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वीरवार व्रत का उद्यापन कब और कैसे करें?

वीरवार व्रत

वीरवार व्रत

वीरवार के व्रत में बृहस्पति देव और विष्णु भगवान दोनों की पूजा होती है। और भगवान विष्णु के साथ माँ लक्ष्मी की भी पूजा अर्चना की जाती है। इस दिन व्रत पूरे श्रद्धा भाव से व्रत रखने और पूरी आस्था से पूजा करने से जातक को मनचाहा फल मिलता है। जैसे की घर में सुख समृद्धि बनी रहती है, घर में खुशहाली और शांति बनी रहती है, शत्रु का भय नहीं रहता, काम में आ रही मुश्किलों को दूर होने में मदद मिलती है, शादी में आ रही रुकावटों को दूर होने में मदद मिलती है, कुंवारी लड़कियों को मनचाहा वर मिलता है, आदि। वीरवार का व्रत रखने पर केले के पेड़ की पूजा भी की जाती है, क्योंकि ऐसा माना जाता है की केले के पेड़ में भगवान विष्णु का निवास होता है।

वीरवार के दिन केले के पेड़ की पूजा की जाती है इसीलिए व्रत रखने वाले जातक को इस दिन केले का सेवन नहीं करना चाहिए। लेकिन केले को पूजा के लिए और प्रसाद वितरण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा पूजा के लिए चने की दाल, गुड़, पीला कपड़ा, हल्दी, केले, धूप, दीप, पीले फूल, चावल, आदि का इस्तेमाल किया जाता है।व्रत रखने पर जातक सुबह उठकर नहाने के बाद आसन पर पीला कपडा बिछाकर पूजा अर्चना व् कथा की जाती है। और उसके बाद शाम के समय व्यक्ति कोई पीली चीज का सेवन कर सकता है। लेकिन ध्यान रखें की व्रत में लिए जाने वाले आहार में नमक व् चटपटा शामिल नहीं होना चाहिए बल्कि मीठे आहार का सेवन करना चाहिए।

वीरवार व्रत उद्यापन कब करें?

वैसे तो अपनी इच्छा अनुसार कोई पांच, सोलह, इक्कीस वीरवार व्रत कर सकता है। लेकिन वीरवार के व्रत सोलह करने का सबसे अधिक महत्व होता है, सोलह सोमवार व्रत करने के बाद सतहरवें सोमवार को इस व्रत का उद्यापन किया जाता है। इस व्रत को महिला को मासिक धर्म होने पर नहीं करना चाहिए, बल्कि उस गुरूवार को छोड़कर अगले गुरूवार को व्रत करना चाहिए। क्योंकि मासिक धर्म होने पर पूजा करना सही नहीं माना जाता है, इसके अलावा आप जितने अपनी अपनी इच्छानुसार व्रत रखते हैं तो व्रत पूरे होने के बाद जो अगला वीरवार आता है उस दिन उद्यापन करना चाहिए, और जितना हो सके कृष्ण पक्ष में व्रत की शुरुआत और उद्यापन करने से बचना चाहिए। व्रत की शुरुआत और समापन दोनों ही शुक्ल पक्ष में करना सबसे शुभ माना जाता है।

वीरवार व्रत उद्यापन कैसे करें

  • वीरवार व्रत उद्यापन से एक दिन पहले चने की दाल, गुड़, हल्दी, केला, पपीता, पीला कपडा, आदि सब लाकर रख लेना चाहिए।
  • उसके बाद उद्यापन वाले दिन समय से उठकर नहाकर पीले कपडे पहने, और पूजा की तैयारी आरम्भ करें।
  • बृहस्पति यंत्र, भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी की पूजा की शुरुआत करें और पूजा के लिए केवल पीली चीजों का ही इस्तेमाल करें, और सबसे पहले पीले फूल अर्पण करें, तिलक लगाएं, धूप, दीप जलाएं, कथा करें।
  • केले के पेड़ की पूजा करें व् जल अर्पण करने के बाद दीप जलाएं, साथ ही केले के पेड़ की पूजा के लिए भी चने की दाल का इस्तेमाल किया जाता है, और जिस केले के पेड़ की पूजा आप करते हैं वह आपके घर के आँगन में नहीं होना चाहिए, बल्कि किसी आँगन से बाहर या मंदिर में जाकर केले के पेड़ की पूजा करनी चाहिए।
  • उसके बाद हाथ जोड़कर माफ़ी मांगे और भगवान से प्रार्थना करें जो भी आपकी इच्छा हो।
  • उसके बाद आरती करें, और भोग लगाएं और केले का भोग लगाना बहुत ही शुभ माना जाता है, और ऊपर पूजा के लिए लाये गए सामान केले, चने के दाल, पीला कपडा, आदि को दक्षिणा के साथ ब्राह्मण को दें।
  • गाय माता को भी चना और गुड़ खिलाना इस दिन बहुत शुभ माना जाता है।

वीरवार व्रत में इन बातों का रखें ध्यान

  • इस दिन बाल न की कटवाना चाहिए और न ही धोने चाहिए, बल्कि व्रत से एक रात पहले की बालों को धोकर सोएं।
  • बालों में तेल भी नहीं लगाना चाहिए।
  • कपडे नहीं धोने चाहिए।
  • नमक व् खट्टे आहार का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • खाने में पीली चीज का सेवन करना चाहिए और एक ही समय खाना खाना चाहिए।
  • व्रत रखने पर केले का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए।

तो यह है वीरवार व्रत का उद्यापन कब करना चाहिए और कैसे करना चाहिए इससे जुड़े कुछ टिप्स, तो यदि आप भी वीरवार का व्रत करती हैं या करना चाहती है। तो आपको इन टिप्स का ध्यान रखना चाहिए।