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विश्वकर्मा पूजा 2021 शुभ मुहूर्त पूजा की विधि आरती

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हर माह सितम्बर के महीने में कन्या संक्रांति पर विश्वकर्मा जयंती मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान विश्वकर्मा जी का जन्म हुआ था। साथ ही भगवान विश्वकर्मा को ही दुनिया का सबसे पहला इंजीनियर माना जाता है। पौराणिक कथाओं में कहा जाता है कि प्राचीनकाल की सभी राजधानियों का निर्माण भगवान विश्वकर्मा जी ने ही किया था। जिनमें स्वर्ग लोक, सोने की लंका, द्वारिका नगरी और हस्तिनापुर आदि इन्ही के द्वारा बनाएं गए थे। इसीलिए परम्परा के अनुसार विश्वकर्मा जयंती के दिन दफ्तरों, कार्यालयों, कारखानों आदि में पूजा की जाती है।

इस दिन सभी काम करने वाले अपने सामान की पूजा करते हैं। साथ ही ऐसा माना जाता है की इस दिन अपने कार्यस्थलों की पूजा करने से कारोबार में मुनाफा होता है। इस दिन कारखानों और कार्यालयों में अच्छे से साफ सफाई करते हैं उसके बाद भगवान विश्वकर्मा की मिट्टी की मूर्ति को सजाते हैं। इसके अलावा घर के लोग भी अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, घर, मोटर, गाडी आदि की पूजा भी करते हैं। तो आइये अब साल 2021 में विश्वकर्मा जयंती कब है, पूजा विधि और आरती के बारे में विस्तार से जानते हैं।

विश्वकर्मा जयंती की पूजा के लिए आवश्यक पूजा सामग्री

अक्षत, फूल, चंदन, धूप, अगरबत्ती, दही, रोली, सुपारी, रक्षा सूत्र, मिठाई, फल आदि भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने के लिए पूजन की आवश्यक सामग्री है, और आपको पूजा से पहले इन सभी सामान को इक्क्ठा कर लेना चाहिए ताकि पूजा में कोई दिक्कत न आये।

पूजा विधि

  • विश्वकर्मा पूजा करने के दिन आप पूजा के दिन सभी जरूरी सामान को एक जगह एकत्रित करके रखें
  • उसके बाद पूजा करने वाली जगह पर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए।
  • फिर विधिवत अष्टदल की रंगोली बनाकर कलश स्थापना करनी चाहिए।
  • ऐसा करने के बाद आपको विधिविधान से स्वयं या किसी ब्राह्मण, आचार्य आदि से पूजन करवाना चाहिए।
  • पूजा करते समय अपना ध्यान केवल पूजा की और रखें और हाथ जोड़कर निवेदन करें की आपके काम में तरक्की बढ़ती रहे और भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते समय उनके मंत्रों का जाप करें।

विश्वकर्मा जयंती के दिन पूजा के समय इन मंत्रों का जाप करें

ॐ आधार शक्तपे नमः

ॐ कूमयि नमः

ॐ अनंतम नमः

ॐ पृथिव्यै नमः

विश्वकर्मा जयंती की आरती

विश्वकर्मा जी की आरती: ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।

सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक श्रुति धर्मा॥ ॐ जय.

आदि सृष्टि में विधि को श्रुति उपदेश दिया। जीव मात्रा का जग में, ज्ञान विकास किया॥ ॐ जय.

ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नहीं पाई। ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई॥ ॐ जय.

रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना। संकट मोचन बनकर, दूर दु:ख कीना॥ ॐ जय.

जब रथकार दंपति, तुम्हरी टेर करी। सुनकर दीन प्रार्थना, विपत हरी सगरी॥ ॐ जय.

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे। त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज, सकल रूप सजे॥ ॐ जय.

ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे। मन दुविधा मिट जावे, अटल शक्ति पावे॥ ॐ जय

श्री विश्वकर्मा जी की आरती, जो कोई नर गावे। कहत गजानंद स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥ ॐ जय

विश्वकर्मा जयंती 2021 में कब है?

2021 में विश्वकर्मा जयंती 17 सितम्बर दिन शुक्रवार को है।

विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त?

पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर दोपहर 01 बजकर 52 मिनट तक है।

विश्वकर्मा पूजा के दिन ध्यान रखने योग्य बातें

  • इस दिन पूजा में आपके काम में उपयोग किये जाने वाले औज़ारों को रखना नहीं भूलें।
  • पूजा के दिन किसी भी पुरानी मशीन या औज़ार को बाहर नहीं फेकें क्योंकि ऐसा करना भगवान विश्वकर्मा का अपमान माना जाता है।
  • इस दिन मशीन से जुड़ा कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए।
  • यदि आपके पास कोई वाहन है तो इस दिन वाहन की साफ़ सफाई और पूजा जरूर करें।
  • नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करें।
  • विश्वकर्मा पूजा के दिन निर्धन व्यक्ति और ब्राह्मण को दान अवश्य देना चाहिए।

तो यह है विश्वकर्मा जयंती से जुडी सम्पूर्ण जानकारी, तो आपको भी अपने कार्यस्थल पर इस दिन पूजा का आयोजन जरूर करना चाहिए। ताकि आपके काम में हमेशा तरक्की होती रहें और आपका कारोबार दिन दुगुनी रात चौगुनी तरक्की करे।

Vishwakarma Jayanti 2021

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