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सावन शिवरात्रि व्रत पूजा विधि और व्रत फायदे

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सावन शिवरात्रि 2018 कब है

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ग्रंथों में सावन महीने को बहुत पवित्र और शुभ माना जाता है। सावन का महीना महादेव को समर्पित है इसलिए इस महीने भक्त भगवान् शिव की आराधना करते है और व्रत भी रखते है। भगवान् शिव को महादेव के अलावा महेश्वर, नीलकंठ, रूद्र, नरेश और अन्य नामों से भी जाना जाता है।  कहा जाता है जो मनुष्य सावन के पुरे महीने पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव की आराधना करते हैं शिव जी उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

सावन में भोले की पूजा

Sawan Puja – महादेव हिन्दू धर्म के त्रिदेवों में से एक है। जिन्हे पुरे हिन्दू धर्म में बड़ी श्रद्धा के साथ पूजा जाता है। सावन के महीने में भक्त 16 सोमवार व्रत और सोमवार व्रत और सावन की शिवरात्रि का व्रत रखते है। माना जाता है सावन के दौरान शिव जी का व्रत रखने से कुंवारी कन्यायों को उनका वर और कुवारें लड़कों को उनकी वधु जल्दी मिल जाती है। इसलिए भी लोग इस व्रत को बड़े शौक से रखते हैं।

सावन शिवरात्रि 2018

यूँ तो साल के १२ महीने शिवरात्रि मनाई जाती है लेकिन सभी में 2 शिवरात्रि का बड़ा खास महत्व होता है 1. महाशिवरात्रि और 2. सावन की शिवरात्रि। 2018 में महाशिवरात्रि जा चुकी है और अब सावन की शिवरात्रि आने वाली है। पुराणों के अनुसार शिवरात्रि वाले दिन मनुष्य के सभी पाप क्षमा हो जाते है और उनके वैवाहिक जीवन में सुख शांति आती है (अगर व्रत विवाहिता रख रही है)। Shivratri puja 2018


सावन शिवरात्रि निशीथ काल पूजा मुहूर्त

2018 में सावन की शिवरात्रि 09 अगस्त 2018, गुरुवार को है।

सावन शिवरात्रि में निशीथ काल की पूजा का समय – 24:05 से 24:49
व्रत पारण का समय – 05:52 से 15:44 (10 अगस्त 2018)

चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ – 22:45 (9 अगस्त 2018)
चतुर्दशी तिथि का समापन – 19:07 (10 अगस्त 2018)


शिवरात्रि में अभिषेक 

बिना अभिषेक के शिवपूजन अधूरा माना जाता है इसलिए महाशिवरात्रि या सोमवार का व्रत अभिषेक का अलग ही महत्व होता है। बिना अभिषेक के पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती। इसलिए तो सावन की शिवरात्रि में भी भक्तगण अपनी-अपनी श्रद्धानुसार शिव जी का अभिषेक करते हैं। यह अभिषेक – जल, दूध, पंचामृत या रुद्राभिषेक के रूप में किया जा सकता है। माना जाता है अभिषेक करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

ज्योतिष में सावन शिवरात्रि का महत्व

ज्योतिषीय दृष्टि के अनुसार सावन का महीना सूर्य के सिंह राशि में प्रवेश करने के साथ प्रारंभ होता है। इसीलिए इस महीने में भगवान शिव का पूजन करना और भी अधिक प्रभावशाली माना जाता है।

सावन शिवरात्रि के फायदे

  • कुंवारी कन्यायें इस दिन व्रत रखती है और मनचाहा पति पाने की प्रार्थना करती हैं। विवाहित स्त्रियां इस व्रत को अपने सुहाग के कुशल जीवन और लंबी आयु के लिए रखती हैं।
  • अच्छे मन से पूजन और व्रत करने से पापो का नाश होता है।
  • व्रत रखने से मन को शांति और सुकून भी मिलता है।
  • गरीब किसान बारिश की चाह में भगवान् शिव से वर्षा कराने का आग्रह करते हैं।
  • इस व्रत को रखने से घर में शांति आती है और घर की खराब स्थितियां सुधर जाती हैं।
  • कालसर्प दोष से छुटकारा पाने के लिए इस दिन विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। जो ब्रह्म मुहूतय में की जाट है।