श्राद्ध 2019 कब से शुरू है और कब से कब तक है

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श्राद्ध क्या होता है

शिशु के जन्म से लेकर मृत्यु के प्राप्त होने तक बहुत से संस्कार किये जाते हैं। और अंत्येष्टि को अंतिम संस्कार माना जाता है। लेकिन अंत्येष्टि के बाद भी कुछ ऐसे काम होते हैं कर्म होते हैं जो मृतक से सम्बंधित खासकर मृतक की संतान को करना होता है। श्राद्ध कर्म उन्हीं में से एक है जो व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी संतान को करना होता है। वैसे तो हर महीने की अमावस्या के दिन श्राद्ध कर्म किया जा सकता है परन्तु भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक श्राद्ध कर्म करने का विधान है। इसी कारण अपने पूर्वज़ों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के इस पर्व को श्राद्ध कहा जाता है।

इसके अलावा श्राद्ध को लेकर और भी बहुत सी बाते मानी जाती है जैसे की यदि मरे हुए व्यक्ति का तर्पण यदि सही ढंग से नहीं किया जाता है तो इसके कारण उसकी आत्मा मृत्यु लोक में ही भटकती रहती है। साथ ही कई बार व्यक्ति को तरक्की न मिल रही हो, काम बनते बनते रह जाता हो, संतान न होने की समस्या हो, तो इसका कारण भी पितृ दोष हो सकता है। और ऐसे में ज्योतिष और पंडित भी पितरो की शांति के लिए श्राद्ध अच्छे से करने और अन्य उपाय भी बता सकते हैं। यह हर साल आते हैं, और इन दिनों में दान धर्म का बहुत महत्व होता है, ऐसे में व्यक्ति को इन दिनों में अच्छे कर्म जरूर करने चाहिए ताकि उन्हें पितृ दोष से मुक्त रहने में मदद मिल सके।

किस दिन करें पूर्वज़ों का श्राद्ध

पूर्वज़ों का श्राद्ध करने के लिए जिस पूर्वज़, पितर या परिवार के मृत सदस्य के मृत्यु की तिथि याद हो तो पितृ पक्ष में पड़ने वाली उसी दिनांक को ही उनका श्राद्ध करना सबसे उत्तम माना जाता है। लेकिन यदि आपको मृत्यु तिथि याद न हो तो आश्विन अमावस्या को श्राद्ध किया जा सकता है इसीलिए इस अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या भी कहा जाता है। इसके अलावा जिन लोगो की समय से पहले यानि जिन परिजनों की किसी दुर्घटना या सुसाइड आदि के कारण अकाल मृत्यु हुई हो तो उनका श्राद्ध चतुर्दशी तिथि को किया जा सकता है। पिता के लिए अष्टमी तो माता के लिए नवमी की तिथि को श्राद्ध करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। इसके अलावा किस दिन श्राद्ध करना चाहिए इसके लिए आप एक बार अपने पंडित से भी राया ले सकते है।

2019 में श्राद्ध की तिथि

  • श्राद्ध तिथि: 13 से 28 सितंबर
  • पूर्णिमा श्राद्ध: 13 सितंबर 2019
  • सर्वपितृ अमावस्या: 28 सितंबर 2019

तो यह है 2019 में श्राद्ध कब से कब तक है, और श्राद्ध से जुडी कुछ बातें, ऐसे में अपने बड़ो के प्रति अपने प्यार को समर्पित करने के लिए और उनकी आत्मा की शांति के लिए पूरे विधि विधान के साथ इस कर्म को करना चाहिए।