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शनि की ढैय्या क्या होती है? इसके क्या उपाय होते हैं

शनि की ढैय्या क्या होती है

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यदि किसी व्यक्ति पर शनि की ढैय्या का प्रभाव होता है, तो इससे उसके जीवन पर प्रभाव जरूर पड़ता है। शनि की ढैय्या का प्रभाव बुरा होगा या फिर अच्छा यह पूरी तरह से व्यक्ति की कुंडली पर निर्भर करता है। इसीलिए कहा जाता है की शनि को हमेशा प्रसन्न रखना चाहिए क्योंकि जब शनि खुश होते हैं तो किसी को राजा बना सकते हैं वहीँ यदि गृह का प्रभाव उल्टा हो जाये तो बहुत सी परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। तो लीजिये आज हम आपको शनि की ढैय्या क्या होती है और इसके प्रभाव से बचने के लिए कुछ उपाय बताने जा रहे हैं जो आपको शनि की कृपा पाने में मदद करते हैं।

शनि की ढैय्या क्या होती है

जब शनिदेव चंद्र कुंडली यानी की जन्म राशि के अनुसार चौथे अथवा आठवें भाव में गोचर करता है तब शनि की ढ़ैय्या की शुरुआत होती है। ढ़ैय्या का मतलब होता है ढ़ाई साल का समय, और जन्म कुंडली को अच्छी तरह से जानने के बाद ही शनि की ढैय्या का प्रभाव पता चलता है की यह जातक पर अच्छी है या बुरी। और ऐसा कहा जाता है की शनि हर राशि में ढाई साल तक ही रहता है, लेकिन इनके प्रभाव अलग अलग होते हैं। जैसे की यदि कोई व्यक्ति अच्छे काम कर्म जैसे की दान पुण्य, लोगो की भलाई करता है तो ऐसा करने से शनि का प्रभाव बेहतर पड़ता है। जबकि जो लोग बुरे काम करते हैं उन पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है और लोगो को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

शनि की ढैय्या के बुरे प्रभाव से बचने के उपाय

शनि की ढैय्या यदि किसी जातक पर होती है तो कुछ आसान उपाय का इस्तेमाल करके जातक इस परेशानी से निजात भी पा सकता है। तो लीजिये अब जानते हैं की शनि की ढैय्या से बचाव के लिए आप कौन से टिप्स का इस्तेमाल कर सकते है।

शनि से सम्बंधित वस्तुओं का दान करें

शनि की कृपा को पाने के लिए शनि से सम्बंधित वस्तुएं जैसे की काले तिल, सरसों का तेल, कस्तूरी, काले जूट, काली मसूर, लोहा, काला कपडा आदि का दान करना चाहिए। खासकर शनिवार के दिन इन सब चीजों का दान करने से बहुत फायदा मिलता है।

सुंदरकांड का पाठ

मंगलवार और शनिवार के दिन सुंदरकांड का पाठ करने से और उसके बाद हनुमान चालीसा और श्री हनुमाष्टक को पड़ने से भी आपको शनि की ढैय्या के दुष्प्रभाव से बचने में मदद मिलती है।

हनुमान चालीसा

शनि को प्रसन्न करने के लिए नियमित आपको हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से भी शनि देव को प्रसन्न करने में मदद मिलती है।

काले घोड़े की नाल की अंगूठी

काले घोड़े की नाल से बनी हुई अंगूठी को धारण करने से भी शनि की कृपा को पाने में मदद मिलती है। इस अंगूठी को दाएं हाथ की मध्यमा ऊँगली में शनिवार के दिन सुबह शनि मंत्र की 108 बार स्तुति करें और उसके बाद इसे ऊँगली में धारण करें। और एक बात का खास ध्यान रखना चाहिए की अंगूठी को शुक्रवार रात को सरसों के तेल में डुबोकर रख देना चाहिए। और सुबह अंगूठी धारण करने के बाद उस तेल की ज्योत जला कर खत्म कर देना चाहिए और थोड़ा सा भी तेल नहीं बचाना चाहिए।

तेल का उपाय

शनिवार के दिन शनि की प्रतिमा पर तेल चढ़ाना चाहिए, साथ ही डाकोत को भी तेल का दान करना चाहिए, और तेल की ज्योत जलानी चाहिए। पूजा के लिए और चढाने के लिए सरसों के तेल का इस्तेमाल ही करें। साथ ही शनि की कृपा के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

अच्छे काम

शनि को प्रसन्न करने के लिए अच्छा व्यवहार करना चाहिए, बुरा नहीं सोचना चाहिए, किसी का बुरा नहीं करना चाहिए, दान पुण्य करना चाहिए, चुगली नहीं करनी चाहिए, गरीबो की मदद करनी चाहिए, जरुरतमंद को सहारा देना चाहिए, आदि। ऐसा माना जाता है की अच्छे काम करने से शनि देव प्रसन्न होते है और उनकी कृपा जातक पर होती है।

तो यह हैं शनि की ढैय्या से जुडी कुछ बातें, और उससे बचने के कुछ खास उपाय, शनि की ढैय्या राशि के अनुसार भी होती है ऐसे में आप पंडित से पूछकर अपनी राशि के अनुसार कौन से उपाय सही है उन्हें कर सकते हैं। ताकि आपको शनि की कृपा पाने और उसके दुष्प्रभाव से बचने में मदद मिल सके।