भंडार गृह के वास्तु नियम, किस दिशा में बनवाएं घर का अन्न भंडार गृह?

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भंडार गृह के वास्तु नियम

मान्यताओं के अनुसार, घर का हरेक कोना वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार बनवाना चाहिए। सब कुछ संभव ना हो तो कुछ चीजे खासतौर पर वास्तु नियम के अनुसार ही बनवानी चाहिए। घर का भंडार गृह भी उन्ही में से एक है। घर में भंडार गृह बनवाने के दो कारण होते हैं – एक पुरे साल के लिए अनाज भण्डारण करना और दुसरा अनुपयुक्त व् अतिरिक्त सामान का भण्डारण करना।

अगर जगह बड़ी है तो दोनों ही चीजों के लिए अलग-अलग भंडार गृह का निर्माण करना चाहिए। और यदि स्थानाभाव है तो एक ही भंडार गृह में दोनों काम किये जा सकते हैं। यहाँ हम दोनों के लिए अलग-अलग कक्ष के बारे में बता रहे हैं। अन्न भंडार गृह के वास्तु नियम और अतिरिक्त सामान के भंडार गृह के वास्तु नियम।

अन्न के भंडार गृह के वास्तु नियम

  • वायव्य कोण में बनाए गए अन्नादि-भंडार गृह में अन्न की कभी कमी नहीं होती।
  • अन्न के भंडार गृह में सामान रखने के लिए स्लैब दक्षिणी अथवा पश्चिमी दीवार पर बनवानी चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर इसे चारो दीवारों पर भी बनाया जा सकता है। लेकिन पूर्वी और उत्तरी दीवार पर बनाई गई स्लैब की चौड़ाई दक्षिणी एवं पश्चिमी दीवार पर बनाई गयी स्लैब से कम होनी चाहिए और इनपर हल्का सामान रखें।
  • ज्यादा जगह नहीं होने पर अन्नादि के भंडार गृह में डाइनिंग टेबल रखी जा सकती है, लेकिन यह डाइनिंग टेबल कक्ष के पश्चिमी भाग में और रसोईघर की पश्चिमी दिशा में होनी चाहिए।
  • अन्न के भंडार गृह में रखे डिब्बे, कनस्तर आदि को खाली नहीं रहने दें। खाली होने की स्थिति में उनमे कुछ दाने अवश्य छोड़ दें।
  • रोजाना इस्तेमाल होने वाले अन्न को कक्ष के उत्तर-पश्चिमी भाग में रखें।
  • अन्न के भंडार गृह का निर्माण भवन की उत्तर दिशा या वायव्य कोण में कराना चाहिए।
  • भंडार गृह में तेल, घी, मक्खन, मिट्टी तेल एवं गैस सिलिंडर आदि आग्नेय कोण में रखना चाहिए।
  • अन्न के भंडार गृह का द्वार नैऋत्य कोण के अतिरिक्त किसी दिशा में बनवाया जा सकता है।
  • अन्न का वार्षिक संग्रह दक्षिणी अथवा पश्चिमी दीवार के समीप होना चाहिए।
  • भंडार गृह के ईशान कोण में शुद्ध एवं पवित्र जल से भरा मिट्टी का कलश या तांबे का पात्र रखना चाहिए। ध्यान रहे, ये पात्र कभी खाली न रहे। अन्न के भंडार गृह में पूर्वी दीवार पर लक्ष्मी नारायण का चित्र लगवाना चाहिए।

अनुपयुक्त व् अतिरिक्त सामान के भंडार गृह वास्तु नियम

  • अनुपयोगी सामान के लिए भवन से बाहर चारदीवारी के निकट कबाड़घर बनाना चाहिए, लेकिन अगर कबाड़घर बना पाना संभव नहीं है और भंडार गृह में ही यह सामान रखना है तो इसके लिए कक्ष के नैऋत्य कोण का प्रयोग करना चाहिए।
  • इन सामान को रखने के लिए बनाये गए कक्ष में अन्न का संग्रह ना करें।
  • भारी बक्से, भारी सामान आदि दक्षिणी दीवार एवं पश्चिमी दीवार पर दक्षिण दिशा की ओर रखना चाहिए।
  • इस कक्ष का दरवाजा उत्तर एवं पूर्व दिशा में होना चाहिए, साथ ही एक खिड़की भी इन्ही दिशाओं में होनी चाहिए।
  • भंडार गृह भवन के अंदर दक्षिणी व् पश्चिमी भाग में बनवाना चाहिए।
  • पूर्व और उत्तर दिशा में हलके सामान रखने चाहिए।

संयुक्त भंडार गृह बनवाने के वास्तु सिद्धांत

  • संयुक्त भंडार गृह में कभी भी कबाड़ और उन चीजों को नहीं रखना चाहिए जिनका अब कोई प्रयोग नहीं हो।
  • इस कक्ष को भवन के पश्चिमी अथवा अत्तर पश्चिमी भाग में बनवाना चाहिए।
  • संयुक्त भंडार गृह में बाकि सामानों का भंडारण दक्षिणी एवं पश्चिमी दिवार की ओर करना चाहिए।
  • इस कक्ष में अन्न आदि का भंडारण वायव्य कोण में करना चाहिए।
  • संयुक्त भंडार गृह में पूर्व, उत्तर और पश्चिम दिशा अथवा इनके कोणों में कोई एक खिड़की अवश्य बनवानी चाहिए।
  • संयुक्त भंडार गृह का द्वार नैऋत्य कोण के अलावा किसी भी स्थान पर बना सकते हैं।
  • इस कक्ष के ईशान कोण में एक जल से भरा पात्र जरूर रखें।

तो ये कुछ खास वास्तु नियम हैं जिनके अनुसार ही घर में अन्न व् अनुपयुक्त समानों का भंडार गृह और संयुक्त भंडार गृह बनवाना चाहिए। माना जाता है ऐसा करने से घर में अन्न की कभी कमी नहीं होती और समृद्धि रहती है।