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शादी से पूर्व कुंडली मिलान क्यों करना चाहिए?

विवाह में कुंडली और गुण मिलान

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शास्त्रों में मनुष्य के जीवन में सोलह संस्कार बहुत महत्वपूर्ण बताए गए हैं। जिनमे से सबसे महत्वपूर्ण संस्कार विवाह संस्कार है। शादी को मनुष्य का नया जीवन भी कहा जाता है क्यूंकि विवाह के पश्चात् वर-वधू के साथ-साथ दोनों परिवारों में भी बदलाव आ जाते हैं। इसीलिए विवाह के समय प्रत्येक को करने से पूर्व खास सावधानियां रखी जाती हैं।

विवाह से पूर्व कुंडली मिलान

शादी के बाद वर-वधू का जीवन सुखी बना रहे इसीलिए विवाह से पूर्व लड़के और लड़की की कुंडली का मिलान किया जाता है। किसी ज्योतिषाचार्य की मदद से होने वाली दम्पति की कुंडलियों के गुण और दोष मिलाए जाते हैं। और यह भी देखा जाता है की भविष्य में उनका जीवन कैसा रहेगा? सब कुछ जांचने परखने के बाद ही निश्चय किया जाता है की दोनों का विवाह होगा या नहीं?

शादी से पहले कुंडली मिलान करना जरुरी क्यों है?

विवाह से पूर्व कुंडली मिलान इसलिए भी जरुरी होता है की दोनों के ग्रह, आचार-विचार और गुण मिलाकर देखा जा सके की भविष्य में यह जोड़ी सफल होगी या नहीं? कुंडली मिलान करके दोनों के भविष्य की संभावित जानकारी मिल जाती है। इसलिए विवाह से पूर्व कुंडली मिलान करना बहुत जरुरी होता है।

कुंडली मिलान कैसे किया जाता है?

विवाह से पूर्व कुंडली मिलान करने के लिए वर-वधू की कुंडली में नक्षत्र मेलापक की निम्न आठ बातों का विचार किया जाता है। जिसमे प्रत्येक विचार का अंक होता है। एक से लेकर आठ विचारों में सभी का अंक भी 1 से आठ होता है।

वर्ण विचार

वर्ण विचार का अंक 1 होता है। कुंडली मिलान करते समय वर्ण विचार लड़का-लड़की की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। अगर दोनों का वर्ण समान है तो वर-वधू की कार्यक्षमता अच्छी रहती है। जबकि अलग-अलग होने पर यह विवाह में परेशानियां लाती है। समान होने पर एक अंक मिलता है जो शुभ होता है जबकि शून्य अंक होने पर कार्यक्षमता अच्छी नहीं होती।

वश्य विचार

वश्य विचार के अंक 2 होते हैं। कुंडली मिलान करते समय वश्य विचार संतान के लिए किया जाता है। वर-वधू की कुंडली मिलान में वश्य के अंक अच्छे होने पर उनकी संतान सुंदर, सुशील, आज्ञाकारी और भाग्यशाली होती है। जबकि अंक शून्य होने पर संतान होने में बाधाएं आएंगी या संतान का व्यवहार अलग हो सकता है।

तारा विचार

तारा विचार के अंक 3 होते हैं। कुंडली मिलान के समय तारा विचार भाग्य के लिए किया जाता है। कुंडली में तारा के अंक अच्छे हो तो विवाह के पश्चात् दोनों के भाग्य में वृद्धि होगी। अगर तारा के अंक शून्य होंगे तो शादी के बाद दोनों का भाग्य साथ नहीं देगा जिसकी वजह से प्रगति में बाधाएं आ सकती हैं।

योनी विचार

योनी विचार के अंक 4 होते हैं। कुंडली मिलान करते समय योनी विचार दोनों की मानसिकता और व्यवहार के लिए किया जाता है। वर-वधू की कुंडली मिलाते समय योनी के अंक बेहतर हो तो विवाह के बाद दोनों की मानसिकता और व्यवहार मिलते हैं। जबकि अंक शून्य होने पर तनाव बना रहता है और पारिवारिक झगड़े भी होते रहते हैं।

मैत्री विचार

मैत्री विचार के अंक 5 होते हैं। लड़का-लड़की की कुंडली मिलाते समय मैत्री विचार परस्पर सामंजस्य (Mutual Understanding) के लिए किया। कुंडली में मैत्री के अंक अच्छे होने पर दोनों में सामंजस्य बना रहता है और पारिवारिक उन्नति होती है। मैत्री के अंक शून्य होने पर पारिवारिक प्रगति में बाधाएं आती हैं और आपस में प्रेम नहीं रहता।

गण विचार

गण विचार के अंक 6 होते हैं। लड़का-लड़की की कुंडली मिलाते समय गण विचार दोनों के स्वभाव गुण के लिए किया जाता है। कुंडली मिलान में गण के अंक अच्छे होने पर दोनों का स्वभाव आपस में मेल खता है और सम्पत्ति में वृद्धि होती है। गण के अंक शून्य होने पर बनी-बनाई सम्पत्ति का भी नाश हो सकता है।

भकूट विचार

भकूट के अंक 7 होते हैं। कुंडली मिलाते समय भकूट विचार आपसी प्रेम के लिए किया जाता है। वर-वधू की कुंडली मिलान के समय भकूट के अंक अच्छे होने पर आपस में प्रेम बना रहता है और दोनों एक दूसरे को पूरा सपोर्ट करते हैं। जबकि शून्य अंक होने पर वर-वधू के बीच लड़ाइयां, द्वेष, ईर्ष्या आदि भावना बनी रहती है। और प्रेम नहीं होता।

नाड़ी विचार

नाड़ी विचार के अंक 8 होते हैं। नाड़ी विचार वर-वधू के स्वास्थ्य को जानने के लिए किया जाता है। कुंडली मिलान के समय नाड़ी के सनक बेहतर होने पर दोनों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है। अगर दोनों की नाड़ी एक है तो अंक शून्य होते हैं। नाड़ी एक होने पर दोनों का ब्लड ग्रुप एक होने की संभावना भी रहती है। जिसके कारण संतान से संबंधित समस्याएं आ सकती हैं और दोनों का स्वास्थ्य भी खराब रहने की संभावनाएं बनी रहती है।

कुंडली मिलान के बाद गुणों का विचार

इन सभी गुणों पर विचार करने के बाद देखा जाता है की 36 गुणों में से कितने गुण मिल रहे हैं? गुण मिलान की सम्पूर्ण जानकारी के लिए इस तालिका को देखें।

क्रमांक
वर-वधू की कुंडली मिलान के बाद मिलें गुणों की संख्या
भावी परिणाम
1. 36 गुणों में से 18 या इससे कम गुण मिलने पर इस स्थिति में विवाह होने पर रिश्ता असफल होने की संभावनाएं ज्यादा होती हैं।
2. 36 गुणों में से 18 से 24 गुण मिलने पर इस स्थिति में विवाह हुआ तो सफल तो हो सकती हैं पर इसमें कई बाधाएं आ सकती हैं।
3. 36 गुणों में से 25 से 32 गुण मिलने पर ऐसे कुंडलियों के मिलने पर सफल वैवाहिक जीवन के संकेत मिलते हैं।
4. 36 गुणों में से 32 से 36 गुण मिलने पर विवाह के लिए सर्वोत्तम चयन। इस तरह के विवाह में समस्याएं नहीं होती और अगर हो भी तो यह रिश्ते पर बुरा असर नहीं डालती।

(एक मान्यता के अनुसार भगवान् श्री राम और माता सीता की कुंडली के भी पुरे 36 गुण मिले थे, उनका जीवन कष्टों में बिता। अतः कुछ लोग पुरे 36 गुण मिलने की स्थिति को भी शुभ नहीं मानते।)

अब आप अच्छी तरह जान गए होंगे की विवाह से पूर्व कुंडली मिलान क्यों किया जाता है और कुंडली मिलान कैसे करते हैं? और गलत कुंडली मिलान का वर-वधू के जीवन पर कैसा असर पड़ सकता है। कुंडली मिलान के लिए, आप शुभतिथि डॉट कॉम पर भी संपर्क कर सकते हैं।