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अगस्त 2021 में पूर्णिमा कब है? तिथि और मुहूर्त

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सालभर में बारह पूर्णिमा आती है और हर एक पूर्णिमा का अपने एक अलग महत्व होता है। वैसे ही अगस्त माह में श्रावण माह होगा इसीलिए अगस्त माह में आने वाली पूर्णिमा को श्रावण पूर्णिमा कहा जाता है साथ ही इसे श्रावणी पूर्णिमा भी कहा जाता है। श्रावण पूर्णिमा बहुत ही खास होती है क्योंकि इस दिन भाई बहन के प्यार का प्रतिक रक्षाबंधन यानी राखी का त्यौहार मनाया जाता है।

इसके अलावा धार्मिक ग्रंथों में भी श्रावण पूर्णिमा के दिन को बहुत ही खास बताया गया है और इस दिन का महत्व बताया गया है इसीलिए इस दिन दान, धर्म के काम, स्नान, तप आदि का भी बहुत महत्व होता है। साथ ही जिन लोगो की कुंडली में चन्द्रमा कमजोर होता है या चंद्र दोष होता है उन लोगो के लिए श्रावण पूर्णिमा को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इस दिन वह इस दोष को दूर कर सकते हैं। तो आइये अब साल 2021 में श्रावण पूर्णिमा यानी अगस्त माह की पूर्णिमा तिथि और शुभ मुहूर्त के बारे में बताते हैं।

2021 अगस्त पूर्णिमा यानी श्रावण पूर्णिमा की तिथि व् मुहूर्त

श्रावण पूर्णिमा तिथि शुरुआत: अगस्त 21, 2021 दिन शनिवार को 19:02:22 से आरम्भ होकर

श्रावण पूर्णिमा तिथि समापन: अगस्त 22, 2021 दिन रविवार को 17:33:39 पर पूर्णिमा का समापन होगा।

पूर्णिमा पर किये जाने वाले धार्मिक कर्म

  • श्रावण पूर्णिमा के दिन पितरों के नाम पर दान धर्म करना, किसी गरीब को भोजन करवाना, जरुरत मंद की मदद करना अच्छा माना जाता है।
  • श्रावण पूर्णिमा के दिन चाँद की पूजा करने से  चंद्र दोष से मुक्ति पाने में मदद मिलती है इसीलिए जिन लोगो की कुंडली में चंद्र दोष होता है उन्हें इस दिन चन्द्रमा की पूजा जरूर करनी चाहिए।
  • गाय को चारा डालना, चीटियों व् मछलियों को आटा डालना जैसे पुण्य काम भी जरूर करने चाहिए।
  • श्रावण पूर्णिमा के दिन भगवान् विष्णु व् लक्ष्मी की पूजा अर्चना करने का भी बहुत महत्व है इसीलिए इस दिन विष्णु लक्ष्मी की पूजा भी करनी चाहिए।
  • सावन का महीना भोलेबाबा को समर्पित होता है ऐसे में इस दिन भगवान् शिव की पूजा आराधना का भी बहुत अधिक महत्व होता है इसीलिए श्रावण माह में आने वाली पूर्णिमा को भगवान् शिव की पूजा अर्चना करके उन पर जल अर्पण करना चाहिए साथ ही उनका अभिषेक भी करना चाहिए।

श्रावणी पूर्णिमा का महत्व

श्रावण पूर्णिमा का अलग अलग जगह पर अलग अलग महत्व होता है। जैसे की भारत के उत्तरी हिस्से में जहां जहां इस दिन रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया जाता है जो भाई बहन के अटूट प्रेम का प्रतिक होता है। वहीं दक्षिण भारत में इस दिन नारियली पूर्णिमा और अवनी अवित्तम मनाई जाती है। इसके अलावा मध्य भारत में भी इसे कजरी पूनम के रूप में मनाया जाता है।

ध्यान रखें की यदि आप यदि आप भी चंद्र दोष से मुक्ति पाना चाहते हैं तो आपको भी इस दिन चाँद की पूजा पूरे भक्ति भाव से करनी चाहिए इसके अलावा इस दिन बुराइयों से दूर रहना चाहिए और जितना हो सके धर्म कर्म के काम करने चाहिए। ताकि आपको इस दोष का जल्दी से जल्दी निवारण करने में मदद मिल सके।

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