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Vishwakarma Puja 2018 Date : विश्वकर्मा पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

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विश्वकर्मा पूजा 2018

विश्वकर्मा पूजा 2018 में 17 सितंबर, सोमवार के दिन मनाया जायेगा। भगवान विश्वकर्मा को हिंदू धर्म में सृजन और निर्माण (शिल्प शास्त्र) का देवता माना जाता है। इनको “देवताओं का शिल्पकार” माना जाता है। हर साल विश्वकर्मा पूजा और विश्वकर्मा जयंती कन्या संक्रांति के दिन मनाई जाती है। इसे पूरे देश को बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है। सभी लोग विश्वकर्मा देवता की पूजा करते है, अपने औजारों की साफ सफाई करते है, उनकी पूजा करते है और प्रसाद बड़े उल्लास से बांटते हैं।

दुकानों को रंग बिरंगे कागज से सजाते है, गुब्बारे लगाते है। औजारों की विशेष रूप से पूजा करते है क्यूंकि बिना इनके हम कोई भी चीज नही बना सकते है। कुर्सी, मेज से लेकर बड़े हवाई जहाज, ट्रेन, लड़ाकू विमान, युद्धपोत बनाने के लिए हमे औजारों की जरूरत होती है। ऐसी मान्यता है की भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से शिल्प कला का विकास होता है, और ज्ञान मिलता है जिससे इंजीनियर, मिस्त्री, वेल्डर, बढ़ई, मकेनिक, जैसे पेशेवर लोग और अधिक कुशलता से काम कर पाते है। यदि हमारे जीवन से शिल्प कला (भवन और वस्तु निर्माण कला) को निकाल दिया जाये तो हम फिर से पाषाण काल में चले जायेंगे। आज जितना भी विकास हम अपने चारो तरफ देखते है उसे बिना शिल्प कला के बना पाना असम्भव होता।

कहाँ होती है विश्वकर्मा पूजा?

इस दिन पूरे देश में विश्वकर्मा पूजा सभी फैक्ट्रियों, कारखानों, लोहे की दुकानों, मोटर गाड़ी की दुकानों, वर्कशाप, सर्विस सेंटर मे की जाती है। सभी औजारों की अच्छे से सफाई की जाती है। उनको रंगा जाता है। इस दिन फैक्ट्रियों, वर्कशाप बंद रहता है। कोई काम नही होता है। सिर्फ विश्वकर्मा पूजा ही की जाती है।

विश्वकर्मा पूजा मुहूर्त 2018

संक्रांति समय 07:01 सुबह

कौन लोग मनाते है विश्वकर्मा पूजा?

  • बुनकर
  • कारीगर जो लोहे और अन्य धातुओं से वस्तु निर्माण करते है
  • इंजीनियर
  • राजमिस्त्री
  • मजदूर
  • शिल्पकार
  • बढ़ई
  • वेल्डर
  • मकेनिक
  • सभी औद्योगिक घराने

भगवान विश्वकर्मा द्वारा बनाये गये प्रमुख भवन और वस्तुएं

  • भगवान कृष्ण की नगरी द्वारका का निर्माण किया
  • रावण की नगरी लंका का निर्माण किया
  • स्वर्ग में इंद्र के सिंघासन को बनाया
  • पांड्वो की नगरी इन्द्रप्रस्थ को बनाया
  • इंद्र का वज्र भी इन्होने दधीची की हड्डियों से बनाया था
  • महाभारत काल में हस्तिनापुर का निर्माण किया
  • जगन्नाथ पूरी में “जगन्नाथ” मंदिर का निर्माण किया
  • पुष्पक विमान का निर्माण किया
  • सभी देवताओं के महलो का निर्माण किया
  • कर्ण का कुंडल बनाया
  • विष्णु का सुदर्शन चक्र बनाया
  • भगवान शंकर का त्रिशूल का निर्माण किया
  • यमराज का कालदंड बनाया

ऐसा माना जाता है की सोने की लंका, स्वर्ग में इंद्र का आसन, पांडवों की राजधानी को भगवान विश्वकर्मा ने ही बनाया जाता। इस दुनिया में जितनी भी बड़ी इमारतें, बिल्डिंग हम देखते है उसे बनाने में विशेष कौशल की जरूरत होती है। हमारे जीवन में भवन निर्माण कला की बहुत जरूरत होती है। बिना इस कला के किसी भी भवन या इमारत को सही तरह से नही बनाया जा सकता। विश्वकर्मा भवन निर्माण कला (शिल्प शास्त्र) के ही देवता है। विश्वकर्मा पूजा में इनकी पूजा सभी मजदूर, मिस्त्री, इंजीनियर करते हैं। पूरे देश में इसे शवम दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस पर्व को सभी सरकारी और प्राइवेट इंजिनियरिंग सस्थानो में बड़े उल्लास से मनाया जाता है।

कौन थे भगवान विश्वकर्मा?

आदिकाल में सिर्फ 3 प्रमुख देवता थे- ब्रम्हा, विष्णु, महेश। ब्रम्हा जी के पुत्र का नाम “धर्म” था जिनका विवाह “वस्तु” नामक कन्या से हुआ था। उसके बाद धर्म को एक पुत्र की प्राप्ति हुई जिसका नाम “विश्वकर्मा” रखा गया।

विश्वकर्मा पूजा करने की विधि

  • सुबह जल्दी उठकर नहाना चाहिये।
  • पूजा वाली जगह पर भगवान विश्वकर्मा की फोटो रखनी चाहिये
  • उस पर माला चढ़ाये, धूप और दीपक जलाये
  • अपने औजारों की भी पूजा करे
  • भगवान विश्वकर्मा को प्रसाद का भोग लगाये
  • हाथ में फूल और अक्षत लेकर विश्वकर्मा देवता का ध्यान करे और
    ओम आधार शक्तपे नम:
    ओम् कूमयि नम:
    ओम अनन्तम नम:
    पृथिव्यै नम:
  • मंत्र का जाप करे
  • हवन करें
  • भगवान विश्वकर्मा आरती पढ़े-

ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा
सकल सृष्टि के कर्ता रक्षक श्रुति धर्मा
आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया
शिल्प शस्त्र का जग में, ज्ञान विकास किया
ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नही पाई
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई
रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना
संकट मोचन बनकर, दूर दुख कीना
जब रथकार दम्पती, तुमरी टेर करी
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे
द्विभुज, चतुर्भुज, दशभुज, सकल रूप साजे
ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे
मन दुविधा मिट जावे, अटल शांति पावे
श्री विश्वकर्मा जी की आरती, जो कोई नर गावे
कहत गजानन स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे

“बोलो भगवान श्री विश्वकर्मा की।। जय” जयकारा लगाये

आरती के बाद प्रसाद बांटे

विश्वकर्मा पूजा का महत्व

  • ये पूजा करने से व्यापार में तरक्की होती है। एक दूकान से दो दूकान हो जाती है, एक कारखाना से 2, 3 कारखाने हो जाते हैं। व्यापार बढ़ता है।
  • पूजा करने से धोखा नही देती मशीन, बार बार खराब नही होती है मशीन

इस  लेख में हमने आपको “विश्वकर्मा पूजा” से जुड़ी सभी रोचक जानकारी के बारे में विस्तार से बताया है। इनको “प्रथम इंजीनियर” और “मशीन का देवता” भी कहा जाता है। अगर आप भी कोई कारीगर, इंजीनियर, राजमिस्त्री, लोहे से वस्तुओं का निर्माण करने वाले कारीगर, बढ़ई है तो आपको भी “विश्वकर्मा पूजा” करनी चाहिये। ये लेख आपको कैसा लगा, जरुर बतायें।