वास्तु के अनुसार पानी की टंकी कहाँ होनी चाहिए?

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घर में पानी से जुड़े कामों को करने के लिए और जरूरत के समय घर में पानी की कमी ना हो इसके लिए पानी की टंकी का प्रयोग किया जाता है। घर में पानी की टंकी जल संग्रहित करने के लिए लगाई जाती है। पर वास्तु शास्त्र में पानी का टैंक लगवाने के भी नियम बताए गए है।

पानी की टंकी के लिए वास्तु

वास्तु के अनुसार, घर में पानी का स्तोत्र व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करता है। गलत दिशा में पानी की टंकी लगाने से परिवार को समस्यायों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए टैंक हमेशा सही दिशा में लगवाना चाहिए। पानी का टैंक गलत दिशा में लगाने से संबंधित व्यक्ति को आर्थिक परेशानियां हो सकती है, उन्नति में बाधा आ सकती है या स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है। इनसे बचने के लिए पानी का टैंक लगवाते समय वास्तु का पूरा ध्यान रखना चाहिए।

पानी का टैंक

घर में दो प्रकार से पानी की टंकी लगाई जाती है एक भूमिगत टैंक और दूसरा ओवरहेड टैंक जो अक्सर घर की छत पर लगाई जाती है। दोनों प्रकार के टैंक के लिए वास्तु सिद्धांत अलग-अलग होते हैं।

भूमिगत पानी का टैंक

भूमिगत पानी के टैंक के लिए सामान्यतः वे ही वास्तु सिद्धांत उपयोगी होते हैं जोकि नलकूप के लिए इस्तेमाल किये जाते हैं। क्यूंकि भूमिगत पानी का टैंक एक तरह का जलस्तोत्र के रूप में काम करता है। भूमिगत टैंक के लिए भी गड्ढा खुदवाना होता है।

वास्तु के अनुसार भूमिगत टैंक ईशान कोण में होना चाहिए यानी भवन में जल ईशान कोण से ही आना चाहिए। अगर म्यूनसिपल कॉर्पोरेशन की वाटर लाइन का प्रयोग कर रहे हैं तो भी वाटर कनैक्शन भूखंड के ईशान कोण से ही आना चाहिए।

ओवरहेड पानी का टैंक

छत पर रखी जाने वाली टंकी को ओवरहेड पानी की टंकी कहते हैं। ओवरहेड पानी की टंकी से भवन की ऊंचाई प्रभावित होती है। अतः इसके लिए वास्तु सिद्धांत भूमिगत पानी की टंकी से भिन्न है।

ओवरहेड पानी टैंक के वास्तु नियम

पानी की टंकी को सही दिशा में रखने के लिए वास्तु नियम बनाए गए हैं। नीचे उन्ही के बारे में विस्तार से बताया गया है –

  • अगर किसी कारणवश विवश होकर ईशान कोण में पानी का टैंक लगाना हो तो, इससे अधिक ऊँचा वायव्य कोण में कोई निर्माण करा लेना चाहिए। वायव्य कोण से अधिक ऊंचा आग्नेय कोण में तथा आग्नेय कोण से अधिक ऊँचा नैऋत्य कोण में निर्माण अवश्य करवाना चाहिए। ऐसा करने से ईशान में टैंक के निर्माण का वास्तुदोष दूर हो जाएगा।
  • छत पर रखी जाने वाली ओवरहेड पानी का टैंक दक्षिण पश्चिम अथवा नैऋत्य कोण में बनाना चाहिए। नैऋत्य कोण को राक्षसों का स्थान माना गया है। अतः भारी वजन वाली चीजें उसी दिशा में स्थापित करनी चाहिए।
  • घर की छत पर पानी की टंकी ईशान में नहीं रखनी चाहिए। क्यूंकि ईशान किसी भी प्रकार की ऊंचाई या भार को सहन नहीं करती। ऐसा होने पर परिवार को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
  • अगर नलकूप एवं पानी की टंकी वास्तु के अनुसार उचित स्थान पर ना हो तो पूर्वी ईशान कोण अथवा उत्तरी ईशान कोण में एक छोटी भूमिगत टंकी बनवाकर पुरे भवन में वहां से पानी का इस्तेमाल करना चाहिए। इसे जल स्तोत्र का वास्तुदोष निवारण हो जाता है।

 ये कुछ वास्तु टिप्स हैं जिन्हे घर में पानी का टैंक बनाते समय रखना चाहिए। पानी के टैंक को लेकर सब कुछ वास्तु के नियमानुसार करना चाहिए, इससे घर में सकारात्मकता बनी रहती है।