सोलह सोमवार का उद्यापन ऐसे करें

0

सोलह सोमवार का व्रत

सोलह सोमवार का व्रत भोलेबाबा को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है, इसमें भोलेबाबा, पार्वती माता , गणेश जी, कार्तिकेय, नंदी की पूजा आराधना की जाती है। इस व्रत को बच्चे, बूढ़े, स्त्री, पुरुष, आदि कोई भी कर सकता है। खासकर कुँवारी लड़कियों के लिए यह व्रत बहुत ही फलदायी होता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है की यदि कुँवारी कन्याएं इस व्रत को रखती हैं तो इससे उन्हें मनचाहा वर मिलता है। इसके अलावा और कोई भी व्यक्ति इस व्रत को पूरी श्रद्धा विश्वास से रखता है तो उसे मनोवांछित फल मिलता है।

सोलह सोमवार का व्रत शुक्ल पक्ष के किसी भी सोमवार को शुरू किया जा सकता है। इस व्रत को करने के लिए व्रती को सोमवार को सुबह समय से उठकर नित्य क्रियाक्रम करने के बाद नहाना व् सिर धोना चाहिए। नहाने के पानी में गंगाजल, काले तिल आदि मिलाकर नहाना शुभ होता है। उसके बाद साफ़ कपडे धारण करके शिवलिंग को जल अर्पित करना चाहिए, बेलपत्र, फल, फूल, धूप, दीप दिखाना चाहिए। आटे का बना प्रसाद चढ़ाना चाहिए, कथा करनी चाहिए, ॐ नमः शिवाय मन्त्र का उच्चारण करना चाहिए। दिन में एक बार भोजन या फलाहार का सेवन किया जा सकता है। सोलह सोमवार तक इस व्रत को करने के बाद सत्रहवें सोमवार को व्रत का उद्यापन करना चाहिए।

सोलह सोमवार का उद्यापन करने की विधि

सोलह सोमवार विधि पूर्वक व्रत करने के बाद विधि अनुसार उद्यापन भी करना चाहिए। क्योंकि बिना उद्यापन के व्रत का फल नहीं मिलता है, और सत्रहवें सोमवार को भी जब तक उद्यापन न हो तब तक भी व्रत करना चाहिए, इसके अलावा सोलह सोमवार लगातार ही करने चाहिए कोई भी व्रत छोड़ना नहीं चाहिए। तो आइये अब विस्तार से जानते हैं की सोलह सोमवार के व्रत का उद्यापन कैसे करते हैं।

  • उद्यापन के दिन सबसे पहले सूर्योदय से पहले उठकर नित्य क्रियाक्रम करके स्नानादि करने के बाद साफ़ वस्त्र धारण करना चाहिए, सफ़ेद रंग के वस्त्रों को पहनना इस दिन शुभ माना जाता है।
  • व्रत का उद्यापन करने के लिए आप किसी पंडित द्वारा हवन भी करवा सकते हैं, या अपने आप भी नियमानुसार उद्यापन कर सकते हैं।
  • व्रत के लिए जरुरी सामग्री को इकठ्ठा करने के बाद प्रसाद बनाएं।
  • प्रसाद में सवा किलो आटा भूनकर उसमे भूरा या चीनी मिलाएं, और एक फल जैसे की केले को टुकड़ो में काटकर मिलाएं।
  • अब इसे तीन हिस्सों में बराबर बाँट लें, एक हिस्सा मंदिर के लिए, एक हिस्सा प्रसाद वितरण के लिए, और एक हिस्सा प्रसाद के रूप में आप ग्रहण करें।
  • अब मंदिर में जाकर या घर में ही शिवलिंग है तो उद्यापन की शुरुआत करें।
  • सबसे पहले दूध, दही, शहद, घी, जल का पंचामृत बनाएं, उसके बाद शिवलिंग को इससे स्नान करवाएं, साथ ही गणेश जी, कार्तिकेय, नंदी, पार्वती माता को भी जल अर्पित करें।
  • उसके बाद बिल्व पत्र, सफ़ेद फूलों की माला, फल, फूल आदि चढ़ाएं। माता पार्वती पर भी सुहाग का सामान चढ़ाएं, गणेश जी को भी फल फूल अर्पित करें, ऐसे ही कार्तिकेय और नंदी जी पर भी जल आदि अर्पित करें।
  • चन्दन, कुमकुम का तिलक लगाएं, उसके बाद कथा करें।
  • कथा करने के बाद धूप, दीप, अगरबत्ती जलाकर आरती करें, और हाथ जोड़कर भोलेबाबा से प्राथना करें।
  • पंडित को दक्षिणा व् प्रसाद दें आप चाहे तो ब्राह्मणो को भोजन भी करवा सकती है, एक हिस्सा प्रसाद का सभी म वितरित कर दें, और एक हिस्सा अपने आप प्रसाद के रूप में ग्रहण करें। आप चाहे तो व्रत विधि व् उद्यापन विधि के बारे में एक बार पंडित से भी राय ले सकते हैं।

तो यह हैं सोलह सोमवार व्रत उद्यापन की विधि, यदि आपने भी सोलह सोमवार के व्रत किये हैं तो उद्यापन विधि के लिए आप ऊपर दिए गए टिप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।