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एकादशी अगस्त 2018 : संतान सुख के लिए जरूर करें सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत

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सावन पुत्रदा एकादशी 2018

साल में दो बार पुत्रदा एकादशी मनाई जाती है एक पौष शुक्ल पक्ष में और दूसरी सावन के शुक्ल पक्ष की एकादशी को। सावन के शुक्ल पक्ष की एकादशी को सावन पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। माना जाता है, पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रदा एकादशी व्रत करना चाहिए।

अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, सावन पुत्रदा एकादशी जुलाई या अगस्त के महीने में आती है। पौष की पुत्रदा एकादशी को उत्तरी भारत के प्रदेशों में बड़े स्तर पर मनाया जाता है जबकि सावन की पुत्रदा एकादशी अन्य प्रदेशों में मानी जाती है। वैष्णव समुदाय, इस एकादशी को पवित्रोपना एकादशी या पवित्र एकादश के नाम से जानते हैं।


श्रावण पुत्रदा एकादशी 2018 कब है?

2018 में सावन पुत्रदा एकादशी 22 अगस्त 2018, बुधवार को है। 

23 अगस्त को व्रत खोलने का समय = 05:58 से 08:32 तक। 

व्रत पारण के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय 10:15 बजे है। 

एकादशी तिथि का प्रारंभ = 21 अगस्त 2018 को 05:16 बजे।
एकादशी तिथि समाप्त = 22 अगस्त 2018 को 17:40 बजे।


सावन पुत्रदा एकादश व्रत के फायदे

हिन्दू धर्म में बहुत से महत्वपूर्ण संस्कार किये जाते है, जिनमें से कुछ संस्कारों में पुत्र का होना बहुत जरुरी होता है। इसलिए प्रत्येक शादीशुदा दंपत्ति पुत्र संतान की इच्छा रखते हैं। परन्तु बहुत से कारणों की वजह से कुछ दम्पतियों को पुत्र रत्न की प्राप्ति नहीं होती जिसके कारण वे बहुत परेशान रहते हैं।

ऐसे ही स्थितियों में सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत करना लाभकारी माना जाता है। पुत्र सुख की प्राप्ति के लिए पुत्र एकादशी का व्रत रखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार जो दम्पत्ति पुत्र प्राप्ति की इच्छा रखते हैं उन्हें साल में दोनों बार पुत्रदा एकादशी का व्रत करना चाहिए। इसके अलावा निःसंतान दंपत्ति भी सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत रखते संतान सुख प्राप्त कर सकते हैं। कहा जाता है इस व्रत को रखने से वंश में वृद्धि होती है और मृत्यु के पश्चात् व्यक्ति को स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

सावन पुत्रदा एकादशी व्रत-विधि

शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत से पूर्व यानी दशमी तिथि को दिन में केवल 1 बार भोजन करना चाहिए और रात्रि में कुछ भी नहीं खाना चाहिए।

पूजन के लिए प्रातःकाल जल्दी जागकर स्नानादि करके साफ़ वस्त्र पहन कर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने घी का दीपक जलाएं। पूजन सामग्री में तुलसी, तिल और ऋतू फल का प्रयोग करें। एकादशी के पुरे दिन उपवास रखें और कुछ न खाएं।

शाम के समय पूजन के बाद आप चाहे तो फल ग्रहण कर सकते हैं। इसके अलावा एकादशी के दिन चावल खाने से भी परहेज करना चाहिए। एकादशी के दिन रात्रि जागरण का बहुत खास महत्व होता है। अगर संभव हो तो रातभर जागकर विष्णु जी का कीर्तन करना चाहिए। एकादशी के अगले दिन द्वादशी तिथि को हरी वासर समाप्त होने के बाद सावन पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण कर सकते हैं।