषेक करने शिव मंदिर में आते रहते है। कहा जाता है सावन के पुरे महीने ऊपर बताये गए तरीके से शिव जी का मंदिर में पूजन करने से व्यक्ति को भोले बाबा का आशीर्वाद मिलता है। और अगर यह नियम कुंवारी कन्या करे तो शीघ्र ही उसका विवाह सुयोग्य वर के साथ हो जाता है। पुराणों में भी सावन के महीने में शिवलिंग के पूजन के महत्तम को बताया गया है।

  • सावन पूर्णिमा का व्रत : Sawan Purnima Vrat

Sawan Purnima Vrat : सावन की पूर्णिमा का भी शिव जी के पूजन के लिए खास महत्व माना जाता है। सावन की पूर्णिमा का व्रत रखना बहुत लाभकारी और अच्छा माना जाता है। क्योंकि इस दिन सावन की पूर्णिमा तो होती ही है साथ-साथ भाई बहन का पवित्र पर्व रक्षाबंधन भी इसी दिन मनाया जाता है। ऐसे में इस व्रत का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। इसलिए जो मनुष्य सावन पूर्णिमा का व्रत रखता है उसे भगवान शंकर का आशीर्वाद मिलता है और उसके जीवन में कष्ट नहीं आतें।

  • सावन शिवरात्रि व्रत भी है जरूरी : Sawan Shivratri Vrat

ऐसे तो साल में 12 शिवरात्रियां आती है लेकिन सभी में महाशिवरात्रि और सावन की शिवरात्रि को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। सावन की शिवरात्रि सावन के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। जिसका सावन महीने में खास महत्व होता है। इस दिन उपवास रखने से भगवान शंकर का रुद्राभिषेक करने से समस्त पापों का नाश हो जाता है।

काल सर्प दोष से छुटकारा पाने के लिए इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में षोडशोपचार पूजन का विधान है। कहते है जो भक्त सावन की शिवरात्रि में पुरे श्रद्धा भाव से भगवान भोलेनाथ का ध्यान करता है और उपवास रखता है, भगवान शिव उस पर प्रसन्न होते है और उसके सभी कष्ट दूर कर देते है। सावन शिवरात्रि का व्रत भी सावन सोमवार के व्रत की तरह रखा जाता है बस इस दिन पूजन में खास सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है।

  • विधि-विधान से भोले शंकर की पूजा करें : Sawan me Shiv ji ki puja

ऊपर बताये गए सभी पॉइंट्स में हमने आपको सावन में भोलेनाथ की आराधना और व्रत करने का महत्तम बताया। जो भी मनुष्य पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ सावन के पुरे महीने भगवान शंकर की इस प्रकार आराधना करेगा उसे भगवान शिव का आशीर्वाद अवश्य मिलेगा। इतना ही नहीं सावन के महीने में नियमित रूप से विधि विधान से पूजा करने से भी भगवान शिव उस मनुष्य के सभी कष्ट हर लेंगे।